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डीपीएस की घटना से स्कूलों में मनोवैज्ञानिक चेकअप पर उठे सवाल
Updated Sat, 14 Jul 2018 10:36 PM IST
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डीपीएस में छात्रा से दरिंदगी
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हेडिंग: स्कूलों में मनोवैज्ञानिक चेकअप पर उठे सवाल
स्कूल में महत्वपूर्ण स्थानों पर सीसीटीवी लगाने के नियम की तो नहीं हो रही अनदेखी
इंटरनेट पर सेक्स सामग्री बहुतायत में मिलने से भी बढ़ रही विकृति
अमर उजाला ब्यूरो
ग्रेटर नोएडा। डीपीएस ग्रेटर नोएडा में बच्ची से यौन शोषण की घटना से स्कूल में सीसीटीवी कैमरे महत्वपूर्ण स्थानों पर लगने और कर्मियों के मनोवैज्ञानिक चेकअप होने पर सवाल उठ खड़े हुए हैं। वहीं, मनोचिकित्सकों का कहना है कि इंटरनेट पर सेक्स सामग्री आसानी से मिलने से ऐसी विकृतियों में बढ़ोतरी हो रही है।
गुरुग्राम में वर्ष 2017 में रॉयन स्कूल में छात्र की हत्या का मामला देशभर में छाने के बाद गौतमबुद्धनगर में भी सभी स्कूलों पर सीसीटीवी लगाने, स्कूल कर्मियों के मनोवैज्ञानिक चेकअप आदि के बारे में स्कूल दावा कर रहे थे, लेकिन अब इसका असर कहीं दिख नहीं रहा है। मनोचिकित्सक डॉ. अभय सिंह तोमर का कहना है कि यह एक तरह की मनोविकृति है। पीडोफीलिया (बच्चों से यौन शोषण) के मनोविकृति का शिकार व्यक्ति आम लोगों की तरह ही बर्ताव करते हैं और सामान्य रूप में इन्हें पहचाना नहीं जा सकता है। हालांकि, मनोवैज्ञानिक यदि ऐसे लोगों से बातचीत करते हैं तो तकनीक के अनुसार इनकी पहचान की जा सकती है। यदि स्कूलों में इस तरह की जांच या चेकअप किया जाता है तो अक्सर ऐसे मामले सामने आ सकते हैं। इसके बारे में स्कूलों को बताया जा सकता है, जिससे ऐसी घटनाएं न हो सकें और ऐसे मनोविकृति के शिकार कर्मियों का उपचार किया जा सकता है।
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पुरुष लाइफ गार्ड के साथ क्यों नहीं थी महिला कर्मी
स्वीमिंग पूल पर इस तरह की घटना में स्वयं स्कूल भी जिम्मेदार है। पुरुष लाइफ गार्ड के साथ वहां पर यदि कोई महिला लाइफ गार्ड या अन्य महिला कर्मी होती तो घटना नहीं होती। इसके अलावा सीसीटीवी महत्वपूर्ण स्थानों पर लगाने के आदेश के बाद भी स्कूल लगातार इन आदेशों की अवहेलना कर रहे हैं।
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- अंजू पुंडीर, सचिव अभिभावक संघ गौतमबुद्धनगर
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हेडिंग: स्कूलों में मनोवैज्ञानिक चेकअप पर उठे सवाल
स्कूल में महत्वपूर्ण स्थानों पर सीसीटीवी लगाने के नियम की तो नहीं हो रही अनदेखी
इंटरनेट पर सेक्स सामग्री बहुतायत में मिलने से भी बढ़ रही विकृति
अमर उजाला ब्यूरो
ग्रेटर नोएडा। डीपीएस ग्रेटर नोएडा में बच्ची से यौन शोषण की घटना से स्कूल में सीसीटीवी कैमरे महत्वपूर्ण स्थानों पर लगने और कर्मियों के मनोवैज्ञानिक चेकअप होने पर सवाल उठ खड़े हुए हैं। वहीं, मनोचिकित्सकों का कहना है कि इंटरनेट पर सेक्स सामग्री आसानी से मिलने से ऐसी विकृतियों में बढ़ोतरी हो रही है।
गुरुग्राम में वर्ष 2017 में रॉयन स्कूल में छात्र की हत्या का मामला देशभर में छाने के बाद गौतमबुद्धनगर में भी सभी स्कूलों पर सीसीटीवी लगाने, स्कूल कर्मियों के मनोवैज्ञानिक चेकअप आदि के बारे में स्कूल दावा कर रहे थे, लेकिन अब इसका असर कहीं दिख नहीं रहा है। मनोचिकित्सक डॉ. अभय सिंह तोमर का कहना है कि यह एक तरह की मनोविकृति है। पीडोफीलिया (बच्चों से यौन शोषण) के मनोविकृति का शिकार व्यक्ति आम लोगों की तरह ही बर्ताव करते हैं और सामान्य रूप में इन्हें पहचाना नहीं जा सकता है। हालांकि, मनोवैज्ञानिक यदि ऐसे लोगों से बातचीत करते हैं तो तकनीक के अनुसार इनकी पहचान की जा सकती है। यदि स्कूलों में इस तरह की जांच या चेकअप किया जाता है तो अक्सर ऐसे मामले सामने आ सकते हैं। इसके बारे में स्कूलों को बताया जा सकता है, जिससे ऐसी घटनाएं न हो सकें और ऐसे मनोविकृति के शिकार कर्मियों का उपचार किया जा सकता है।
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पुरुष लाइफ गार्ड के साथ क्यों नहीं थी महिला कर्मी
स्वीमिंग पूल पर इस तरह की घटना में स्वयं स्कूल भी जिम्मेदार है। पुरुष लाइफ गार्ड के साथ वहां पर यदि कोई महिला लाइफ गार्ड या अन्य महिला कर्मी होती तो घटना नहीं होती। इसके अलावा सीसीटीवी महत्वपूर्ण स्थानों पर लगाने के आदेश के बाद भी स्कूल लगातार इन आदेशों की अवहेलना कर रहे हैं।
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- अंजू पुंडीर, सचिव अभिभावक संघ गौतमबुद्धनगर