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मेट्रो
Updated Sat, 17 Nov 2018 03:03 AM IST
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हवा के छोटे कणों ने बढ़ाई अस्थमा मरीजों की परेशानी : दीपक तलवार
कहा, फेफड़ों की गहराई में प्रवेश कर जाते हैं, दवा भी बेअसर
अमर उजाला ब्यूरो
नोएडा। दिल्ली एनसीआर की हवा में मौजूद छोटे कण अस्थमा और ब्रोंकाइटिस के कारण बन रहे हैं। ये कण फेफड़ों में जाकर अस्थमा के मरीजों की परेशानी का कारण बन रहे हैं। ये फेफड़ों की गहराई में प्रवेश कर जाते हैं। इनहेलर्स और नेबुलाइजर्स के माध्यम से दवा के निरंतर सेवन के बावजूद सांस लेने में कठिनाई होती है। मेट्रो अस्पताल में रेस्पिरेटरी सेंटर के डायरेक्टर डॉ. दीपक तलवार ने अस्थमा थेरेपी की स्थापना के दौरान यह बात कही। उन्होंने बताया कि इसे ब्रोन्कियल थर्मोप्लास्टी के नाम से जाना जाता है। दुनिया भर में यह गंभीर अस्थमा के लिए एक आशाजनक उपचार है। फेफड़ों के अंदर कुछ मांसपेशियां होती हैं जिन्हें स्मूद मसल्स कहा जाता है। जो अस्थमा के दौरे के दौरान कठोर हो जाती हैं। जिससे सांस लेने में कठिनाई होती है। ब्रोंकियल थर्मोप्लास्टी फेफड़ों में हवा का प्रवाह बढ़ाने के लिए हीट का इस्तेमाल कर इन मांसपेशियों पर दबाव पैदा करती है।