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अस्पताल के खिलाफ नेग्लिजेंसी बोर्ड में शिकायत दर्ज
Updated Sun, 04 Nov 2018 11:00 PM IST
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अस्पताल के खिलाफ नेग्लिजेंसी बोर्ड में शिकायत दर्ज
गुरुग्राम। जिला नेग्लिजेंसी बोर्ड में आर्टिमिस अस्पताल के खिलाफ इलाज में लापरवाही की शिकायत दर्ज करवाई गई है। डॉक्टरों पर मरीज के पित्ताशय के ऑपरेशन के दौरान भोजन की नली काटने का आरोप लगाया गया है। वहीं इसकी एवज में मरीज के परिजनों को साढ़े चार लाख रुपये का बिल थमा दिया गया। परिजनों ने अस्पताल के खिलाफ पुलिस में शिकायत दी थी। मेडिकल नेग्लिजेंसी का मामला होने के कारण पुलिस ने शिकायत नेग्जिलेंसी बोर्ड को भेजी है।
पालम विहार निवासी अनिल देशवाल ने बताया कि 15 अगस्त को उन्होंने अपनी मां कलावती (70) को पथरी के इलाज के लिए आर्टिमिस अस्पताल में भर्ती करवाया था। यहां डॉक्टर ने पथरी निकालने की बात कही थी। आरोप है कि ऑपरेशन के दौरान डॉक्टर से मरीज की खाने की नली कट गई। इस दौरान मरीज की हालत ज्यादा बिगड़ने लगी और आईसीयू में शिफ्ट किया गया। डॉक्टरों ने परिजनों को बताया कि मरीज की खाने की नली कमजोर थी, जिस कारण वो कट गई। इसके लिए अलग से ऑपरेशन करना पड़ेगा। परिजनों को तीन लाख रुपये जमा करने को कहा गया। खाने की नली का दोबारा ऑपरेशन किया गया, लेकिन वह पूरी तरह सफल नहीं हुआ। 30 अगस्त को मरीज को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। धीरे-धीर हालत बिगड़ती गई और 22 सितंबर को महिला की मौत हो गई। नेग्लिजेंसी बोर्ड के सदस्य डॉ. संजय नरूला ने बताया कि पुलिस की ओर से शिकायत बोर्ड को मिली है। शिकायत पर जांच के लिए डॉक्टरों के बोर्ड का गठन कर दिया गया है।
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गुरुग्राम। जिला नेग्लिजेंसी बोर्ड में आर्टिमिस अस्पताल के खिलाफ इलाज में लापरवाही की शिकायत दर्ज करवाई गई है। डॉक्टरों पर मरीज के पित्ताशय के ऑपरेशन के दौरान भोजन की नली काटने का आरोप लगाया गया है। वहीं इसकी एवज में मरीज के परिजनों को साढ़े चार लाख रुपये का बिल थमा दिया गया। परिजनों ने अस्पताल के खिलाफ पुलिस में शिकायत दी थी। मेडिकल नेग्लिजेंसी का मामला होने के कारण पुलिस ने शिकायत नेग्जिलेंसी बोर्ड को भेजी है।
पालम विहार निवासी अनिल देशवाल ने बताया कि 15 अगस्त को उन्होंने अपनी मां कलावती (70) को पथरी के इलाज के लिए आर्टिमिस अस्पताल में भर्ती करवाया था। यहां डॉक्टर ने पथरी निकालने की बात कही थी। आरोप है कि ऑपरेशन के दौरान डॉक्टर से मरीज की खाने की नली कट गई। इस दौरान मरीज की हालत ज्यादा बिगड़ने लगी और आईसीयू में शिफ्ट किया गया। डॉक्टरों ने परिजनों को बताया कि मरीज की खाने की नली कमजोर थी, जिस कारण वो कट गई। इसके लिए अलग से ऑपरेशन करना पड़ेगा। परिजनों को तीन लाख रुपये जमा करने को कहा गया। खाने की नली का दोबारा ऑपरेशन किया गया, लेकिन वह पूरी तरह सफल नहीं हुआ। 30 अगस्त को मरीज को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। धीरे-धीर हालत बिगड़ती गई और 22 सितंबर को महिला की मौत हो गई। नेग्लिजेंसी बोर्ड के सदस्य डॉ. संजय नरूला ने बताया कि पुलिस की ओर से शिकायत बोर्ड को मिली है। शिकायत पर जांच के लिए डॉक्टरों के बोर्ड का गठन कर दिया गया है।
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