{"_id":"61d1c393995ade04d05ad59c","slug":"15-crores-inflicted-yet-the-officer-was-kind-noida-news-noi6247244182","type":"story","status":"publish","title_hn":"15 करोड़ का पहुंचाया नुकसान फिर भी अधिकारी मेहरबान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
15 करोड़ का पहुंचाया नुकसान फिर भी अधिकारी मेहरबान
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नोएडा। विद्युत निगम को राजस्व क्षति पहुंचाने और भ्रष्ट अधिकारियों के प्रति आला अफसरों का मोह भंग नहीं हो रहा है। जिस अधिकारी ने पद पर रहते हुए निगम को 15 करोड़ का नुकसान और बिल्डर को करोड़ों का लाभ पहुंचाया। मामले में कार्रवाई करने के बजाय आला अधिकारी उस पर मेहरबान हैं। दोषी अधिकारी को जांच कार्यालय से संबद्ध कर दिया है। निगम के कुछ अधिकारियों ने सेवा नियमावली का आरोप लगाते हुए उच्चाधिकारियों से इस प्रकरण की शिकायत की है। विद्युत निगम में अधीक्षण अभियंता रहने के दौरान राकेश राणा ने बिल्डर को बड़ा कनेक्शन दे दिया और बाद में धीरे-धीरे नियमों के विरुद्ध भार कम कर दिया। जबकि, इस प्रकरण में आला अधिकारियों से अनुमति लेनी होती है। मामले की शिकायत हुई तो प्रकरण की जांच कराई गई।
मामले में अधिशासी अभियंता लाल सिंह राकेश और एक अन्य अधिकारी को दोषी मानते हुए डिमोशन कर दिया गया। जबकि ,आला अफसरों से अच्छी पकड़ की वजह से अधीक्षण अभियंता को पदोन्नति मिल गई और उन्हें मुख्य अभियंता बना दिया गया। इसके बाद राकेश राणा ने खूब कमाई की और रिटायर होने से चंद दिन पहले ही निदेशक बन गए। एक बार फिर पुराने मामले की शिकायत की गई। जांच में 15-16 करोड़ रुपये का नुकसान होने की जानकारी मिली। बिल्डर को गलत तरीके से लाभ पहुंचाने में दोषी मानते हुए राकेश राणा को पहले पद से हटाकर प्रबंध निदेशक के कार्यालय से अटैच कर दिया गया है। जबकि, सेवा नियमावली के तहत जिस क्षेत्र में आरोप लगते हैं और जिस कार्यालय से जांच कराई जाती है। वहां पर आरोप पत्र के बाद उक्त अधिकारी को संबद्ध नहीं किया जा सकता है। इस प्रकरण में आला अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं। मुख्य अभियंता वीएन सिंह ने बताया कि इस संबंध में उनको कोई जानकारी नहीं है।
विज्ञापन
मामले में अधिशासी अभियंता लाल सिंह राकेश और एक अन्य अधिकारी को दोषी मानते हुए डिमोशन कर दिया गया। जबकि ,आला अफसरों से अच्छी पकड़ की वजह से अधीक्षण अभियंता को पदोन्नति मिल गई और उन्हें मुख्य अभियंता बना दिया गया। इसके बाद राकेश राणा ने खूब कमाई की और रिटायर होने से चंद दिन पहले ही निदेशक बन गए। एक बार फिर पुराने मामले की शिकायत की गई। जांच में 15-16 करोड़ रुपये का नुकसान होने की जानकारी मिली। बिल्डर को गलत तरीके से लाभ पहुंचाने में दोषी मानते हुए राकेश राणा को पहले पद से हटाकर प्रबंध निदेशक के कार्यालय से अटैच कर दिया गया है। जबकि, सेवा नियमावली के तहत जिस क्षेत्र में आरोप लगते हैं और जिस कार्यालय से जांच कराई जाती है। वहां पर आरोप पत्र के बाद उक्त अधिकारी को संबद्ध नहीं किया जा सकता है। इस प्रकरण में आला अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं। मुख्य अभियंता वीएन सिंह ने बताया कि इस संबंध में उनको कोई जानकारी नहीं है।
विज्ञापन