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महाराष्ट्र में प्लास्टिक बंदी: हाईकोर्ट ने स्टे देने से इनकार किया-Business
Updated Fri, 13 Apr 2018 08:51 PM IST
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महाराष्ट्र में प्लास्टिक बैन
पर हाईकोर्ट का रोक से इनकार
- कारोबारियों को स्टाक तीन महीने के भीतर खत्म करने के लिए कहा
अमर उजाला ब्यूरो
मुंबई। बॉम्बे हाईकोर्ट ने प्लास्टिक सामग्री पर प्रतिबंध लगाने के महाराष्ट्र सरकार के फैसले पर रोक लगाने से शुक्रवार को इनकार कर दिया। लेकिन, इसके साथ ही अदालत ने कारोबारियों को प्लास्टिक की वस्तुओं को नष्ट करने के लिए तीन महीने का समय भी दिया है।
राज्य सरकार ने प्लास्टिक व थर्माकोल से पर्यावरण को हो रहे भारी नुकसान के मद्देनजर 23 मार्च को अधिसूचना जारी कर प्लास्टिक व थर्माकोल के इस्तेमाल, बिक्री और वितरण पर प्रतिबंध लगा दिया है। इसके इस्तेमाल पर 5 हजार रुपये आर्थिक दंड और तीन महीने के कारावास की सजा का प्रावधान किया गया है। महाराष्ट्र में प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद प्लास्टिक मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है।
शुक्रवार को अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि पर्यावरण की अनदेखी नहीं की जा सकती। इस तरह हाईकोर्ट ने एक तरह से सरकार के निर्णय का समर्थन किया है। मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति अभय ओक और न्यायमूर्ति रियाज छागला की खंडपीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता और प्लास्टिक के कारोबार में शामिल लोगों को प्रतिबंध से असर पड़ा है। लेकिन, प्लास्टिक के कचरे के दुष्प्रभाव की अनदेखी नहीं की जा सकती। इसलिए प्लास्टिक बंदी पर स्टे देने की मांग को खारिज कर दिया। साथ ही खंडपीठ ने निर्देश दिया कि प्लास्टिक की थैली, बोतल आदि तीन महीने में नष्ट किए जाए। महाराष्ट्र सरकार ने अदालत में हलफनामा दिया था कि सूबे में प्रतिदिन 1200 टन प्लास्टिक कचरा पैदा हो रहा है जिसे नष्ट करने का कोई वैज्ञानिक प्रावधान नहीं है। इसलिए प्लास्टिक से पर्यावरण को भारी खतरा पैदा हो गया है।
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महाराष्ट्र में प्लास्टिक बैन
पर हाईकोर्ट का रोक से इनकार
- कारोबारियों को स्टाक तीन महीने के भीतर खत्म करने के लिए कहा
अमर उजाला ब्यूरो
मुंबई। बॉम्बे हाईकोर्ट ने प्लास्टिक सामग्री पर प्रतिबंध लगाने के महाराष्ट्र सरकार के फैसले पर रोक लगाने से शुक्रवार को इनकार कर दिया। लेकिन, इसके साथ ही अदालत ने कारोबारियों को प्लास्टिक की वस्तुओं को नष्ट करने के लिए तीन महीने का समय भी दिया है।
राज्य सरकार ने प्लास्टिक व थर्माकोल से पर्यावरण को हो रहे भारी नुकसान के मद्देनजर 23 मार्च को अधिसूचना जारी कर प्लास्टिक व थर्माकोल के इस्तेमाल, बिक्री और वितरण पर प्रतिबंध लगा दिया है। इसके इस्तेमाल पर 5 हजार रुपये आर्थिक दंड और तीन महीने के कारावास की सजा का प्रावधान किया गया है। महाराष्ट्र में प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद प्लास्टिक मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है।
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शुक्रवार को अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि पर्यावरण की अनदेखी नहीं की जा सकती। इस तरह हाईकोर्ट ने एक तरह से सरकार के निर्णय का समर्थन किया है। मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति अभय ओक और न्यायमूर्ति रियाज छागला की खंडपीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता और प्लास्टिक के कारोबार में शामिल लोगों को प्रतिबंध से असर पड़ा है। लेकिन, प्लास्टिक के कचरे के दुष्प्रभाव की अनदेखी नहीं की जा सकती। इसलिए प्लास्टिक बंदी पर स्टे देने की मांग को खारिज कर दिया। साथ ही खंडपीठ ने निर्देश दिया कि प्लास्टिक की थैली, बोतल आदि तीन महीने में नष्ट किए जाए। महाराष्ट्र सरकार ने अदालत में हलफनामा दिया था कि सूबे में प्रतिदिन 1200 टन प्लास्टिक कचरा पैदा हो रहा है जिसे नष्ट करने का कोई वैज्ञानिक प्रावधान नहीं है। इसलिए प्लास्टिक से पर्यावरण को भारी खतरा पैदा हो गया है।
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