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वर्ष 2026 तक दिल्ली की सड़को पर दौड़ेंगी 11,000 बसें : मुख्यमंत्री
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विधानसभा में वायु प्रदूषण की रोकथाम व सार्वजनिक परिवहन को सुदृढ़ करने की योजनाएं बताईं
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70 लाख नए पौधे लगाए जाएंगे
06 एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन बनेंगे
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बुधवार को विधानसभा में कैग रिपोर्ट पर चर्चा के दौरान वायु प्रदूषण की रोकथाम और सार्वजनिक परिवहन को सुदृढ़ करने के लिए योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार 2026 तक दिल्ली की सड़कों पर 11,000 बसें उतारने के लिए प्रतिबद्ध है। वर्तमान में दिल्ली में 6,484 बसें संचालित हो रही हैं, जबकि जरूरत 11,000 बसों की है। सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करने के लिए रूट रेशनलाइजेशन की प्रक्रिया अपनाई जाएगी, ताकि बस सेवा पूरे शहर में प्रभावी रूप से उपलब्ध हो सके। ई-बसों की संख्या बढ़ाने के लिए चार्जिंग स्टेशनों और डिपो का विस्तार किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने बताया कि दिल्ली में प्रदूषण कम करने के लिए कई अहम कदम उठाए जाएंगे। इस साल 70 लाख नए पौधे लगाए जाएंगे, ताकि हरित क्षेत्र को बढ़ाया जा सके। इसके अलावा 1000 वाटर स्प्रिंक्लिंग मशीनें पूरे साल के लिए तैनात की जाएंगी, ताकि सड़कों पर धूल को नियंत्रित किया जा सके। राजधानी में वायु गुणवत्ता की निगरानी के लिए छह नए एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन स्थापित किए जाएंगे। इससे प्रदूषण स्तर की सही जानकारी मिलेगी और उसके अनुसार कदम उठाए जाएंगे। सरकार ई-कचरे के वैज्ञानिक निपटान के लिए नया इको पार्क स्थापित करेगी। ट्रैफिक निगरानी और सुरक्षा बढ़ाने के लिए 500 नए कैमरे प्रमुख ट्रैफिक जंक्शनों पर लगेंगे, जो नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों की पहचान करेंगे। इसके अलावा एक इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर स्थापित किया जाएगा, जो वायु गुणवत्ता, कचरा प्रबंधन और स्वच्छता व्यवस्था की निगरानी करेगा।
मुख्यमंत्री ने पिछली सरकार पर संसाधनों के दुरुपयोग और सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था की अनदेखी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार ने नीतियों और निगरानी व्यवस्था को कमजोर कर दिया, जिससे दिल्ली की वायु गुणवत्ता खराब होती चली गई। राजधानी में वाहनों से होने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए दस साल से अधिक पुराने डीजल वाहनों और 15 साल से अधिक पुराने पेट्रोल वाहनों पर सख्त प्रतिबंध लगाया जाएगा। दिल्ली सरकार मेट्रो के चौथे और पांचवें चरण के विस्तार पर तेजी से काम कर रही है, जिसके लिए बजट में 3000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
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इससे सार्वजनिक परिवहन को और अधिक सुगम बनाया जाएगा और लोग निजी वाहनों के बजाय सार्वजनिक परिवहन का अधिक उपयोग करेंगे। दिल्ली को स्वच्छ और हरित बनाने के लिए सरकार हर संभव प्रयास कर रही है। सरकार की सभी योजनाएं केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि उन्हें जमीनी स्तर पर प्रभावी रूप से लागू किया जाएगा, ताकि राजधानी को प्रदूषण मुक्त और आधुनिक बनाया जा सके।।
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70 लाख नए पौधे लगाए जाएंगे
06 एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन बनेंगे
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बुधवार को विधानसभा में कैग रिपोर्ट पर चर्चा के दौरान वायु प्रदूषण की रोकथाम और सार्वजनिक परिवहन को सुदृढ़ करने के लिए योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार 2026 तक दिल्ली की सड़कों पर 11,000 बसें उतारने के लिए प्रतिबद्ध है। वर्तमान में दिल्ली में 6,484 बसें संचालित हो रही हैं, जबकि जरूरत 11,000 बसों की है। सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करने के लिए रूट रेशनलाइजेशन की प्रक्रिया अपनाई जाएगी, ताकि बस सेवा पूरे शहर में प्रभावी रूप से उपलब्ध हो सके। ई-बसों की संख्या बढ़ाने के लिए चार्जिंग स्टेशनों और डिपो का विस्तार किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने बताया कि दिल्ली में प्रदूषण कम करने के लिए कई अहम कदम उठाए जाएंगे। इस साल 70 लाख नए पौधे लगाए जाएंगे, ताकि हरित क्षेत्र को बढ़ाया जा सके। इसके अलावा 1000 वाटर स्प्रिंक्लिंग मशीनें पूरे साल के लिए तैनात की जाएंगी, ताकि सड़कों पर धूल को नियंत्रित किया जा सके। राजधानी में वायु गुणवत्ता की निगरानी के लिए छह नए एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन स्थापित किए जाएंगे। इससे प्रदूषण स्तर की सही जानकारी मिलेगी और उसके अनुसार कदम उठाए जाएंगे। सरकार ई-कचरे के वैज्ञानिक निपटान के लिए नया इको पार्क स्थापित करेगी। ट्रैफिक निगरानी और सुरक्षा बढ़ाने के लिए 500 नए कैमरे प्रमुख ट्रैफिक जंक्शनों पर लगेंगे, जो नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों की पहचान करेंगे। इसके अलावा एक इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर स्थापित किया जाएगा, जो वायु गुणवत्ता, कचरा प्रबंधन और स्वच्छता व्यवस्था की निगरानी करेगा।
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मुख्यमंत्री ने पिछली सरकार पर संसाधनों के दुरुपयोग और सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था की अनदेखी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार ने नीतियों और निगरानी व्यवस्था को कमजोर कर दिया, जिससे दिल्ली की वायु गुणवत्ता खराब होती चली गई। राजधानी में वाहनों से होने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए दस साल से अधिक पुराने डीजल वाहनों और 15 साल से अधिक पुराने पेट्रोल वाहनों पर सख्त प्रतिबंध लगाया जाएगा। दिल्ली सरकार मेट्रो के चौथे और पांचवें चरण के विस्तार पर तेजी से काम कर रही है, जिसके लिए बजट में 3000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
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इससे सार्वजनिक परिवहन को और अधिक सुगम बनाया जाएगा और लोग निजी वाहनों के बजाय सार्वजनिक परिवहन का अधिक उपयोग करेंगे। दिल्ली को स्वच्छ और हरित बनाने के लिए सरकार हर संभव प्रयास कर रही है। सरकार की सभी योजनाएं केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि उन्हें जमीनी स्तर पर प्रभावी रूप से लागू किया जाएगा, ताकि राजधानी को प्रदूषण मुक्त और आधुनिक बनाया जा सके।।