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Noida News: विश्व बाईपोलर डिसऑर्डर दिवस आज

Wed, 29 Mar 2023 05:48 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Wed, 29 Mar 2023 05:48 PM IST
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charas recoverd
विश्व बाईपोलर डिसऑर्डर दिवस आज
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दवा से ज़्यादा चाहिए प्यार...दूर हो जाएगा मानसिक विकार

- मानसिक बीमारी है बाईपोलर डिसऑर्डर, लगातार बदलती रहती है मनोस्थिति, आत्महत्या के आते हैं विचार

मेरठ। बाईपोलर डिसऑर्डर (द्विध्रुवी विकार), इसमें अजीब तरह की मानसिक स्थिति होती है, जिसमें व्यक्ति को यह समझ नहीं आता कि उसे क्या करना चाहिए और क्या नहीं। लगातार मनोस्थिति बदलती रहती है। यह स्थिति कुछ सप्ताह, महीनों या सालों रह सकती है। चिकित्सक इस स्थिति से निकलने के लिए दवा से ज्यादा प्यार और प्रोत्साहन की जरूरत बताते हैं।
इस बीमारी के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए हर साल 30 मार्च को विश्व बाइपोलर डिसऑर्डर दिवस मनाया जाता है। मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ रवि राणा ने बताया कि हर 100 में से एक व्यक्ति बाइपोलर डिसऑर्डर से ग्रस्त होता है। बाइपोलर डिसऑर्डर को द्विध्रुवी मानसिक विकार भी कहा जाता है। इससे ग्रस्त व्यक्ति एक मसले पर दो अलग-अलग तरह की राय में तब्दील हो जाता है। इससे परेशान होकर वह यह तय नहीं कर पाता कि असल में उसे क्या करना चाहिए। इस बीमारी के उच्च स्तर के होने पर दुखी रहना, ऊर्जा में कमी, इच्छा में कमी, आत्मविश्वास में कमी, आत्महत्या की इच्छा करना और चिड़चिड़ा होना आदि लक्षण दिखाई देते हैं। निम्न स्तर में होने पर बहुत अधिक खुशी, नींद की जरूरत घटना, बहुत अधिक बोलना, जोखिम लेना, अति आत्मविश्वास होना, बहुत अधिक जोश में रहना आदि लक्षण दिखते हैं। यह महिलाओं और पुरुषों दोनों को किसी भी उम्र में हो सकता है।
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जिला अस्पताल के मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ कमलेंद्र किशोर ने बताया कि ओपीडी में हर माह इस तरह के 150 से अधिक मरीज आते हैं। असल में अन्य बीमारियों की तरह दिखने वाली बीमारी नहीं है, बल्कि एक खास किस्म की मानसिक स्थिति अथवा विकार है। इसमें दवा से ज्यादा प्यार और प्रोत्साहन की जरूरत होती है। अगर आपके आसपास ऐसा कोई व्यक्ति है जिसमें इस तरह के लक्षण नजर आते हैं, तो उसे हतोत्साहित न करें, बल्कि सांत्वना देते रहें। द्विध्रुवी विकार से ग्रस्त होने पर आदमी की मानसिक स्थिति भी बदल जाती है, ऐसे में उसकी भावनाओं को समझना थोड़ा मुश्किल हो जाता है। मेडिकल कॉलेज के मनोचिकित्सक डॉ तरुण पाल बताते हैं कि मेडिकल की ओपीडी में हर माह ऐसे मरीजों की संख्या 300 से अधिक है। व्यक्ति के मिजाज और व्यवहार में बदलाव महज तनाव नहीं है। यह ‘बाइपोलर डिसऑर्डर’ के लक्षण हो सकते हैं। इसमें आपकी खुशी और गम दोनों अपनी पराकाष्ठा पर होते हैं।
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केस एक
खैरनगर के विजय कुमार (32) कभी इतने हिंसक हो जाते थे कि कंट्रोल करना मुश्किल हो जाता था। कभी एकदम शांत हो जाते थे, किसी भी बात का जवाब ही नहीं देते थे। कई बार बिना किसी कारण के रोने लग जाते थे और खुद को कमरे में बंद कर लेते थे। परिवार वाले भूतप्रेत का साया समझ रहे थे, जिला अस्पताल के मानसिक रोग विभाग में दिखाया तो पता चला बाइपोलर डिसऑर्डर है। इलाज चल रहा है।


केस दो
जागृति विहार के नरेंद्र सिंह (53) कभी लंबे समय तक उदास हो जाते थे, बहुत गुस्सा करते थे, कम सोते थे। कभी बहुत बोलते थे, कभी बिल्कुल नहीं। परिवार ने उन्हें मेडिकल कॉलेज के मानसिक रोग विभाग में दिखाया तो बाइपोलर डिसऑर्डर बीमारी का पता चला। इलाज चला, वह अब ठीक हैं।

ऐसे करें बचाव...

- मरीज को अपनी नींद का समय तय रखना चाहिए।
- नशीले पदार्थों के सेवन से बचना चाहिए।
- इस बीमारी में आत्मविश्वास बनाए रखना और खुद पर नियंत्रण भी जरूरी होता है।
- दवा, मनोवैज्ञानिक इलाज और परिवार की काउंसलिंग भी जरूरी
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