{"_id":"5b5157e54f1c1b19208b5b84","slug":"noida-authority-will-seal-dangerous-buildings-after-shahberi-incident","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"शाहबेरी हादसे के बाद हरकत में आया प्राधिकरण, करेगा निर्माणाधीन खतरनाक इमारतों को सील ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शाहबेरी हादसे के बाद हरकत में आया प्राधिकरण, करेगा निर्माणाधीन खतरनाक इमारतों को सील
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा
Updated Fri, 20 Jul 2018 09:51 AM IST
विज्ञापन
building
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नोएडा प्राधिकरण ने शाहबेरी की घटना के बाद संज्ञान लेते हुए शहर में ऐसी इमारतों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की बात कही है। बृहस्पतिवार को प्राधिकरण में हुई बैठक के बाद ऐसी इमारतों को सील करने का निर्णय लिया गया, जो जानमाल की दृष्टि से खतरनाक हैं।
बैठक के बाद प्राधिकरण के जीएम राजीव त्यागी और समाकांत श्रीवास्तव को ऐसे मामले में कार्रवाई करने को कहा गया है। अब प्राधिकरण ऐसी इमारतों का सर्वे करेगा और सर्वे के बाद एफआईआर दर्ज कराने और सील करने की कार्रवाई होगी।
ओएसडी राजेश सिंह ने बताया कि प्राधिकरण की ओर से 15 दिन तक कार्रवाई चलेगी और इसमें इस तरह के अवैध निर्माण पर सख्ती बरती जाएगी। इसमें प्राधिकरण के जीएम से लेकर निचले स्तर तक के अधिकारी शामिल होंगे।
विज्ञापन
हालांकि, अधिकारियों ने उन इमारतों के बारे में अभी स्पष्ट नहीं किया, जहां ऐसी इमारतें पहले से ही तैयार हो चुकी हैं और इनमें लोग रह रहे हैं। ऐसी इमारतों के बारे में भी प्राधिकरण को सोचना चाहिए।
विज्ञापन
बैठक के बाद प्राधिकरण के जीएम राजीव त्यागी और समाकांत श्रीवास्तव को ऐसे मामले में कार्रवाई करने को कहा गया है। अब प्राधिकरण ऐसी इमारतों का सर्वे करेगा और सर्वे के बाद एफआईआर दर्ज कराने और सील करने की कार्रवाई होगी।
विज्ञापन
ओएसडी राजेश सिंह ने बताया कि प्राधिकरण की ओर से 15 दिन तक कार्रवाई चलेगी और इसमें इस तरह के अवैध निर्माण पर सख्ती बरती जाएगी। इसमें प्राधिकरण के जीएम से लेकर निचले स्तर तक के अधिकारी शामिल होंगे।
विज्ञापन
हालांकि, अधिकारियों ने उन इमारतों के बारे में अभी स्पष्ट नहीं किया, जहां ऐसी इमारतें पहले से ही तैयार हो चुकी हैं और इनमें लोग रह रहे हैं। ऐसी इमारतों के बारे में भी प्राधिकरण को सोचना चाहिए।
नोएडा प्राधिकरण और जिला प्रशासन के तालमेल की लापरवाही ने छोटे बिल्डरों को गांवों में ऊंची-ऊंची इमारतें खड़ी करने का मौका दे दिया। कहीं अधिग्रहीत तो कहीं अवैध कब्जा कर बिल्डरों ने इमारतें खड़ी करके खूब पैसा कमाया। यहां सस्ते मकान के लिए लोग अभी भी फंसते चले जा रहे हैं।
दरअसल, नोएडा प्राधिकरण ने अधिसूचित जमीन के अधिग्रहण के लिए काफी पहले से कवायद शुरू की। कई गांवों में जमीन का अधिग्रहण कर लिया। अधिग्रहण के बाद सरकारी दर पर मुआवजे की राशि जिला प्रशासन के पास जमा करा दी।
प्राधिकरण ने यह सोचकर जमीनें वैसे ही छोड़ दी कि किसान मुआवजे का पैसा जिला प्रशासन से ले लेंगे, लेकिन अधिकांश किसानों ने मुआवजे का पैसा नहीं उठाया और उस जमीन को अपनी ही समझते रहे।
जिला प्रशासन ने भी यह नहीं बताया कि कितने किसानों ने मुआवजा उठा लिया है और कितनों ने नहीं। जब यहां बड़ी बड़ी इमारतें बन कर तैयार हो गईं और प्राधिकरण की टीम अभियान के तहत मौके पर पहुंची तब यह बात खुलकर सामने आई कि मुआवजा नहीं उठाया गया है।
दरअसल, नोएडा प्राधिकरण ने अधिसूचित जमीन के अधिग्रहण के लिए काफी पहले से कवायद शुरू की। कई गांवों में जमीन का अधिग्रहण कर लिया। अधिग्रहण के बाद सरकारी दर पर मुआवजे की राशि जिला प्रशासन के पास जमा करा दी।
प्राधिकरण ने यह सोचकर जमीनें वैसे ही छोड़ दी कि किसान मुआवजे का पैसा जिला प्रशासन से ले लेंगे, लेकिन अधिकांश किसानों ने मुआवजे का पैसा नहीं उठाया और उस जमीन को अपनी ही समझते रहे।
जिला प्रशासन ने भी यह नहीं बताया कि कितने किसानों ने मुआवजा उठा लिया है और कितनों ने नहीं। जब यहां बड़ी बड़ी इमारतें बन कर तैयार हो गईं और प्राधिकरण की टीम अभियान के तहत मौके पर पहुंची तब यह बात खुलकर सामने आई कि मुआवजा नहीं उठाया गया है।
कोर्ट में भी है अतिक्रमण का मामला
गढ़ी चौखंडी में अतिक्रमण की बात कोर्ट तक पहुंच गई। वहीं के स्थानीय लोगों ने अतिक्रमण की बात कोर्ट तक पहुंचाई। याचिका पर अभी भी सुनवाई चल रही है। हालांकि इसमें प्राधिकरण का दोष है या नहीं यह कोर्ट की सुनवाई के बाद ही पता चल पाएगा।
विकास कार्य तक को अहमियत नहीं देते बिल्डर
गांवों में बिल्डरों के नेटवर्क को फायदा पहुंचाने के लिए विकास कार्य को भी लोग अहमियत नहीं देते। कई गांवों में ऐसी इमारतें उन स्थानों पर बना दी गईं, जहां से नोएडा के विकास का रास्ता निकलता है। प्राधिकरणों को ऐसी इमारतों को गिराने या सील करने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ती है।
विकास कार्य तक को अहमियत नहीं देते बिल्डर
गांवों में बिल्डरों के नेटवर्क को फायदा पहुंचाने के लिए विकास कार्य को भी लोग अहमियत नहीं देते। कई गांवों में ऐसी इमारतें उन स्थानों पर बना दी गईं, जहां से नोएडा के विकास का रास्ता निकलता है। प्राधिकरणों को ऐसी इमारतों को गिराने या सील करने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ती है।