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No Smoking Day : धुएं के छल्ले कर रहे घाव को गहरा, गंभीर हो रहे शरीर में दाग; कम होता जाता है दवाओं का असर
Wed, 12 Mar 2025 05:51 AM IST
दुष्यंत शर्मा
राकेश शर्मा, नई दिल्ली
राकेश शर्मा, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Wed, 12 Mar 2025 05:51 AM IST
सार
शोध में पता चला कि मरीजों की बिगड़ी हुई टीबी (मल्टी ड्रग रेजिस्टेंट-एमडीआर) को धूम्रपान ने और गंभीर कर दिया है।
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विस्तार
धुएं के छल्ले शरीर में हुए रोग को गंभीर बना रहे हैं। इसका खुलासा राजन बाबू टीबी अस्पताल के मरीजों पर हुए एक शोध से हुआ है। इस शोध में पता चला कि मरीजों की बिगड़ी हुई टीबी (मल्टी ड्रग रेजिस्टेंट-एमडीआर) को धूम्रपान ने और गंभीर कर दिया है।
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विशेषज्ञों का कहना है कि धूम्रपान की लत लोगों में तेजी से बढ़ रही है। इसकी आदत ऐसी है कि मरीज गंभीर होने के बाद भी धूम्रपान को छोड़ना नहीं चाहते। धूम्रपान के कारण दवाओं का असर कम या न के बराबर होता है। धीरे-धीरे रोगी की समस्या बढ़ती जाती है। उसके फेफड़ों पर होने वाला दाग भी धीरे-धीरे गंभीर होने लगता है।
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यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंसेज (यूसीएमएस) व गुरु तेग बहादुर अस्पताल (जीटीबी) अस्पताल के रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अंकिता गुप्ता ने बताया कि राजन बाबू टीबी अस्पताल में एमडीआर के 97 मरीजों पर एक शोध किया। मरीजों को दो ग्रुप में बांटा गया।
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पहले ग्रुप में धूम्रपान करने वाले मरीजों को रखा गया। इसमें 41 मरीज थे। वहीं दूसरे ग्रुप में 56 मरीज थे। यह धूम्रपान नहीं करते थे। इन मरीजों को निगरानी में दवा दिया गया। लंबे समय के बाद इनकी बलगम की जांच हुई। इसमें जो लोग धूम्रपान नहीं करते थे उनके बलगम की जांच में टीबी के कीटाणु कम पाए गए। वहीं धूम्रपान करने वाले में समस्या गंभीर पाई गई।
नहीं देते सही जानकारी
धूम्रपान करने वाले मरीज इलाज के दौरान डॉक्टरों को सही जानकारी नहीं देते। जीटीबी अस्पताल में क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) के 55 मरीजों पर एक शोध किया गया। इन मरीजों से पूछा गया कि क्या दवा लेने के साथ वह धूम्रपान करते हैं। इनमें से 36 मरीजों ने धूम्रपान न करने की बात कही। इन मरीजों के पेशाब की जांच की गई। जांच में मरीजों के पेशाब में यूरिन कोटिनिन पाया गया जो सात दिनों से धूम्रपान के स्तर को बताता है।
एक तिहाई मरीज करते हैं धूम्रपान
जीटीबी अस्पताल के विभाग की ओपीडी में इलाज करवाने आ रहे एक तिहाई मरीज धूम्रपान कर रहे हैं। विभाग की ओपीडी में करीब 150 लोग आते हैं। इनमें से करीब 60 लोग धूम्रपान करते हैं।
बच्चे और महिलाएं भी आगे
आंकड़े बताते हैं कि 5 से 6 साल के बच्चों में भी धूम्रपान की आदत दिख रही है। वहीं महिलाएं भी धूम्रपान करने में पीछे नहीं है। पिछले पांच साल में महिलाओं में तेजी से धूम्रपान की आदत बढ़ी है।