खुलासाः देश के निजी स्कूलों में पढ़ने वाले पांचवीं के 60 फीसदी छात्र सामान्य प्रश्न का नहीं दे पाते जवाब

अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Updated Thu, 23 Jul 2020 10:57 AM IST
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सार

- सेंट्रल स्क्वायर फाउंडेशन की प्राइवेट स्कूल इन इंडिया रिपोर्ट में खुलासा, नीति आयोग के सीईओ ने ऑनलाइन की जारी

विस्तार

देश के 73 फीसदी अभिभावक या आम आदमी अपने बच्चों के बेहतर भविष्य और अच्छी शिक्षा दिलवाने के लिए निजी स्कूलों में पढ़ाई करवाता है। हालांकि देश के 60 फीसदी ग्रामीण व छोटे शहरों के निजी स्कूलों के पांचवीं कक्षा के छात्र सामान्य प्रश्न का हल भी नहीं निकाल पाते हैं। यहीं नहीं, 35  फीसदी पांचवीं कक्षा के छात्र दूसरी कक्षा का पैराग्राफ भी नहीं पढ़ पाते हैं। यह खुलासा सेंट्रल स्क्वायर फाउंडेशन की प्राइवेट स्कूल इन इंडिया की रिपोर्ट में हुआ है।
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नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत ने बुधवार को कोविड-19 के चलते  वर्जुअल इस रिपोर्ट को जारी किया। उन्होंने कहा कि गुणवत्त युक्त शिक्षा के लिए सरकार मॉडल रेग्यूलेटरी एक्ट का ड्रॉफ्ट तैयार कर रही है। इसके अलावा स्कूली शिक्षा केलिए लर्निंग आउटकम बनाए गए हैं। इन्हीं आउटकम के तहत स्कूलों को पढ़ाई करवानी है।
45 फीसदी छात्र निजी से सरकारी स्कूलों में शिफ्ट:
कोविड-19 के चलते करीब 45 फीसदी छात्र अब निजी स्कूलों को छोड़कर सरकारी स्कूलों में शिफ्ट होंगे। कम आय वाले परिवारों के यह  छात्र प्रति महीना 5 सौ रुपये स्कूल फीस देते थे। दरअसल कोरोना काल में अब ऑनलाइन क्लास की अत्यधिक फीस, स्मार्ट मोबाइल, लैपटॉप  और आय के साधन कम या न होने के चलते  निजी को छोड़कर सरकारी स्कूलों का रूख करेंगे। क्योंकि अब उनके पास ऑनलाइन क्लास के लिए फीस और गैजेट खरीदने को पैसे नहीं हैं।

50 फीसदी छात्र गुणवत्ता व लर्निंग आउटकम से दूर:
रिपोर्ट के मुताबिक, देशभर के आधे छात्र निजी स्कूलों में पढ़ रहे हैं। इस प्रकार 4.5 लाख निजी स्कूलों में 12 करोड़ छात्र पढ़ते हैं। बेहतर, गुणवत्ता युक्त शिक्षा के चलते ७३ फीसदी अभिभावक अपने बच्चों को निजी स्कूलों में दाखिला दिलवाते हैं। हालांकि 50 फीसदी से अधिक छात्र गुणवत्ता युक्त और लर्निग आउटकम (उम्र व कक्षा के हिसाब से सीखना) से दूर हैं।

महत्वपूर्ण बिंदू:
-70 फीसदी छात्र ऐसे स्कूलों में  पढ़ते हैं, जहां प्रति महीना 1 हजार रुपये फीस देनी होती है।
- 45 फीसदी छात्रों की प्रति महीना स्कूल फीस 500 सौ  रुपये से कम है।
-9 करोड़ छात्र गैर सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में पढ़ते हैं।
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