Cancer: एनआईसी बनेगा देश का सबसे बड़ा न्यूक्लीयर थेरेपी केंद्र, कैंसर का इलाज होगा आसान
देश में कैंसर के इलाज को बेहतर बनाने के लिए एम्स नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट (एनआईसी), झज्जर में देश का सबसे बड़ा न्यूक्लीयर मेडिसिन थेरेपी सेंटर बनाएगा। एनआईसी में रेडियोआइसोटोप न्यूक्लीयर मेडिसिन थेरेपी वार्ड बनकर तैयार है।
एटॉमिक एनर्जी रेगुलेटरी बोर्ड (एईआरबी) से एनओसी मिलने के बाद यह सुविधा शुरू हो जाएगी। यहां पर 20 बेड की सुविधा होगी। यह सेवा शुरू होने के बाद न्यूक्लीयर की मदद से रेडिएशन देकर कैंसर का इलाज किया जाएगा। यह सुविधा एम्स के मुख्य केंद्र में महज छह बेड के साथ उपलब्ध है। देश में अभी दो तिहाई मरीज अंतिम स्टेज में इलाज के लिए पहुंचते हैं। इन मरीजों को लंबे समय तक बचा पाना मुश्किल हो जाता है।
सोमवार को एनसीआई की पांचवीं वर्षगांठ पर सेंटर के प्रमुख प्रोफेसर डॉ. आलोक ठक्कर ने बताया कि अस्पताल में सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। इनमें क्लीयर मेडिसिन थेरेपी भी अहम होगी। वहीं, डॉ अभिनव सिंघल ने बताया कि वार्ड के शुरू होने के बाद थाइराइड, प्रोस्टेट, न्यूरोइंडोक्राइन, ब्लड और लंग्स कैंसर का इलाज आसान होगा।
एम्स ने किया समझौता
हेड एंड नेक कैंसर में सुधार के लिए एम्स ने लिवरपुल हेड एंड नेक सेंटर के साथ समझौता किया है। इस समझौते के बाद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में कैंसर इलाज को बेहतर बनाया जा रहा है। इस समझौते के तहत दोनों मिलकर अनुसंधान और शिक्षा कार्यक्रम को बेहतर करेंगे। साथ ही हेड एंड नेक कैंसर के रोगियों की देखभाल को बेहतर बनाया जाएगा। साथ ही अत्याधुनिक चिकित्सा नवाचार किया जाएगा।
जेनेटिक मैपिंग से पकड़ में आएगा कैंसर
जेनेटिक मैपिंग से कैंसर को समय से पहले पकड़ा जा सकेगा। इससे इलाज के लिए विधि व दवाएं भी विकसित की जाएंगी। एम्स के प्रोफेसर डॉ. आलोक ठक्कर का कहना है कि कैंसर शरीर के किस हिस्से मेंं होगा। उसके लिए कौन सा सेल जिम्मेदार है और उस सेल के पीछे कौन सा जींस काम कर रहा है। इसे जेनेटिक मैपिंग से पकड़ा जा सकेगा। इसे लेकर एम्स सहित पूरी दुनिया में काम हो रहा है। उन्होंने कहा कि हम उम्मीद कर रहे हैं कि आने वाले दस सालों में इस दिशा में सकारात्मक परिणाम मिलेंगे। ऐसा होने पर कैंसर होने से पहले कारण को पकड़ा जा सकेगा। मैंपिंग के दौरान कॉमन कारण को पकड़कर जांच, इलाज और दवाएं विकसित करने की दिशा में काम होगा।
जल्द शुरू होगी बोन मेरो की सुविधा
एनआईसी में जल्द कैंसर मरीजों के लिए बोन मेरो, जीनोम सीक्वेंसिंग, रोबोटिक सर्जरी की सुविधा शुरू होगी। इस के अलावा रेडिएशन सुविधाओं का भी विस्तार होगा। अभी एक मशीन से यह सुविधा दी जा रही है। जल्द ही दूसरी मशीन की भी स्थापना एनआईसी में दी जाएगी।
एनआईसी में ही तैयार होगी स्वदेशी वैक्सीन
कैंसर से बचाव के लिए एम्स के एनआईसी केंद्र में ही वैक्सीन व दवाएं विकसित होंगी। यहां पर आधुनिक लैब तैयार हो रही है। जो भारतीय मरीजों पर शोध करके जरूरत के आधार पर वैक्सीन, दवाएं व अन्य का विकास करेगी। अभी विदेश से आने वाली वैक्सीन व दवाएं पश्चिमी देशों के आधार पर तैयार की जाती हैं। जो भारतीय शरीर के अनुकूल नहीं है। ऐसे में आने वाले दिनों में भारतीय लोगों के अनुकूल सुविधाएं विकसित की जाएगी। जो काफी सस्ती होने के साथ प्रभावी होंगी।
स्टाफ की भारी कमी
झज्जर में चल रहे एनआईसी में स्टाफ की भारी कमी है। मौजूदा समय में यह संस्थान आधी क्षमता के साथ काम कर रहा है। यह संस्थान 750 बेड का है। यहां अभी 350 से 390 बेड पर मरीज को सुविधा दी जा रही है।
विदेश से आ रहे मरीज
एनआईसी में हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, दिल्ली, बिहार, उत्तर प्रदेश सहित देश के अन्य राज्यों के अलावा नेपाल, बांग्लादेश सहित दुनिया के अन्य देशों से भी मरीज इलाज करवाने आ रहे हैं।
एनसीआई झज्जर में सुविधाएं
एनसीआर का सबसे बड़ा केंद्र - चार करोड़ लोगों को होगा फायदा
रोजाना ओपीडी में मरीज - 500 से अधिक
नए मरीज पंजीकृत - 60 कैंसर रोगी
लीनियर एक्सेलेरेटर से विकिरण - 800-1000 प्रति सप्ताह
डेकेयर में कीमोथेरेपी - 800-1000 प्रति सप्ताह
दो साल में पैट स्केन - सात हजार से अधिक
प्रति सप्ताह ऑपरेशन - 80-100 बड़े ऑपरेशन, एंडोस्कोपी
विश्राम सदन की सुविधा - 800 बिस्तर