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बालू खनन पर हरियाणा-यूपी सरकार को एनजीटी की फटकार

Thu, 04 Feb 2016 02:02 AM IST
Updated Thu, 04 Feb 2016 02:02 AM IST
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NGT strict on Haryana-UP government in sand mining

नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल (एनजीटी) ने पाबंदी के बावजूद उत्तर प्रदेश और हरियाणा सरकार को अवैध तरीके से यमुना में किए जा रहे बालू खनन को लेकर कड़ी फटकार लगाई है।

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ग्रीन बेंच ने गौतमबुद्ध नगर से फरीदाबाद के बीच अवैध ब्रिज बनाकर किए जा रहे बालू खनन के मामले में दोनों ही राज्यों के शीर्ष अधिकारियों को तलब किया है।

ग्रीन बेंच ने कहा कि दोनों ही राज्यों के सिंचाई विभाग के प्रमुख और भू-सर्वेक्षण व खनन विभाग के सदस्य, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सचिव सदस्य अगली सुनवाई 5 फरवरी को ट्रिब्युनल के समक्ष पेश होकर खनन की वास्तविक स्थिति बताएंगे।

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जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली बेंच ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल बार एसोसिएशन की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई के दौरान यह निर्देश दिया।

मंत्रालय से पूछे ये सवाल

NGT strict on Haryana-UP government in sand mining

ग्रीन बेंच ने पर्यावरण मंत्रालय से पूछा है कि वह बताए कि अवैध बालू खनन की मात्रा कितनी है। इससे नदी के पारिस्थितिकी पर पर्यावरण पर कितना प्रभाव पड़ा है। अवैध खनन के लिए बनाया गया ब्रिज स्थायी या फिर अस्थायी प्रकृति का है।

यह किसकी अनुमति के जरिये बनाया गया? क्या खनन में किसी तरह की मशीनरी या जेसीबी प्रयुक्त थी? क्या दोनों राज्यों के संबंधी प्राधिकरणों के जरिये किसी तरह की मशीनरी जब्त की गई? इस खनन में कौन सी पार्टी शामिल है?

एनजीटी ने खनन में आरोपी ठेकेदार डी क्रिश बिल्डर्स प्राइवेट लिमिटेड, एनसीआर रीयल टेक प्राइवेट लिमिटेड, अजय पाल सिंह और नवीन पाल सिंह को कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा है कि इन पर कार्रवाई क्यों न की जाए।

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