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यमुना का कायाकल्प: एनजीटी का आदेश, अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करें सरकार
Mon, 22 Jul 2019 05:50 AM IST
दुष्यंत शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Mon, 22 Jul 2019 05:50 AM IST
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NGT
राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) ने दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश की सरकारों को यमुना नदी को प्रदूषण मुक्त करने और उसके कायाकल्प को लेकर उठाए गए कदमों पर अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। साथ ही रिपोर्ट दाखिल करने में नाकाम रहने पर राज्य सरकारों पर जुर्माना लगाने की भी चेतावनी दी है।
जस्टिस आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ ने तीनों राज्य सरकारों से स्पष्ट हलफनामा देने को कहा है जिसमें अब तक उठाए गए कदमों की जानकारी, उनके अमल में देरी का कारण, जरूरी कदम उठाए जाने और उनके पालन की संभावित तिथि बताने को कहा गया है।
पीठ ने कहा कि हलफनामे में यमुना मैली से निर्मल यमुना कायाकल्प योजना 2017 के सभी घटक कवर होने चाहिए। इस योजना को एनजीटी ने मंजूरी दी थी। पीठ ने कहा कि हालात गंभीर हैं और संबंधित प्राधिकरण प्रदूषण संबंधी गतिविधियों पर नियंत्रण के लिए पॉल्यूटर पे सिद्धांत को लागू करने में नाकाम रहे हैं।
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इससे पहले 12 जुलाई को पीठ ने पाया था कि कोई भी राज्य निर्देशों के पालन को तैयार नहीं है। संबंधित विभागों के प्रमुखों समेत प्राधिकरणों को जवाबदेह ठहराने की चेतावनी देते हुए एनजीटी ने हरियाणा, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, डीडीए, डीजीबी, डीपीसीसी और संबंधित नगर निगमों को अपना जवाब तैयार करने के लिए दो हफ्ते की मोहलत दी थी।
यमुना नदी की सफाई की स्थिति पर नाराजगी जताते हुए एनजीटी ने डीडीए को कार्य निष्पादन गारंटी के तौर पर 50 लाख रुपये जमा करने का आदेश दिया था।
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जस्टिस आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ ने तीनों राज्य सरकारों से स्पष्ट हलफनामा देने को कहा है जिसमें अब तक उठाए गए कदमों की जानकारी, उनके अमल में देरी का कारण, जरूरी कदम उठाए जाने और उनके पालन की संभावित तिथि बताने को कहा गया है।
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पीठ ने कहा कि हलफनामे में यमुना मैली से निर्मल यमुना कायाकल्प योजना 2017 के सभी घटक कवर होने चाहिए। इस योजना को एनजीटी ने मंजूरी दी थी। पीठ ने कहा कि हालात गंभीर हैं और संबंधित प्राधिकरण प्रदूषण संबंधी गतिविधियों पर नियंत्रण के लिए पॉल्यूटर पे सिद्धांत को लागू करने में नाकाम रहे हैं।
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इससे पहले 12 जुलाई को पीठ ने पाया था कि कोई भी राज्य निर्देशों के पालन को तैयार नहीं है। संबंधित विभागों के प्रमुखों समेत प्राधिकरणों को जवाबदेह ठहराने की चेतावनी देते हुए एनजीटी ने हरियाणा, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, डीडीए, डीजीबी, डीपीसीसी और संबंधित नगर निगमों को अपना जवाब तैयार करने के लिए दो हफ्ते की मोहलत दी थी।
यमुना नदी की सफाई की स्थिति पर नाराजगी जताते हुए एनजीटी ने डीडीए को कार्य निष्पादन गारंटी के तौर पर 50 लाख रुपये जमा करने का आदेश दिया था।