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दिल्ली सरकार पर एनजीटी की कार्रवाई: ठोस-तरल कचरे के अनुचित निपटान के लिए लगाया 2232 करोड़ रुपये का जुर्माना

Fri, 17 Feb 2023 10:20 PM IST
आकाश दुबे पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: आकाश दुबे Updated Fri, 17 Feb 2023 10:20 PM IST
सार

एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति एके गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी में ठोस और तरल अपशिष्ट कचरे के निपटान में कमी मिली है। वहीं राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने दिल्ली के उपराज्यपाल की अध्यक्षता में ठोस अपशिष्ट निगरानी समिति का गठन किया है।

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NGT imposes fine of Rs 2232 crore on Delhi government for improper disposal of solid liquid waste
गाजीपुर लैंडफिल साइट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने दिल्ली सरकार को ठोस और तरल कचरे के अनुचित प्रबंधन के लिए पर्यावरणीय मुआवजे के रूप में 2,232 करोड़ रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया है।

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एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति एके गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी में ठोस और तरल अपशिष्ट कचरे के निपटान में कमी मिली है। पीठ ने कहा 'अन्य राज्यों पर लगे जुर्माने की तरह (दो करोड़ रुपये प्रति मिलियन लीटर प्रति दिन (एमएलडी) अनुपचारित सीवेज और 300 रुपये प्रति टन अनुपचारित लीगेसी अपशिष्ट की दर से) दिल्ली सरकार को 3,132 करोड़ रुपये का जुर्माना देना होगा'। 

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जिसमें ठोस कचरे के लिए 990 करोड़ रुपये और तरल कचरे के लिए 2,142 करोड़ रुपये जुर्माना लगाया है। पीठ ने कहा है कि ठोस कचरे के लिए पहले से ही लगाए गए जुर्माने की राशि (900 करोड़ रुपये) को घटाकर शेष 2,232 करोड़ रुपये की राशि का भुगतान दिल्ली सरकार को करना होगा।

एनजीटी ने एलजी की अध्यक्षता में गठित की ठोस अपशिष्ट निगरानी समिति
वहीं राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने दिल्ली के उपराज्यपाल की अध्यक्षता में ठोस अपशिष्ट निगरानी समिति का गठन किया है। एलजी की देखरेख में भलस्वा, गाजीपुर और ओखला से करीब 30 लाख मीट्रिक टन ठोस कचरे का निपटान किया गया। इसे देखते हुए एनजीटी ने कचरे के तीनों पहाड़ियों को समतल करने की समिति को जिम्मेवारी सौंपी है। इससे पहले यमुना की सफाई के लिए एलजी की अध्यक्षता में प्राधिकरण ने एक समिति गठित की है।

तीनों साइट से हर महीने 6.5 लाख मीट्रिक टन ठोस कचरे का हो रहा निपटान
पदभार संभालने के बाद से एलजी विनय कुमार सक्सेना ने तीनों लैंडफिल साइट पर इकट्ठा कचरे का निपटान करने की दिशा में पहल की। तीनों साइट से हर महीने करीब 6.5 लाख मीट्रिक टन ठोस कचरे का निपटान किया जाता है। 2019 से जून, 2022 के दौरान हर महीने 1.4 लाख मीट्रिक टन पुराने कचरे (लीगेसी वेस्ट) का निपटान किया जा रहा है। अब तक 51 लाख मीट्रिक टन ठोस कचरे का निपटान किया गया है।

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आदेशों के अनुपालन के लिए किए गए प्रयासों पर जताया असंतोष
एनजीटी ने 16 फरवरी को जारी आदेश में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2016 व अन्य पर्यावरण मुद्दे और सुप्रीम कोर्ट के 2014 और 2017 की तरफ से इस संदर्भ में जारी आदेशों के अनुपालन के लिए किए गए प्रयासों पर गहरा असंतोष जताया है। पिछले 18 वर्षों में सुप्रीम कोर्ट और नौ वर्षों से प्राधिकरण के प्रयासों के बावजूद दिल्ली में कचरे के तीन पहाड़ों की समस्या को नहीं सुलझाया गया। एनजीटी ने नई समिति की तरफ से जवाबदेही तय करने और यमुना निगरानी समिति की तर्ज पर निगरानी के लिए दिल्ली सरकार, दिल्ली नगर निगम, दिल्ली विकास प्राधिकरण सहित दूसरी एजेंसियों को शामिल किया है। 

ठोस कचरे की बढ़ती समस्या को देखते हुए गठित की समिति
ठोस कचरे की बढ़ती समस्या को देखते हुए इसके निपटारा के लिए एनजीटी ने उपराज्यपाल के नेतृत्व में ठोस अपशिष्ट निगरानी समिति का गठन का फैसला लिया है। दिल्ली के एलजी के नेतृत्व में गठित समिति में संयोजक के तौर पर दिल्ली के मुख्य सचिव होंगे जबकि शहरी विकास, वन एवं पर्यावरण, कृषि, और वित्त सचिव सहित डीडीए के उपाध्यक्ष, डीडीए सहित सचिव सहित दूसरे अधिकारी सहित नामित सदस्यों के अलावा केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष, दिल्ली नगर निगम के आयुक्त, न्यायिक जिला मजिस्ट्रेट और डीसीपी भी शामिल होंगे। समिति को ठोस अपशिष्ट के आंकड़ों का संकलन करने और तिमाही आधार पर ग्राफ तैयार करने का भी निर्देश दिया गया है।

जनहित में कॉरपोरेट्स से बातचीत में सक्षम है समिति
एनजीटी ने अपने आदेश में कहा है कि समिति को ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए प्रसंस्करण, मौजूदा अपशिष्ट प्रसंस्करण सुविधाओं के विस्तार सहित पुराने अपशिष्ट स्थलों में बदलाव करने के अलावा संबंधित विभागों के साथ समन्वय का अधिकार होगा। सप्ताहिक बैठक या मौके का जायजा लेने के लिए भी समिति को सक्षम बताया गया है। एनजीटी के निर्देशों के पालन, उल्लंघन, प्रस्तावित उपचारात्मक कार्रवाई, कानूनी अनुपालन फंडिंग, पर्यावरण मुआवजे का उपयोग, पिछली विफलताओं के लिए जवाबदेही तय करने सहित परियोजनाओं के लिए सुप्रीम कोर्ट और एनजीटी के आदेशों के निष्पादन में समय-सीमा सहित दूसरे पहलुओं को देखने का समिति को अधिकार होगा। समिति को वित्त पोषण, अलग समर्पित खाता खोलने पर विचार करने या विशेषज्ञों को शामिल करने, वेबसाइट बनाने सहित दूसरे अधिकार भी दिए गए हैं। समिति जनहित में कॉरपोरेटस के साथ बातचीतकके लिए भी पूर्ण रूप से स्वतंत्र होगी।

जनहित में कॉरपोरेट्स से बातचीत में सक्षम है समिति
एनजीटी ने अपने आदेश में कहा है कि समिति को ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए प्रसंस्करण, मौजूदा अपशिष्ट प्रसंस्करण सुविधाओं के विस्तार सहित पुराने अपशिष्ट स्थलों में बदलाव करने के अलावा संबंधित विभागों के साथ समन्वय का अधिकार होगा। सप्ताहिक बैठक या मौके का जायजा लेने के लिए भी समिति को सक्षम बताया गया है। एनजीटी के निर्देशों के पालन, उल्लंघन, प्रस्तावित उपचारात्मक कार्रवाई, कानूनी अनुपालन फंडिंग, पर्यावरण मुआवजे का उपयोग, पिछली विफलताओं के लिए जवाबदेही तय करने सहित परियोजनाओं के लिए सुप्रीम कोर्ट और एनजीटी के आदेशों के निष्पादन में समय-सीमा सहित दूसरे पहलुओं को देखने का समिति को अधिकार होगा। समिति को वित्त पोषण, अलग समर्पित खाता खोलने पर विचार करने या विशेषज्ञों को शामिल करने, वेबसाइट बनाने सहित दूसरे अधिकार भी दिए गए हैं। समिति जनहित में कॉरपोरेटस के साथ बातचीतकके लिए भी पूर्ण रूप से स्वतंत्र होगी।

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