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Delhi NCR News: जन विश्वास कानून के तहत एमसीडी में नई व्यवस्था लागू, कारोबारियों और नागरिकों को मिलेगी राहत
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छोटे उल्लंघनों पर अब प्रशासनिक स्तर पर होगा निपटारा, एडजुडिकेटिंग ऑफिसर और अपीलीय प्राधिकरण नियुक्त
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। एमसीडी ने जन विश्वास (प्रावधान संशोधन) अधिनियम, 2026 के तहत नई प्रशासनिक व्यवस्था लागू की है। इसके तहत अब छोटे तकनीकी और प्रक्रियात्मक उल्लंघनों के मामलों में लंबी कानूनी प्रक्रिया के बजाय प्रशासनिक स्तर पर सुनवाई कर आर्थिक दंड लगाया जा सकेगा। एमसीडी ने विभिन्न विभागों और सभी जोनों में एडजुडिकेटिंग ऑफिसर और अपीलीय प्राधिकरण नियुक्त किए हैं, वह मामलों का समयबद्ध निपटारा करेंगे।
एमसीडी के अनुसार, यह व्यवस्था दिल्ली नगर निगम अधिनियम, 1957 के तहत लागू की गई है। इसका उद्देश्य छोटे-मोटे नियम उल्लंघनों को अपराध की श्रेणी से बाहर कर ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और ईज ऑफ लिविंग को बढ़ावा देना है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद व्यापारियों, दुकानदारों और आम नागरिकों को अदालतों और थानों के चक्कर लगाने से राहत मिलने की उम्मीद है। दरअसल, केंद्र सरकार ने लागू किए जन विश्वास कानून का मकसद विभिन्न कानूनों में मौजूद ऐसे प्रावधानों को कम करना है, जिनमें मामूली तकनीकी गलती पर भी आपराधिक कार्रवाई का प्रावधान था। इसी के तहत एमसीडी ने अपने अधिनियम के 122 प्रावधानों को डिक्रिमिनलाइज किया है। इनमें 56 मामलों में जुर्माना और जेल की सजा को हटाकर केवल आर्थिक दंड या चेतावनी का प्रावधान किया गया है। वहीं 28 मामलों में जुर्माना और कारावास पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है, जबकि 38 प्रावधानों को निरस्त किया गया है।
नई व्यवस्था के तहत यदि किसी व्यक्ति या कारोबारी छोटे स्तर का उल्लंघन करते है तो फील्ड अधिकारी मौके पर निरीक्षण कर स्पॉट पेनल्टी लगा सकेंगे। यदि संबंधित व्यक्ति वहीं जुर्माना भर देता है तो उसे तत्काल रसीद जारी कर दी जाएगी और मामला समाप्त माना जाएगा। लेकिन यदि कोई व्यक्ति स्पॉट पेनल्टी देने से इनकार करता है तो उसे एडजुडिकेटिंग ऑफिसर के समक्ष पेश होने का नोटिस दिया जाएगा।
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एमसीडी की ओर से जारी आदेश के अनुसार विज्ञापन, फैक्ट्री लाइसेंसिंग, सीएल एंड ईसी, वेटरनरी और बिल्डिंग विभाग समेत कई प्रमुख शाखाओं में अधिकारियों को एडजुडिकेटिंग ऑफिसर नियुक्त किया गया है। इसके अलावा सभी 12 जोनों में जोनल असिस्टेंट कमिश्नरों को भी यह जिम्मेदारी दी गई है। संबंधित विभागों के डिप्टी कमिश्नर अपीलीय प्राधिकरण की भूमिका निभाएंगे। एडजुडिकेटिंग ऑफिसर को मामले की सुनवाई करने, गवाह बुलाने और आर्थिक दंड निर्धारित करने का अधिकार होगा। यदि कोई व्यक्ति आदेश से संतुष्ट नहीं होता है तो वह 30 दिनों के भीतर अपीलीय प्राधिकरण के समक्ष अपील कर सकेगा। अपीलीय प्राधिकरण को 60 दिनों के भीतर मामले का निपटारा करना अनिवार्य होगा। एमसीडी के मुताबिक, अब तक लाइसेंस नवीनीकरण में देरी, दस्तावेजों की छोटी कमी या अन्य तकनीकी त्रुटियों के कारण लोगों को लंबी कानूनी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था। कई बार मामूली उल्लंघनों पर भी मुकदमे दर्ज हो जाते थे, जिससे कारोबारी गतिविधियां प्रभावित होती थीं। नई प्रणाली लागू होने के बाद ऐसे मामलों का निपटारा प्रशासनिक स्तर पर ही तेजी से किया जा सकेगा।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। एमसीडी ने जन विश्वास (प्रावधान संशोधन) अधिनियम, 2026 के तहत नई प्रशासनिक व्यवस्था लागू की है। इसके तहत अब छोटे तकनीकी और प्रक्रियात्मक उल्लंघनों के मामलों में लंबी कानूनी प्रक्रिया के बजाय प्रशासनिक स्तर पर सुनवाई कर आर्थिक दंड लगाया जा सकेगा। एमसीडी ने विभिन्न विभागों और सभी जोनों में एडजुडिकेटिंग ऑफिसर और अपीलीय प्राधिकरण नियुक्त किए हैं, वह मामलों का समयबद्ध निपटारा करेंगे।
एमसीडी के अनुसार, यह व्यवस्था दिल्ली नगर निगम अधिनियम, 1957 के तहत लागू की गई है। इसका उद्देश्य छोटे-मोटे नियम उल्लंघनों को अपराध की श्रेणी से बाहर कर ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और ईज ऑफ लिविंग को बढ़ावा देना है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद व्यापारियों, दुकानदारों और आम नागरिकों को अदालतों और थानों के चक्कर लगाने से राहत मिलने की उम्मीद है। दरअसल, केंद्र सरकार ने लागू किए जन विश्वास कानून का मकसद विभिन्न कानूनों में मौजूद ऐसे प्रावधानों को कम करना है, जिनमें मामूली तकनीकी गलती पर भी आपराधिक कार्रवाई का प्रावधान था। इसी के तहत एमसीडी ने अपने अधिनियम के 122 प्रावधानों को डिक्रिमिनलाइज किया है। इनमें 56 मामलों में जुर्माना और जेल की सजा को हटाकर केवल आर्थिक दंड या चेतावनी का प्रावधान किया गया है। वहीं 28 मामलों में जुर्माना और कारावास पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है, जबकि 38 प्रावधानों को निरस्त किया गया है।
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नई व्यवस्था के तहत यदि किसी व्यक्ति या कारोबारी छोटे स्तर का उल्लंघन करते है तो फील्ड अधिकारी मौके पर निरीक्षण कर स्पॉट पेनल्टी लगा सकेंगे। यदि संबंधित व्यक्ति वहीं जुर्माना भर देता है तो उसे तत्काल रसीद जारी कर दी जाएगी और मामला समाप्त माना जाएगा। लेकिन यदि कोई व्यक्ति स्पॉट पेनल्टी देने से इनकार करता है तो उसे एडजुडिकेटिंग ऑफिसर के समक्ष पेश होने का नोटिस दिया जाएगा।
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एमसीडी की ओर से जारी आदेश के अनुसार विज्ञापन, फैक्ट्री लाइसेंसिंग, सीएल एंड ईसी, वेटरनरी और बिल्डिंग विभाग समेत कई प्रमुख शाखाओं में अधिकारियों को एडजुडिकेटिंग ऑफिसर नियुक्त किया गया है। इसके अलावा सभी 12 जोनों में जोनल असिस्टेंट कमिश्नरों को भी यह जिम्मेदारी दी गई है। संबंधित विभागों के डिप्टी कमिश्नर अपीलीय प्राधिकरण की भूमिका निभाएंगे। एडजुडिकेटिंग ऑफिसर को मामले की सुनवाई करने, गवाह बुलाने और आर्थिक दंड निर्धारित करने का अधिकार होगा। यदि कोई व्यक्ति आदेश से संतुष्ट नहीं होता है तो वह 30 दिनों के भीतर अपीलीय प्राधिकरण के समक्ष अपील कर सकेगा। अपीलीय प्राधिकरण को 60 दिनों के भीतर मामले का निपटारा करना अनिवार्य होगा। एमसीडी के मुताबिक, अब तक लाइसेंस नवीनीकरण में देरी, दस्तावेजों की छोटी कमी या अन्य तकनीकी त्रुटियों के कारण लोगों को लंबी कानूनी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था। कई बार मामूली उल्लंघनों पर भी मुकदमे दर्ज हो जाते थे, जिससे कारोबारी गतिविधियां प्रभावित होती थीं। नई प्रणाली लागू होने के बाद ऐसे मामलों का निपटारा प्रशासनिक स्तर पर ही तेजी से किया जा सकेगा।