{"_id":"69e10765b3f9b808a2057713","slug":"nav-raga-prabha-utsav-an-emotional-confluence-of-guru-remembrance-and-musical-practice-delhi-ncr-news-c-340-1-del1011-132629-2026-04-16","type":"story","status":"publish","title_hn":"Delhi NCR News: नव राग प्रभा उत्सव में गुरु स्मरण और सुरों की साधना का भावपूर्ण संगम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Delhi NCR News: नव राग प्रभा उत्सव में गुरु स्मरण और सुरों की साधना का भावपूर्ण संगम
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। डॉ. प्रभा अत्रे फाउंडेशन की तरफ से बृहस्पतिवार को इंडिया हैबिटेट सेंटर के अमलतास थिएटर में आयोजित दो दिवसीय नव राग प्रभा उत्सव गुरु-शिष्य परंपरा और संगीत साधना का एक भावपूर्ण उत्सव बनकर सामने आया। आयोजन प्रसिद्ध शास्त्रीय गायिका डॉ. प्रभा अत्रे को उनके शिष्यों की तरफ से श्रद्धांजलि के रूप में आयोजित किया। इस संगीतमय संध्या की शुरुआत डॉ. प्रभा अत्रे की संगीत यात्रा पर आधारित स्वागत नोट और वृत्तचित्र के साथ हुई, जिसने उपस्थित श्रोताओं को उनकी समृद्ध विरासत और साधना से रूबरू कराया। वहीं, प्रस्तुतियों की श्रृंखला में सबसे पहले डॉ. अतींद्र सरवदिकर ने ख्याल गायन से शाम का आगाज किया। उन्होंने विलंबित एकताल में साज भाई डुबकी जले, असी लगन तुम्हीं सो लागी, और द्रुत तीनताल में, करम करो मोरे साईं जैसी रचनाओं को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का समापन डॉ. चेतना पाठक की प्रस्तुति के साथ हुआ, जिन्होंने विलंबित और द्रुत तीनताल में ख्याल गायन प्रस्तुत कर संध्या को एक संतुलित और गरिमामय पूर्णता प्रदान की।
विज्ञापन
नई दिल्ली। डॉ. प्रभा अत्रे फाउंडेशन की तरफ से बृहस्पतिवार को इंडिया हैबिटेट सेंटर के अमलतास थिएटर में आयोजित दो दिवसीय नव राग प्रभा उत्सव गुरु-शिष्य परंपरा और संगीत साधना का एक भावपूर्ण उत्सव बनकर सामने आया। आयोजन प्रसिद्ध शास्त्रीय गायिका डॉ. प्रभा अत्रे को उनके शिष्यों की तरफ से श्रद्धांजलि के रूप में आयोजित किया। इस संगीतमय संध्या की शुरुआत डॉ. प्रभा अत्रे की संगीत यात्रा पर आधारित स्वागत नोट और वृत्तचित्र के साथ हुई, जिसने उपस्थित श्रोताओं को उनकी समृद्ध विरासत और साधना से रूबरू कराया। वहीं, प्रस्तुतियों की श्रृंखला में सबसे पहले डॉ. अतींद्र सरवदिकर ने ख्याल गायन से शाम का आगाज किया। उन्होंने विलंबित एकताल में साज भाई डुबकी जले, असी लगन तुम्हीं सो लागी, और द्रुत तीनताल में, करम करो मोरे साईं जैसी रचनाओं को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का समापन डॉ. चेतना पाठक की प्रस्तुति के साथ हुआ, जिन्होंने विलंबित और द्रुत तीनताल में ख्याल गायन प्रस्तुत कर संध्या को एक संतुलित और गरिमामय पूर्णता प्रदान की।