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रंग में न पड़ जाए भंग-जरूर खेलें रंग, पर कर लें ये तैयारी

Thu, 01 Mar 2018 03:49 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदाबाद
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदाबाद Updated Thu, 01 Mar 2018 03:49 PM IST
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must follow these things and play safe holi
होली पर बड़ों को चाहिए कि वह अपने बच्चों पर ध्यान रखें। विशेषकर उन बच्चों पर जोकि छत से किसी को गुब्बारा मार रहे हैं या नीचे आने-जाने वालों पर रंग डाल रहे हैं। कहीं ऐसा न हो कि रंगों के इस त्योहार में भंग पड़ जाए। 
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दिल्ली-एनसीआर से हर साल ऐसे हादसे सामने आते हैं, जब छत से गुब्बारा फेंकने के दौरान बच्चों के साथ हादसा हो जाता है। तीन साल पहले दिल्ली के रानीबाग इलाके में छत की रेलिंग पर चढ़कर नीचे आने-जाने वालों को गुब्बारा मारता बच्चा देखते ही देखते नीचे आ गिरा था।
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क्षेत्रीय सांसद एवं केंद्रीय उद्योग मंत्री विपुल गोयल ने भी लोगों से अपील की है कि होली के इस त्योहार को हर्षोल्लास से मनाएं, मगर हुड़दंग न मचाएं। बड़ों को चाहिए कि वह बच्चों को अपनी निगरानी में रखकर ही होली खिलाएं। रंगों के फुहार में खूब भीगें, गुलाल और अबीर से सतरंगी हो जाए। हर तरफ मुस्कुराहट बांटे, मगर होली में खुशियों के रंग बांटने में अपना और अपनों का ख्याल रखना कतई ना भूलें।
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रंग खेलने से पहले ये करें तैयारी

must follow these things and play safe holi
- रंग खेलने से पहले शरीर पर नारियल का तेल या वैसलीन लगाएं।
- बालों को रंग से बचाने के लिए टोपी पहनें या सिर पर कपड़ा बांधें।
- कपड़े ऐसे पहने, जिससे शरीर पूरी तरह ढक जाए।

ऐसे छुड़ाए रंगों को: ब्यूटी एक्पसर्ट की सलाह
- कच्चे दूध और ब्रेड को भिगोकर रंग साफ करें
- रंग लगते ही फौरन पानी से धोएं।
- सॉफ्ट साबुन का ही इस्तेमाल करे।
- त्वचा को रगड़े नहीं। 
- रंग नहीं जाए तो दो से तीन बार नहाए।

डाक्टर की सलाह:
- आंखों में रंग या गुलाल चला जाए तो फौरन आंखों को धोए
- आंखों को रगड़े या मसलें नहीं, फौरन डाक्टर को दिखाएं
- अस्थमा रोगी और सांस के रोगी सूखे रंगों से बचे
- जिन्हें एलर्जी है, वे रंगों से दूर रहे।

 

क्या कहतें हैं डॉक्टर

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बाजार की खाने की वस्तुओं से परहेज करें। मिलावटी खाद्य पदार्थों से म्युकस मेमबरेंस (मुंह, पेट, आंत आदि) पर असर पड़ता है। छाले पड़ने के साथ ही घाव का रूप ले सकते हैं। बच्चों को कालरा और टाइफायड जैसी बीमारी मिलावटी खाने से हो सकती है। ऐसे में घर के बने पकवान ही खाएं। - डा. सुखबीर सिंह, पीएमओ, बीके सिविल अस्पताल

लाल रंग में मरकरी सल्फेट, बैंगनी में क्रोमियम, हरे में ब्रोमाइड व कापर सल्फेट और काले रंग में लेड ऑक्साइड होता है। इन केमिकल से एलर्जी हो सकती है। नेचुरल और आर्गेनिक रंगों से खेलें। आंख, कान और नाक में रंगों को जाने से बचाएं। - डा. आशीष अमर, आई स्पेशलिस्ट क्यूआरजी अस्पताल

रंगों में मिले भारी तत्व त्वचा को नुकसान पहुंचा सकते हैं। रंगों से बचाने के लिए होली खेलने से पहले त्वचा पर तेल या पेट्रोलियम जेली का प्रयोग करें। परेशानी होने पर फौरन डॉक्टर को दिखाएं, जिससे समय रहते इलाज मिल सके। - डा. रूचिका मिगलानी
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