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Delhi NCR News: पेंशन बढ़ाने की मांग को सांसदों ने दिया समर्थन
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-प्रदर्शन के दौरान कई राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी पेंशनरों का समर्थन किया
-आप के राज्यसभा सांसद संजय सिंह, गुजरात के भावनगर से कांग्रेस सांसद शक्ति सिंह गोहिल ने की शिरकत
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली।
ईपीएस-95 पेंशन बढ़ाने की मांग को लेकर पेंशनरों का आंदोलन मंगलवार को दूसरे दिन भी जंतर-मंतर पर जारी रहा। ईपीएस-95 राष्ट्रीय संघर्ष समिति के बैनर तले देश के कई राज्यों से आए हजारों पेंशनरों ने सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए न्यूनतम पेंशन बढ़ाने की मांग उठाई। प्रदर्शन में दिल्ली, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान, हरियाणा, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, तेलंगाना, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़ और गोवा समेत कई राज्यों के पेंशनर शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वर्षों तक नौकरी करने और हर महीने पेंशन के लिए अंशदान देने के बावजूद उन्हें बहुत कम पेंशन मिल रही है।
प्रर्दशनकारियों का आरोप है कि उन्होंने 30 से 35 साल तक अपनी नौकरी के दौरान नियमित रूप से पेंशन के लिए योगदान दिया, लेकिन इसके बाद भी उन्हें औसतन केवल 1171 रुपये मासिक पेंशन मिल रही है। उनका कहना है कि इतनी कम पेंशन में आज के समय में गुजारा करना बेहद मुश्किल है।
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-आप के राज्यसभा सांसद संजय सिंह, गुजरात के भावनगर से कांग्रेस सांसद शक्ति सिंह गोहिल ने की शिरकत
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली।
ईपीएस-95 पेंशन बढ़ाने की मांग को लेकर पेंशनरों का आंदोलन मंगलवार को दूसरे दिन भी जंतर-मंतर पर जारी रहा। ईपीएस-95 राष्ट्रीय संघर्ष समिति के बैनर तले देश के कई राज्यों से आए हजारों पेंशनरों ने सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए न्यूनतम पेंशन बढ़ाने की मांग उठाई। प्रदर्शन में दिल्ली, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान, हरियाणा, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, तेलंगाना, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़ और गोवा समेत कई राज्यों के पेंशनर शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वर्षों तक नौकरी करने और हर महीने पेंशन के लिए अंशदान देने के बावजूद उन्हें बहुत कम पेंशन मिल रही है।
प्रर्दशनकारियों का आरोप है कि उन्होंने 30 से 35 साल तक अपनी नौकरी के दौरान नियमित रूप से पेंशन के लिए योगदान दिया, लेकिन इसके बाद भी उन्हें औसतन केवल 1171 रुपये मासिक पेंशन मिल रही है। उनका कहना है कि इतनी कम पेंशन में आज के समय में गुजारा करना बेहद मुश्किल है।
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