बेटे की मौत के बाद मां ने उठाया 'ऐतिहासिक कदम'
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यूपी के गोंडा निवासी बबलू इस दुनिया से जाते-जाते कइयों को नई जिंदगी का तोहफा दे गए। बबलू तो अब इस दुनिया में नहीं है, लेकिन उनका दिल अब किसी और के शरीर में धड़कता रहेगा।
ब्रेन डेड घोषित होने के बाद बबलू के अंगों से सोमवार को ही चार लोगों को नई जिंदगी मिल गई और अभी कइयों को नई जिंदगी मिलनी बाकी है।
युवक दो अगस्त को निजामुद्दीन इलाके में ट्रेन हादसे में बुरी तरह से घायल हो गया था। बबलू के अंगों को दान करने का निर्णय उनकी मां और भाइयों ने लिया।
मां ने किया बेटे का अंगदान
एम्स ट्रॉमा सेंटर में ब्रेन डेड घोषित होने के बाद सोमवार को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के ऑर्बो विभाग की पहल पर बबलू के अंगों को जरूतरमंद मरीज को देने की तैयारी शुरू की गई। बबलू की मां और भाई के हामी भरने के बाद सुरक्षित तरीके से अंग निकालने की तैयारी शुरू की गई।
एम्स ऑर्बो विभाग की प्रमुख डॉ. आरती विज की देखरेख में उनके शरीर से हृदय, दोनों किडनी, लिवर, कॉर्निया और लोवर लिम्ब्स को निकाला गया। इसके पहले एम्स के सभी संबंधित विभाग को इसकी सूचना दे दी गई थी।
चिकित्सकों के लिए एक चुनौती थी
हृदय प्रत्यारोपण सबसे मुश्किल था, लेकिन ब्रेन डेड होने के बाद हृदय प्रत्यारोपण में छह घंटे से ज्यादा का समय नहीं मिलता। लिहाजा इसी समय में उस मरीज को अस्पताल बुलाना और ऑपरेशन के लिए तैयार करना भी चिकित्सकों के लिए एक चुनौती थी।
हृदय प्रत्यारोपण कराने का इंतजार कर रहे कुछ लोगों से संपर्क किया गया लेकिन अंत में हरियाणा के रेवाड़ी के रहने वाले 42 वर्षीय एक व्यक्ति का हृदय प्रत्यारोपण किया गया। एक किडनी एक बच्चे को जबकि दूसरी किडनी एक वयस्क व लिवर भी एक वयस्क को ही प्रत्यारोपित किया गया। ये तीनों ही मरीज दिल्ली के रहने वाले हैं।
हृदय प्रत्यारोपण करने वाले एम्स के कार्डियोथोरोसिस सेंटर के प्रमुख डॉ. बलराम एरॉन ने बताया कि संयोग से ब्रेन डेड का ब्लड ग्रुप ए पॉजिटिव था और जिसका प्रत्यारोपण किया जाना था उसका ब्लड ग्रुप एबी पॉजिटिव था। एबी पॉजिटिव ब्लड ग्रुप यूनिवर्सल डोनर होता है, इस वजह से हृदय प्रत्यारोपण करने का निर्णय लेने में आसानी हुई।
ब्रेन डेड घोषित करने के लिए दो बार हुई जांच-पड़ताल
एम्स आर्गन ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर राजीव मैखुरी ने बताया कि दो अगस्त को बबलू को सिर में गंभीर चोट के बाद एम्स ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया। मरीज की हालत लगातार खराब हो रही थी।
तीन अगस्त की रात ब्रेन डेड घोषित करने के लिए पहली जांच की गई इसके बाद चार अगस्त की सुबह दोबारा जांच की गई। इसके बाद चिकित्सकों ने ब्रेन डेड घोषित किया। इसके बाद मरीज की मां और भाई को अंगदान करने के लिए कहा गया। पीड़ित परिवार ने भी तुरंत अंग दान करने का निर्णय लिया।