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Blame Game : दिल्ली के नाले में डूबकर हुई थी मां-बेटे की मौत, एमसीडी और डीडीए ने डाली एक-दूसरे पर जिम्मेदारी
Fri, 02 Aug 2024 05:54 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Fri, 02 Aug 2024 05:54 AM IST
सार
हादसे के तुरंत बाद बुधवार रात क्षेत्राधिकार को लेकर दिल्ली व यूपी पुलिस आप में उलझी रहीं। देर रात में विवाद का निपटारा होने के बाद बृहस्पतिवार को एमसीडी और डीडीए दिनभर लापरवाही की जिम्मेदारी एक-दूसरे पर डालते रहे।
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एमसीडी मुख्यालय
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
नाले में डूबकर मां-बेटे की मौत पर बृहस्पतिवार को जिम्मेदार सिविक एजेंसियां पल्ला झाड़ती नजर आई। हादसे के तुरंत बाद बुधवार रात क्षेत्राधिकार को लेकर दिल्ली व यूपी पुलिस आप में उलझी रहीं। देर रात में विवाद का निपटारा होने के बाद बृहस्पतिवार को एमसीडी और डीडीए दिनभर लापरवाही की जिम्मेदारी एक-दूसरे पर डालते रहे। एमसीडी ने खुले नाले को डीडीए का बताया, जबकि डीडीए ने इसके रखरखाव की जिम्मेदारी एमसीडी पर डाल दी। बहरहाल यह तय नहीं हो सका है कि नाला किसके अधीन है। हालांकि, डीडीए के स्पष्टीकरण पर एमसीडी की मेयर ने इसकी जांच कराने की बात की है।
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एमसीडी ने बृहस्पतिवार सुबह जानकारी दी थी कि जिस नाले में मां-बेटे की डूबकर मौत हुई है, उसका निर्माण डीडीए करवा रहा है। सड़क के साथ नाले का भी निर्माण हो रहा है। नाले की गहराई 10-12 फीट के बीच है। वहीं, इसके साथ-साथ खोड़ा चौक से मयूर विहार फेज-तीन की ओर जाने वाली 120-150 फीट चौड़ी सड़क है। एमसीडी का बयान आने के बाद डीडीए ने स्पष्टीकरण दिया कि जिस जगह पर हादसा हुआ, वह एमसीडी के क्षेत्राधिकार में है।
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खोड़ा कालोनी की तरफ नाले की लंबाई 1,350 मीटर है। इसमें से 1,000 मीटर लंबा नाला और उसके साथ की सड़क को काफी समय पहले एमसीडी को सौंप दिया गया है। वहीं, बाकी 350 मीटर का हिस्सा स्थानीय बस टर्मिनल से लेकर पीडब्ल्यूडी की मुख्य सड़क तक पड़ता है। यह डीडीए के अधीन है। हाल ही में डीडीए ने अपने हिस्से के नाले की सफाई का काम पूरा करने के बाद उसे आरसीसी स्लैब से ढक दिया था। इसके अलावा नाले में कचरा जाने से रोकने के लिए एमसीडी और डीडीए के नालों के जंक्शन पर एक स्क्रीन लगाई है। दोनों के शव इसी जगह पर मिले हैं। यह डूबने वाली जगह से करीब 500 मीटर दूर है और एमसीडी के अधिकार में है। दोपहर बाद डीडीए के इस स्पष्टीकरण पर जब मेयर से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि वह इस मामले की जांच करवाएंगी कि नाला किसके अधीन है।
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भाजपा-आप ने दिल्ली को जलभराव के दलदल में धकेला : यादव
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष देवेन्द्र यादव ने बृहस्पतिवार को कहा कि दिल्ली सरकार, एमसीडी, डीडीए, बाढ़ एवं सिंचाई विभाग, जल बोर्ड, पीडब्लूडी आदि एजेंसियों को भाजपा और आम आदमी पार्टी की सरकारों ने मिलकर दिल्ली को जलभराव के दलदल में धकेल दिया है। इस मामले में हाईकोर्ट की फटकार लगने का भी उन पर असर नहीं हुआ। दोनों पार्टियां सुधार करने के जगह आपस में लड़ रही हैं। 45 वर्ष पुराना दिल्ली का ड्रेनेज सिस्टम वर्तमान जनसंख्या का भार सहने में पूरी तरह असमर्थ है। इस बारे में दिल्ली सरकार, एमसीडी व डीडीए पूरी तरह वाकिफ हैं। इसके बावजूद सुधार करने की जगह हर वर्ष हजारों करोड़ रुपये गाद निकालने के नाम पर दस्तावेज में खर्च दिखाकर भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाते हैं। बीती रात की बारिश के बाद चार लोगों की जान चली गई। इस तरह अब तक जलभराव और करंट से 19 लोगों की हुई मौत के लिए दिल्ली सरकार और एमसीडी सीधे तौर पर जिम्मेदार हैं।
डीडीए की लापरवाही ने ली मां-बेटे की जान, उपराज्यपाल दें इस्तीफा : आप
आम आदमी पार्टी ने नाले में डूबने से मां-बेटे की मौत के मामले में उपराज्यपाल वीके सक्सेना से इस्तीफा मांगा है। राज्यसभा सांसद संजय सिंह, विधायक कुलदीप कुमार और मुख्य प्रवक्ता प्रियंका कक्कड़ ने प्रेसवार्ता में आरोप लगाया कि भारी बारिश के बाद निर्माणाधीन नाले में पानी भर गया। डीडीए ने वहां कोई बोर्ड तक नहीं लगा रखा था। नाले में ढाई साल का बच्चा गिर गया। उसे डूबता देख बचाने आई मां भी डूब गई। यह हादसा नहीं, हत्या है। इसके लिए डीडीए जिम्मेदार है, लेकिन इस पर भाजपा और उपराज्यपाल मौन हैं। डीडीए ने सुरक्षा निर्देशों का पालन नहीं किया है।
संजय सिंह ने कहा कि आप के मंत्री, विधायक और पार्षदों ने क्षमता के अनुसार मौके पर जाकर काम किया। अधिकारियों और कर्मचारियों को बुलाकर जो भी जरूरी इंतजाम किए जा सकते थे, वे किए गए, लेकिन इस बीच दुर्भाग्यपूर्ण घटना हुई। कोंडली विधायक कुलदीप कुमार ने कहा कि डीडीए की नाकामी की वजह से मां-बेटे की मौत हो गई। कई बार आग्रह करने और पत्र लिखने के बाद डीडीए ने दिल्ली और यूपी की खोड़ा कॉलोनी के बीच इस नाले का पुनर्निर्माण का कार्य शुरू करवाया, लेकिन लापरवाही बरती गई। निर्माण कार्य के दौरान वहां एक बोर्ड तक नहीं लगाया गया, न ही कोई बैरिकेडिंग की गई। प्रियंका कक्कड़ ने कहा कि सब जानते हैं कि दिल्ली में कई सारी एजेंसियां काम करती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उपराज्यपाल दिल्ली सरकार के काम रोकते हैं। यह घटना बेहद दुखद है, लेकिन इसे टाला जा सकता था।
मां-बेटे की मौत मामले में आप का प्रदर्शन
मां-बेटे की मौत मामले में आप विधायक कुलदीप कुमार और रोहित महरौलिया के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने घटनास्थल पर उपराज्यपाल वीके सक्सेना और भाजपा के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। कार्यकर्ता हाथ में एलजी इस्तीफा दो, दोषी अफसरों पर कार्रवाई करो समेत अन्य नारे लिखी तख्तियां लाए थे। इस दौरान कुलदीप ने आरोप लगाया कि डीडीए की लापरवाही से महिला व बच्चे की जान गई है। यह हादसा नहीं, हत्या है। फिर भी उपराज्यपाल ने अभी तक दोषी अधिकारियों पर कोई कार्रवाई नहीं की है। वहीं, रोहित ने पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा दिलाने की मांग की। उन्होंने कहा कि कई बार कहने के बाद डीडीए ने नाले का पुनर्निर्माण शुरू किया था, लेकिन अधिकारियों ने इसमें जरा भी सावधानी नहीं बरती।