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विविभा 2024: संघ प्रमुख मोहन भागवत बोले, 16वीं सदी तक भारत हर क्षेत्र में अग्रणी था, फिर हम रुक गए और...
Fri, 15 Nov 2024 06:38 PM IST
श्याम जी.
अमर उजाला नेटवर्क, गुरुग्राम
अमर उजाला नेटवर्क, गुरुग्राम
Published by: श्याम जी.
Updated Fri, 15 Nov 2024 06:38 PM IST
सार
गुरुग्राम के फर्रुखनगर स्थित एसजीटी यूनिवर्सिटी में भारतीय शिक्षण मंडल युवा आयाम विजन फॉर विकसित भारत 2024 के तहत आयोजित कार्यक्रम का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि आरएसएस संघ के संघ संचालक मोहन भागवत ने कार्यक्रम को संबोधित किया।
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संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
गुरुग्राम के फर्रूखनगर स्थित एसजीटी यूनिवर्सिटी में विविभा 2024 कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत, इसरो अध्यक्ष एस सोमनाथ, नोबल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी मौजूद रहे। तीन दिवसीय कार्यक्रम में अलग-अलग विषयों पर चर्चा की जाएगी। वहीं, कार्यक्रम में 1200 से अधिक शोधार्थियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम की थीम विजन फॉर विकसित भारत रखी गई। सभी शोधार्थियों ने इसी थीम पर अपना रिसर्च पेपर तैयार किया।
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आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा, 'आज तक हमारे देश में सभी प्रकार के विचारों को लेकर प्रयोग हुए और पूरे विश्व पर हावी हो गए, लेकिन जहां से ये प्रयोग हुए वहीं अब इनकी विफलता चिंतकों के ध्यान में आती हैं। देश में विकास हुआ था पर्यावरण की समस्याएं भी खड़ी हुई। अभी शास्त्रार्थ चलता है कि विकास करें या पर्यावरण की रक्षा करें। मनुष्य को दोनों को साथ लेकर चलना पड़ेगा, जीवन तभी चलेगा।'
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उन्होंने कहा, 'चार प्रतिशत जनसंख्या को 80 प्रतिशत संसाधन चाहिए। सारी दुनिया से संसाधन प्राप्त करने के लिए अन्य लोगों पर डंडा चलाते हैं, ऐसे विकास के लिए जी जान से लगना पड़ता है लेकिन इसके परिणाम सभी लोगों को प्राप्त नहीं होते है। ईस्वी सन 1 से 16वीं सदी तक भारत हर क्षेत्र में आगे थे, हम रुक गए इसलिए हमारा पतन हो गया। भारत ने पूरे देश को साथ चलाने का उदाहरण रखा है। भारत में 10 हजार वर्षों से खेती हो रही है, लेकिन उर्वरा जैसी समस्या कभी नहीं आईं। यह अब आ रही है, यह देखते देखते हो गया।'
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इसरो के अध्यक्ष डॉ एस सोमनाथ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत की संकल्पना को साकार करने का यही सही समय है। उन्होंने मिशन चंद्रयान की सफलता का उल्लेख करते हुए कहा कि हमारा लक्ष्य 2040 तक चंद्रमा पर मानव भेजना, और अपना स्पेस स्टेशन तैयार करना है। उन्होंने कहा की भारत की विश्वगुरु की संकल्पना को साकार करते हुए हमें ऐसा भारत बनाना है ताकि लोग यहां पर प्रसन्नता पूर्वक रहें।
भारतीय शिक्षण मंडल के अखिल भारतीय अध्यक्ष डॉ. सच्चिदानंद जोशी, ने विविभा: 2024 का उद्देश्य बताते हुए कहा कि युवा शोधार्थी, शोध और नवाचार के माध्यम से भारत को विश्वगुरु बनाने में अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान दें। सामूहिक विकास में क्या व्यवधान हैं, उसपर शोध होना चाहिए। विज्ञान और तकनीक इसमें बहुत बड़ा योगदान दे सकती है। दुनिया समस्याओं को जानती है और उनके नेता समाधानों को जानते हैं। वो नई समस्या पैदा करते हैं और उनका समाधान ढूंढते हैं ये समस्या है इसमें शोध की आवश्यकता है। इसलिए हमें समस्याओं के ईंधन से समाधान की अग्नि प्रज्ज्वलित करना है और पूरे विश्व को प्रकाशित करना है।
भारतीय शिक्षण मंडल के अखिल भारतीय महामंत्री भरत शरण शिंह ने समस्त आगंतुकों, शोधार्थियों व SGT विश्वविद्यालय के परिवार के प्रति आभार व्यक्त किया। विविभा: 2024 के अंतर्गत भारतीय ज्ञान परंपरा व आर्टिफीशियल इंटेलीजेन्स पर आधारित भव्य प्रदर्शनी में सहभागिता करने के लिए ISRO, DRDO, BRAHMOS, भारतीय सेना और वायु सेना, IISER, IIT और केंद्रीय विश्वविद्यालयों व शैक्षिक संस्थानों के प्रति विशेष आभार व्यक्त किया।
उद्घाटन समारोह के दौरान इसरो चीफ डॉ. एस सोमनाथ और नोबेल शांति विजेता कैलाश सत्यार्थी की मौजूदजी में आरएसएस के सरसंघचालक पूज्य मोहन भगवत जी ने एक विशाल प्रदर्शनी का भी शुभारंभ किया। VIVIBHA: 2024 में कणाद से कलाम तक की भारत की यात्रा का प्रदर्शन किया गया। इस दौरान 10000 शैक्षणिक संस्थानों, शोध संगठनों और सरकारी व निजी विश्वविद्यालयों ने "भारतीय शिक्षा", "विकसित भारत के लिए दृष्टि" और "भविष्य की तकनीक" जैसे विषयों पर अपने शोध और नवाचारों का प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शनी के माध्यम से यह बताने का प्रयास किया गया कि सनातनी शिक्षा से लेकर आधुनिक शिक्षा तक के सफर में भारत कहां है।
प्रदर्शनी में प्राचीन गुरुकुलों से लेकर AI, वर्तमान तकनीकी अनुकूलन समेत भारतीय शिक्षा के विकास और छत्रपति शिवाजी के समय के अस्त्र-शस्त्रों से लेकर भारतीय वायु सेना की ब्रह्मोस मिसाइल तक को विभिन्न स्टालों पर प्रदर्शित किया गया। यह प्रदर्शनी देशभर से आए शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रही। खास तौर पर IIIT मणिपुर के स्टॉल पर ‘काबुक कोइदुम’ विशेष रूप से चर्चा में रहा। गुड, चावल, तिल और मेवों से बनी ये पारंपरिक मिठाई, मणिपुर की सांस्कृतिक विरासत को देश भर से परिचित करने का महत्वपूर्ण प्रयास रहा।