VIDEO: वो पांच 'चीजें' जिसने बदल दी मोदी की सोच
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6 फरवरी 2013 को दिल्ली के श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स ने गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को उनके वायब्रेंट मॉडल को समझने के लिए अपने कॉलेज में बुलाया।
देश का प्रधानमंत्री बनने से लगभग डेढ़ साल पहले मोदी ने जब इन छात्रों को संबोधित किया तो अपने भाषण में तमाम बातों के अलावा अपने जीवन से जुड़ी पांच ऐसी कहानियां सुनाई जिन्होंने उनके जीवन और उनकी सोच को बदल दिया।
17 सितंबर मोदी का जन्मदिन है। आइए जानते हैं कि वो पांच कहानियां कौन सी हैं जिन्होंने मोदी को भी अपनी सोच बदलने के लिए मजबूर कर दिया।
नोट: मोदी के इस भाषण को पूरा सुनने के लिए अंतिम स्लाइड में लगे वीडियो को देखा जा सकता है।
किसानों ने बदल मोदी की सोच
पहली कहानी : एक बार महाराष्ट्र की सीमा से सटे क्षेत्र के आदिवासी किसान मोदी से मिलने पहुंचे। उन्होंने कहा कि हमारे यहां की सड़कों का कुछ कीजिए। मोदी ने कहा कि अच्छी सड़कों का जंगल में क्या करेंगे?
उन किसानों ने कहा कि हमने फिनलैंड के साथ एग्रीमेंट किया है। वो हमारे केले आयात करना चाहते हैं। सामान्य सड़कों में इतना जर्क होता है कि हमारे बीस प्रतिशत केले खराब हो जाते हैं। अगर पैवर रोड हों तो इस नुकसान को कम किया जा सकता है। आदिवासी किसानों द्वारा पैवर रोड की मांग को सुन मोदी हैरान रह गए।
दूसरी कहानी : 2012 में जापान सरकार के निमंत्रण पर मोदी जापान गए। होटल में चाय की प्याली से लेकर बस के टिकट तक पर एक उन्होंने एक स्लोगन लिखा देखा। वह स्लोगन था 'वी आर वेटिंग फॉर ओलंपिक'।
मोदी चौंक गए कि आठ साल बाद जापान में ओलंपिक होने वाला है। लेकिन वहां अभी से ही इसके लिए तैयारी चल रही है और उसके लिए माहौल बनाया जा रहा है। एक छोटे से देश का किसी खेल के लिए यह समर्पण देख मोदी स्तब्ध थे।
एक अनुवादक ने मोदी को किया शर्मिंदा
तीसरी कहानी : मोदी ने कहा कि 15 साल पहले मैं ताइवान गया। वहां मेरे साथ एक इंटप्रेटर था। वहां पांच-छह दिन रहने के दौरान वह इंटप्रेटर लगातार मोदी के साथ रहा। आखिरी दिन उसने मोदी से कुछ कहा। 'साहब आपको बुरा न लगे तौ क्या मैं एक सवाल पूछ सकता हूं।'
उसने मोदी से पूछा, 'सर, क्या अभी भी आपके यहां सांप सपेरों की दुनिया है? क्या अभी भी आपके यहां भूत प्रेत का राज है? क्या अभी भी भारत अंध श्रद्घा में डूबा हुआ है? उसके इस सवाल ने मोदी को सोचने पर मजबूर कर दिया।
चौथी कहानी : मोदी ने कहा कि एक दिन मेरे ऑफिस में एक युवा आया। वह बहुत प्रजेंटबल नहीं था। न ही वह ठीक से अपनी बात रख पा रहा था। वह भारतीय मूल का था और अफ्रिका में रहता था। कुछ देर सुनने के बाद मैंने उसे टालने का प्रयास किया। मैंने कहा कि आप अपने शहर जाइए और वहां के कलेक्टर से मिलिए।
एक युवा की क्षमता से मोदी हुए स्तब्ध
13 महीने बाद वह फिर मेरे ऑफिस आया। जैसे ही मुझे बताया गया कि कोई युवा है जो आपसे मिलना चाहता है तो मैं समझ गया कि ये वही आदमी है। मैंने कहा कि उसे अंदर मत भेजना।
लेकिन मुझे बताया गया कि वह मुझे निमंत्रण देने आया है। मोदी ने कहा कि मैं चौंक गया। उस युवा ने मुझे बताया कि मेरी फैक्टरी का निर्माण हो गया है और मैं चाहता हूं कि आप इसका उद्द्याटन करें।
उसने यह भी कहा कि छह महीने बाद आपको फिर यहां आना पड़ेगा क्योंकि, छह महीने बाद मैं अपना प्रोडक्ट लॉन्च करुंगा। छह महीने बाद मोदी फिर वहां गए।
उस युवा ने 19 महीने के अंदर एक ऐसी फैक्टरी का निर्माण कर दिया था जहां देश की शान मान जाने वाले दिल्ली मेट्रो ट्रेन के कोच का निर्माण हो रहा था।
19 महीनों के अंदर उसने मेट्रो कोच का उत्पादन कर यह साबित कर दिया कि हमारे देश के युवाओं में कितनी क्षमता है। इस युवा की कहानी ने भी मोदी को बेहद प्रभावित किया।
एक युवा सरपंच ने क्लिंटन से पूछा सवाल
पांचवी कहानी : अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन जयपुर के एक गांव पहुंचे। वहां उन्होंने घूंघट पहने महिलाओं को कंप्यूटर चलाते देखा।
वो यह सब देख रहे थे तभी एक दलित मां-बाप का बेटा जो उस गांव का सरपंच था दौड़ते हुए क्लिंटन के पास पहुंच गया। आयोजको को लगा कि कहीं यह सारे किए किराए पर पानी न फेर दे। सब घबरा रहे थे।
उस कार्यक्रम का टीवी पर सीधा प्रसारण हो रहा था। उस अनपढ़, दलित सरपंच ने क्लिंटन से एक सवाल पूछा, 'क्या आप अभी भी मेरे देश को पिछड़ा हुआ मानते हैं? क्या आप अभी भी इसे सांप-संपेरों का देश कहेंगे?
इंटरप्रेटर ने क्लिंटन को उसके सवाल के बारे में बताया। क्लिंटन उस युवा से इतने प्रभावित हुए कि उन्हें कहना पड़ा कि, 'आपके गांव ने मेरा भ्रम तोड़ दिया है। अब मैं दुनिया में जहां भी जाऊंगा आपके गांव का वर्णन जरुर करुंगा।'
मोदी उस युवा सरपंच के साहस के कायल हो गए।
वीडियो में देखें खुद मोदी ने खोले ये राज