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पिंक लाइन का पूरा चक्कर लगाने के लिए दिल्लीवासियों को करना पड़ेगा इंतजार, जमीन का विवाद बरकरार
Sun, 30 Dec 2018 02:45 AM IST
Vikas Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Vikas Kumar
Updated Sun, 30 Dec 2018 02:45 AM IST
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pink line metro
- फोटो : फोटो: कुमार संजय
दिल्ली मेट्रो रेल नेटवर्क की सबसे लंबी लाइन (मजलिस पार्क से शिव विहार कॉरिडोर) का पूरा चक्कर लगाने के लिए लोगों को अभी और इंतजार करना पड़ेगा। पिंक लाइन कॉरिडोर के तीन सेक्शन यात्रियों के लिए खोले जा चुके हैं। जबकि चौथे सेक्शन (लाजपत नगर से मयूर विहार पॉकेट-1) पर दिल्लीवासी 31 दिसंबर से सफर कर सकेंगे। पूरा कॉरिडोर खुलने के बावजूद मयूर विहार पॉकेट-1 और त्रिलोकपुरी के बीच करीब 200 मीटर जमीन को लेकर विवाद बना हुआ है। जिसकी वजह से इस कॉरिडोर पर सबीटीसी सिस्टम के तहत बिना ड्राइवर के मेट्रो नहीं चलाई जा सकेगी।
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पिंक लाइन (मजलिस पार्क-शिव विहार कॉरिडोर) के पहले सेक्शन मजलिस पार्क-दुर्गाबाई देशमुख सेक्शन को 14 मार्च 2018 को लोगों के लिए खोला गया। दूसरे सेक्शन दुर्गाबाई देशमुख-लाजपत नगर को 6 अगस्त 2018 को खोला गया और तीसरे सेक्शन त्रिलोकपुरी-शिव विहार को 31 अक्तूबर को खोला गया। फेज-3 के तहत इन तीनों सेक्शन के बाद अब 31 दिसंबर को कॉरिडोर का चौथा और आखिरी सेक्शन लाजपत नगर-मयूर विहार पॉकेट-1 लोगों के लिए खुलने वाला है। पिंक लाइन की लंबाई 59 किमी है, जो कि दिल्ली मेट्रो की सबसे लंबी लाइन है। इसे रिंग लाइन के नाम भी जाना जाता है। इस लाइन के सभी सेक्शन खुलने के बाद भी स्थिति ऐसी है कि ट्रेनों को सीबीटीसी सिस्टम या बिना चालक के नहीं दौड़ाया जा सकता है। इसका कारण मयूर विहार पॉकेट-1 और त्रिलोकपुरी मेट्रो स्टेशन के बीच 200 मीटर जमीन के टुकड़े पर चल रहे विवाद का समाप्त न होना है। साथ ही यात्रियों को मयूर विहार पॉकेट-1 से त्रिलोकपुरी पहुंचने के लिए ब्लू लाइन पर घूमकर जाना होगा, जिससे यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा।
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अभी डीडीए के पास अटका हुआ है मामला
त्रिलोकपुरी में 200 मीटर के जमीन के टुकड़े पर लोग रहते हैं और इसी के चलते मामला हाईकोर्ट तक पहुंच गया। हाईकोर्ट ने डीएमआरसी के पक्ष में फैसला दिया। हाईकोर्ट से रास्ता साफ होने के बाद अब डीडीए के पास मामला अटका हुआ है।
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क्लीयरेंस के बाद ही सीबीटीसी सिस्टम के तहत चलेगी मेट्रो
डीएमआरसी के अधिकारिक सूत्रों का कहना है कि जब तक डीडीए जमीन को क्लीयरेंस नहीं दे देता तक तक इस हिस्से को जोड़ा नहीं जा सकता। डीएमआरसी लगातार इस मुद्दे को लेकर डीडीए के संपर्क में है। डीडीए की ओर से रास्ता साफ होने में कितना समय लगेगा, इसका अनुमान लगाया मुश्किल है। जब तक लाइन पूरी तरह कनेक्ट नहीं होती तब तक सीबीटीसी सिस्टम के तहत ट्रेनों को नहीं चलाया जा सकता।