गांवों में मतदान के दिन रहा शादी जैसा माहौल
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राजधानी के ग्रामीण इलाकों में पूरा दिन चुनाव के बजाय शादी और पंचायत जैसा माहौल रहा। अधिकतर गांवों में ग्रुप में महिलाएं गीत गाते हुए मतदान केंद्रों पर पहुंचीं।
बुजुर्ग मतदान केंद्रों के पास ग्रुप में बैठकर हुक्का गुड़गुड़ाते हुए मतदान पर नजर बनाए हुए थे। राजधानी के सीमावर्ती झड़ौदा कलां, ढांसा, ईसापुर, काजीपुर, मलिकपुर, मुडेला खुर्द, मुंडेला कलां, बाकरगढ़ उजवा, समसपुर, रावता, गालिबपुर, झुलझुली, घुमनहेड़ा, छावला आदि गांवों में वैसे तो सुबह आठ बजे से मतदान का अच्छा माहौल बन गया, लेकिन दोपहर में मतदान केंद्रों का नजारा बदलना शुरू हो गया।
हुक्का पीते हुए मतदान पर रखी नजर
मतदान कराने की जिम्मेदारी युवाओं के बजाय बुजुर्गों ने अपने हाथों में ले ली। वह मतदान केंद्रों के पास डेरा डालकर बैठ गए। हुक्का गुड़गड़ाते हुए मतदान पर नजरें रखने के साथ-साथ मत नहीं डालने वालों के बारे में जानकारी लेने में जुट गए।
बुजुर्गों ने दो बजे के बाद युवकों से कहा कि जल्द से जल्द मत डालने के लिए नहीं आए लोगों को घर से बुलाकर लाएं। दूसरी ओर दोपहर के समय मतदान केंद्रों पर हरियाणवी गीत की गूज सुनाई दी।
महिलाएं टोलियों में जिताने के लिए आई सै और वोट देकर जीताएंगी...गीत गाती हुईं मतदान केंद्र पर पहुंचीं।कम उम्र की महिलाओं ने ही नहीं बुजुर्ग महिलाएं भी घूंघट में थीं। उन्होंने मतदान केंद्रों पर महिलाओं की अलग लाइन होने के बावजूद घूंघट नहीं खोला।