इनका क्या होगा: G-20 से पहले बेघर हो गए कई परिवार, प्रगति मैदान और आसपास बसी झुग्गियों को किया गया ध्वस्त
सरकार की तरफ से न्यायालय में साक्ष्य प्रस्तुत किए गए थे कि ये झुग्गियां सरकारी जमीन पर अवैध रूप से बनाई गई थीं। अतिक्रमण विरोधी अभियान के तहत इन्हें हटाया गया।
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जी-20 शिखर सम्मेलन से पहले कई परिवार बेघर हो गए। प्रशासन ने प्रगति मैदान व इसके आस पास में बसीं झुग्गियों को खाली करा लिया। झुग्गियों में रहने वाले लोगों ने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन अदालत ने बस्तियों को अवैध करार दिया। इसके बाद प्रशासन ने इन्हें 31 मई तक घर खाली करने का आदेश दिया था।
धर्मेंद्र कुमार, खुशबू देवी और इनके तीन बच्चे उन लोगों में से एक हैं, जिनके घर पिछले कुछ महीनों में ध्वस्त कर दिए गए। धर्मेन्द्र ने बताया कि जब जनता कैंप की झुग्गी बस्ती के निवासियों ने सुना कि जी-20 शिखर सम्मेलन उनके घर से महज 500 मीटर की दूरी पर प्रगति मैदान में होने जा रहा है तो उन्हें उम्मीद थी कि इससे उन्हें भी फायदा होगा। लेकिन उन्हें बेघर कर दिया गया। धर्मेन्द्र के तीन बच्चे हैं। पांच साल की बेटी सृष्टि और 10 साल का बेटा ईशांत पास के एक सरकारी स्कूल में पढ़ने जाते हैं। छोटी बेटी अनोखी नौ महीने की है। परिवार में खुशबू देवी के पिता भी शामिल हैं। उनका कहना है कि वे 13 साल से अपनी झोंपड़ी में रहते थे।
सरकार की तरफ से न्यायालय में साक्ष्य प्रस्तुत किए गए थे कि ये झुग्गियां सरकारी जमीन पर अवैध रूप से बनाई गई थीं। अतिक्रमण विरोधी अभियान के तहत इन्हें हटाया गया। जनता कैंप की झुग्गियों में रहने वाले अधिकतर लोग आस-पास में ही काम करते हैं। इनकी झुग्गियों को करीब चार महीने पहले हटाना शुरू कर दिया गया था। मामला कोर्ट में जाने के बाद कार्रवाई रुक गई थी।
बेघरों के लिए काम करने वाले सुनील कुमार अलेदिया का इस मामले में कहना है कि सरकार ने सौंदर्यीकरण के नाम पर घरों को ध्वस्त कर दिया और कमजोर लोगों को हटा दिया गया। सरकार ने ये चिंता नहीं कि कि इनका क्या होगा। अगर ऐसा करना ही था तो निवासियों को समय रहते चेतावनी दी जानी चाहिए थी। इनके लिए ऐसी जगह ढूंढी जानी चाहिए थी, जहां उनका पुनर्वास किया जा सके।