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मनमोहन को बीच में ही छोड़नी पड़ी थी पढ़ाई!

Mon, 18 Aug 2014 01:38 PM IST
Updated Mon, 18 Aug 2014 01:38 PM IST
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manmohan singh suddenly left his pre-medical education

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अर्थशास्त्र में विशेषज्ञता हासिल करने से पहले प्री-मेडिकल में प्रवेश लिया था लेकिन मन नहीं लगने के कारण पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी थी।

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प्री-मेडिकल में उन्होंने दाखिला अपने पिता की इच्छा को देखते हुए लिया था जो कि उन्हें डॉक्टर बनना देखना चाहते थे। इसका खुलासा उनकी बेटी दमन सिंह ने अपनी किताब ‘स्ट्रिक्टली पर्सनल-मनमोहन एंड गुरुशरण’ में किया है।
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इस लिंक पर क्लिक कर पढ़िए, मनमोहन सिंह ने पहली डेट पर अपनी होनी वाली पत्नी से क्या सवाल पूछा था
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इतना ही नहीं दमन सिंह ने ऐसे की कुछ और दिलचस्प खुलासे किए हैं। पढ़िए आगे...

मनमोहन सिंह को निकनेम देने की आदत

manmohan singh suddenly left his pre-medical education

दमन सिंह ने अपने पिता के कई अनजाने पहलुओं को उजागर किया है। हालांकि किताब में मनमोहन सिंह के 10 साल के प्रधानमंत्री कार्यकाल का जिक्र नहीं किया गया है।

विपक्ष के ‘मौन’मोहन कहे जाने को खारिज करते हुए किताब में बताया गया कि वह मजाक करते हैं और उन्हें लोगों को निकनेम देने में काफी मजा आता है।

दमन ने अपनी किताब में लिखा है कि मनमोहन सिंह के पिता उन्हें डॉक्टर बनाना चाहते थे। इसलिए उन्होंने अप्रैल 1948 में अमृतसर के खालसा कॉलेज में प्री-मेडिकल कोर्स में दाखिला लिया।

पिता की दुकान पर भी किया काम

manmohan singh suddenly left his pre-medical education

हालांकि कुछ महीनों बाद ही उन्होंने पढ़ाई छोड़ दी थी। इसकी वजह उनका विज्ञान और मेडिकल की पढ़ाई में रुचि का न होना था।

दमन ने अपने अभिभावकों से हुई बातचीत के आधार पर लिखी किताब में लिखा है कि इसके बाद वह अपने पिता की दुकान में काम करने लगे लेकिन वहां पर उनसे छोटे-मोटे ही काम करवाए जाते थे।

इससे उनका मन यहां से भी ऊब गया। इसके बाद उन्होंने फिर से पढ़ने की सोची और सितंबर 1948 में उन्होंने हिंदू कॉलेज में अर्थशास्त्र विषय में दाखिला लिया।

कैंब्रिज यूनिवर्सिटी में भी झेली गरीबी

manmohan singh suddenly left his pre-medical education

मनमोहन सिंह के अनुसार, उनकी रुचि गरीबी और गरीबों में थी। वह सोचते थे कि आखिर कुछ देश गरीब और कुछ अमीर कैसे हो जाते हैं।

कैब्रिज यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के दौरान मनमोहन सिंह को पैसों की भी समस्या का सामना करना पड़ा। वहां पर रहने और पढ़ने का खर्चा सालाना करीब 600 पाउंड था।

पंजाब यूनिवर्सिटी स्कॉलरशिप से उन्हें करीब 160 पाउंड मिल जाते थे। बाकी के लिए उन्हें अपने पिता पर निर्भर रहना पड़ता था।

बहुत मजाकिया इंसान हैं मनमोहन सिंह

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ऐसे में वह सस्ता खाना ही खाते थे और कई बार भूखे भी रह जाते थे। उन्होंने अपने एक दोस्त से दो साल के लिए 25 पाउंड लोन पर मांगे थे लेकिन उसने भी केवल 3 पाउंड ही भेजे।

दमन सिंह ने अपनी किताब में पूर्व प्रधानमंत्री और अपने पिता के मौन रहने के आरोपों का भी जवाब दिया है।

दमन के मुताबिक, उनके पिता काफी मजाकिया इंसान हैं। उन्होंने अपनी किताब में लिखा है कि जब वह अपने दोस्तों के बीच होते हैं तो वह काफी मजाक करते हैं।

अंडे तक नहीं उबाल सकते मनमोहन सिंह

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साथ ही उन्हें लोगों को निकनेम देने में भी काफी मजा आता है। उन्होंने अपनी पत्नी गुरुशरण कौर का निकनेम गुरुदेव रखा है।

हम तीन बहनों के नाम किक, लिटिल नाउन और लिटिल राम रखा हुआ है। साथ ही उन्होंने लिखा है कि उनके पिता कोई घरेलू काम नहीं कर सकते हैं।

यहां तक कि वह न तो अंडे उबाल सकते हैं, न कि टेलीविजन चालू कर सकते हैं।

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