मौत के मुंह से वापस आया व्यक्ति, 40 मिनट बाद चलने लगी सांसे
हृदयगति रुकने से मौत के मुंह में पहुंचे 33 वर्षीय सचिन जुनेजा को एस्कॉर्ट्स-फोर्टिस अस्पताल के डॉक्टरों ने नई जिंदगी दी है। डॉक्टरों की 40 मिनट की मेहनत के बाद उनके दिल की धड़कन लौटाने में कामयाबी मिली। स्वास्थ्य लाभ के बाद बुधवार को सचिन जुनेजा ने पत्रकारों से बात करते हुए दूसरी जिंदगी देने के लिए एस्कॉर्ट्स फोर्टिस अस्पताल की कार्डियोलॉजी टीम को धन्यवाद दिया।
सचिन जुनेजा एक विश्वविद्यालय में मार्केेटिंग डायरेक्टर के पद पर है। उन्होंने बताया कि 4 जुलाई की शाम वह कार्यालय से घर लौट रहे थे। रास्ते में सीने में तेज दर्द उठा और उसके बाद उन्हें होश नहीं रहा। अस्पताल के हृदयरोग विभागाध्यक्ष डॉ. संजय कुमार ने बताया कि सचिन जुनेजा की ईसीजी में सीधी लाइनें आई थीं, इसका अर्थ था कि उनकी हृदयगति थम चुकी है।
बावजूद इसके उनकी टीम ने करीब चालीस मिनट तक सचिन को सीपीआर (कृत्रिम सांस देते हुए सीना दबा हृदय गति दोबारा शुरू करने की प्रक्रिया) दिया गया। चालीस मिनट बाद उनके हृदय की धड़कन शुरू हो गईं। इस दौरान भी उनके दिल ने काम करना शुरू कर दिया था लेकिन काफी देर तक ऑक्सीजन नहीं मिलने की वजह से शरीर के कई प्रमुख आंतरिक अंगों ने काम करना बंद कर दिया था।
उन्हें एकमो (एक्सट्रा कारपोरियल मेंबरेन ऑक्सीजिनेशन) मशीन पर रखा गया। हृदय दोबारा काम करना न बंद करे, इसलिए एंजियोप्लास्टी कर उनकी धमनियों के ब्लॉकेज खोले गए। करीब एक माह तक इलाज चलने के बाद अब सचिन के सभी आंतरिक अंग ठीक से काम कर रहे हैं।
पत्रकारों से रूबरू हुए सचिन जुनेजा ने बताया कि अब वह स्वस्थ हैं लेकिन दवाएं चलती रहेंगी। डॉ. संजय कुमार ने बताया कि हृदयगति रुकने के बाद का पहला घंटा बहुत ही महत्वपूर्ण होता है, यदि किसी को दिल का दौरा पड़ता है तो उसे जितनी जल्दी अस्पताल पहुंचाया जाए उतना ही उसकी जिंदगी बचने के संभावना बढ़ जाती है।