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महिला चला रही थी फर्जी एसीपी की कार, बस्सी ने पकड़ा रंगे हाथ

Thu, 07 Jan 2016 03:59 PM IST
Updated Thu, 07 Jan 2016 03:59 PM IST
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man poses as ACP in front of bassi with delhi police sticker on his SUV

दिल्ली पुलिस के किसी भी विभाग में विवेकानंद शर्मा नाम का कोई एसीपी नहीं है। लेकिन सोमवार की रात एक विवेकानंद शर्मा नाम के व्यक्ति ने खुद पुलिस कमिश्नर बीएस बस्सी को ये यकीन दिलाने की भरसक कोशिश की कि वो सतर्तकता विभाग में एसीपी है।

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अब नोएडा की आर्किटेक्चर कंपनी में काम करने वाला 47 वर्षीय विवेकानंद शर्मा तिहाड़ जेल में है। ये शर्मा का दुर्भाग्य ही कहेंगे कि वो सोमवार को स्वयं पुलिस कमिश्नर बीएस बस्सी के हत्थे चढ़ गया।
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जिस वक्त बीएस बस्सी को उसपर शक हुआ वो एसयूवी फॉर्च्यूनर पर सवार होकर जा रहा था। गौरतलब है कि उस एसयूवी के रजिस्ट्रेशन प्लेट और विंडस्क्रीन पर दिल्ली पुलिस का स्टिकर लगा था।

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दिल्ली पुलिस की गाड़ी पर नंबर यूपी का

man poses as ACP in front of bassi with delhi police sticker on his SUV

अंग्रेजी दैनिक इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार सोमवार की रात करीब साढ़े आठ बजे की बात है जब बस्सी अपने वार्षिक प्रेस कांफ्रेंस को खत्म करके लौट रहे थे। उस वक्त उनके साथ स्पेशल यूनिट के स्पेशल कमिश्नर ऑफ पुलिस धर्मेंद्र कुमार भी थे।

उन दोनों को ही आश्चर्य हुआ जब उन्होंने देखा कि एक एसयूवी जा रही है जिसे एक महिला चालक चला रही है और उसके नंबर प्लेट पर दिल्ली पुलिस लिखा है और गाड़ी का नंबर उत्तरप्रदेश का है।

ये देखते ही खुद बस्सी ने हस्तक्षेप करते हुए एसयूवी को राजपथ के पास सी-हेक्सागन पर रोका। इसके बाद बस्सी और कुमार दोनों ही अपनी कार से निकले और एसयूवी में बैठे शख्स से पूछा कि आखिर उसने दिल्ली पु्लिस का स्टिकर क्यों चिपकाया है।

जब आईडी कार्ड मांगा तो एसीपी से बन गया वकील

man poses as ACP in front of bassi with delhi police sticker on his SUV

बस्सी के सवाल को सुनकर एसयूवी में सवार विवेकानंद नाम के उस शख्स ने कुछ ऐसा कहा जिसने बस्सी को भी हैरान कर दिया। विवेकानंद ने कहा कि वो सतर्कता विभाग में एसीपी है। इसके बाद बस्सी का दिमाग ठनका उन्होंने तुरंत उसका आईडी कार्ड मांगा और अपनी कार की ओर चले गए।

दोबारा बस्सी जब वापस लौटे तो उन्होंने विवेकानंद से कुछ और प्रश्न पूछे जिसका जवाब हो नहीं दे पाया और अब तक अपने को एसीपी बताने वाला ये शख्स खुद को वकील बताने लगा।

उसने आगे कहा कि वो अपनी प‌त्नि के साथ उसके मायके जा रहा है। अब तक बस्सी समझ चुके थे कि वो एक झूठा इंसान है पर उन्होंने इंतजार किया।

बुरे फंसे कार लेकर

man poses as ACP in front of bassi with delhi police sticker on his SUV

जब सारा सच और झूठ का ड्रामा चल ही रहा था कि बस्सी के काफिले में से ही एक अफसर ने पास के एक पिकेट को फोन किया कि वो आकर विवेकानंद के पेपर चेक करे। जल्द ही तिलक मार्ग पुलिस स्टेशन से कुछ अफसर वहां पहुंचे और विवेकानंद को गिरफ्तार ‌कर लिया।

विवेकानंद के अनुसार उसने ये स्टिकर 20 दिन पहले ही इसपर लगाया था और ये गाड़ी भी उसकी नहीं है। पुलिस ने एसयूवी जब्त कर ली जिसे शर्मा एक कंपनी के नाम पर रजिस्टर बता रहा था।

विवेकानंद के ऊपर आईपीसी की धारा 170(अपने आप को एक पब्लिक सर्वेंट बताना) और 171 (पब्लिक सर्वेंट की वर्दी पहनने या टोकन इस्तेमाल करने) के तहत तिलक मार्ग थाने में मामला दर्ज किया गया है। ‌उसे कोर्ट में भी पेश किया गया जहां उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

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