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NCR में मकर संक्रांति के क्या हैं मुहुर्त?
अमर उजाला, दिल्ली
Updated Tue, 14 Jan 2014 10:16 AM IST
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देशभर में आज मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन स्नान आदि के बाद दानपुण्य का विशेष महत्व है। सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करते ही संक्रांति का काल शुरू हो जाएगा।
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लेकिन सभी शहरों में विशेष पूजा अर्चना का मुहुर्त अगल-अलग है। दरअसल यह क्षेत्रों की मान्यता अनुसार लोग मानते हैं। इसी क्रम एनसीआर के पांचों शहरों में क्या रहेंगे शुभ मुहुर्त, कैसे करें पूजा, क्या हैं विशेष फल प्राप्त करने के तरीके, इससे संबंधित एक रिपोर्ट...
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दोपहर 1:20 बजे के बाद है असली संक्रांति
इस बारे में ज्योतिषाचार्य पंडित प्रकाश जोशी ने बताया कि मकर संक्रांति के दिन भगवान सूर्य अपने पुत्र शनि की राशि मकर में प्रवेश करते हैं। शास्त्र में इस अवधि को विशेष शुभ माना गया है। मान्यता है कि इस मौके पर दान का फल सौ गुना होता है।
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मकर संक्रांति का पर्व सुबह से लेकर शाम तक मनाया जा सकता है। हालांकि 1:20 बजे दोपहर के बाद विशेष फलदायी साबित होगा। वहीं, स्नान के लिए सुबह सात बजे से दस बजे का मुहूर्त बेहतर होगा।
दोपहर 1.13 के बाद पितरों के लिए करें दान
वहीं, ज्योतिषाचार्य नरेश वशिष्ठ ने बताया कि मकर संक्रांति पर मंगलवार सुबह से लेकर शाम तक पूरे दिन लोगों के लिए शुभ व फलदायी है। हालांकि 1:13 के बाद पितरों के लिए विशेष दान, विशेष पूजा-अर्चना का मुहूर्त है।
दरअसल, पंचांग के मुताबिक सूर्य मकर राशि में दोपहर 1:13 बजे के बाद प्रवेश कर रहा है। उनका यह भी कहना है कि मकर संक्रांति में तिथि का कोई महत्व नहीं होता। सूर्योदय के बाद पूरा दिन शुभ माना जाता है। सूर्य एक राशि में पूरे एक माह रहते हैं।
क्या है संक्रांति?
सूर्य का एक राशि से दूसरी राशि में संचरण का समय संक्रांति कहलाता है। संक्रांति से ही ऋतुओं का परिवर्तन होता है। यद्यपि सूर्य संक्रांतियां 12 हैं, परंतु इनमें से मेष, कर्क, तुला और मकर संक्रांति मुख्य हैं। मेष संक्रांति में सौर वर्ष का आरंभ माना जाता है। वहीं, सूर्य का मकर राशि में प्रवेश मकर संक्रांति कहलाता है।
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सूर्य पूजा का क्या है महत्व?
नवग्रहों में सूर्य प्रथम ग्रह है। इसके अलावा सभी शक्तियों का भी दाता माना गया है। यही नहीं सूर्य को पिता के भाव कर्म का स्वामी भी माना गया है। पुराणों, वेदों आदि धार्मिक ग्रंथों में भगवान सूर्य को जगत का आत्मा बताया गया है। पिता-पुत्र के संबंधों में विशेष लाभ के लिए पुत्र को सूर्य की पूजा करनी चाहिए।
कैसे करें पूजा?
स्नान के बाद लाल वस्त्र पहन कर सूर्य देव को जल अर्पित करें।
यदि जनेऊ धारण किया है, तो वैदिक मंत्रों से भी पूजन का विधान है। मकर संक्रांति के दिन तिल से बनी चीजें, गुड़, खिचड़ी, कंबल इत्यादि का दान शुभ है ।
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गेहूं, गुड़, घी, लाल चंदन, लाल वस्त्र, तांबे के बर्तन, माणिक्य, सूर्य यंत्र, सामर्थ्य के अनुसार सोना, लाल या भूरी गाय का भी दान कर सकते हैं । सूर्य से पीड़ित जातक माणिक्य रत्न को विधिपूर्वक प्रतिष्ठा करके धारण करें।
किसके लिए फायदेमंद?
ज्योतिषाचार्य पंडित प्रकाश जोशी ने बताया कि शास्त्रों के अनुसार सूर्य मन व आत्मा का स्वामी है और जिन लोगों का जन्म फरवरी, मई, सितंबर और नवंबर में हुआ है। उनका सूर्य जन्म से ही कमजोर होता है, जिस कारण उनको मेहनत करने पर भी लाभ नहीं होता और जीवन में यश और स्वास्थ्य की कमी रहती है।
ऐसे में वो लोग मकर संक्रांति पर दान और सूर्य मंत्र का जप करके फायदा ले सकते हैं। यदि उस दिन आप अपने पुराने कपडे़ किसी गरीब को दान देते हैं तो पूरे परिवार पर सूर्य की कृपा होती है।
सूर्य पूजा के बाद दक्षिणा पश्चात इस मंत्र का उच्चारण करें...
नाना सुगंधि पुष्पाणि यथा कलोद भवानि,
पुष्पांजलि मर्यादत ग्रहाण परमेश्वरि: