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दो कदम सरकार पीछे हटे, दो कदम किसान भी हटेंगे पीछे, बीच का रास्ता निकले: नरेश टिकैत
Thu, 17 Dec 2020 09:56 PM IST
Vikas Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Vikas Kumar
Updated Thu, 17 Dec 2020 09:56 PM IST
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कृषि कानूनों को लेकर गाजीपुर बॉर्डर पर हुई महापंचायत
- फोटो : amar ujala
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कृषि कानूनों के विरोध में गुरुवार को गाजीपुर बॉर्डर पर मसले का हल निकालने के लिए भारतीय किसान यूनियन की ओर से खाप महापंचायत का आयोजन किया गया। इस मौके पर किसानों आंदोलन की रणनीति पर चर्चा हुई। पंचायत के बाद किसानों ने सिंघु बॉर्डर पर खुदकुशी करने वाले संत राम सिंह को दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी।
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भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत ने कहा कि कृषि कानूनों पर बीच का रास्ता निकालने के लिए दो कदम सरकार पीछे हटे और दो कदम किसान भी पीछे हटने को तैयार हैं। पिछले 22 दिनों से चल रहा आंदोलन अब किसानों के मान-सम्मान की बात बन गया है। आज किसान अपने आंदोलन के लिए किसी भी तरह की कुर्बानी देने के लिए तैयार है। सरकार किसानों में फूट डालने की साजिश रच रही है, लेकिन वह अपनी इस मंशा में कभी कामयाब नहीं हो पाएगी।
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भाकयू प्रवक्ता रारकेश टिकैत ने बताया कि गुरुवार को 84 खापों के चौधरियों को महापंचायत में आने की दावत दी गई थी, लेकिन ज्यादातर को यहां नहीं आने दिया। पुलिस ने ज्यादातर को उनके इलाकों में ही रोक लिया। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर बनाई गई कमेटी में भी वह तीनों कानूनों को रद्द करने की मांग करेंगे। खाप महापंचायत में आए चौधरियों ने आंदोलन को अपना पूरा समर्थन देने का वादा किया।
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भाकयू अध्यक्ष व बालियान खाप के चौधरी नरेश टिकैत ने कहा कि उनको लगता था कि आंदोलन चार-पांच तक चलेगा और सरकार मान जाएगी। लेकिन सरकार की हठधर्मी आज आंदोलन को 22 दिन हो गए। किसान कड़कड़ाती ठंड के बीच खुले आसमान के नीचे पड़ा है। किसान देश बचाने के लिए लड़ाई लड़ रहा है। आज आंदोलन करने वाले किसानों को आतंकवादी और खालिस्तानी बताया जा रहा है, यह बिल्कुल गलत है। किसान न आतंकवादी और न खालिस्तानी।
आज पूरे देशभर के 40-45 किसान संगठन आंदोलन से जुड़ चुके हैं। हर संगठन किसानों के हितों की लड़ाई लड़ रहा है। समाज को बचाने और उनके हितों की रक्षा करने का जिम्मा खाप का होता है। नरेश टिकैत ने सभी खाप चौधरियां का आंदोलन में साथ देने के लिए धन्यवाद अदा किया। वहीं बत्तिसां खाप के प्रतिनिधि कंवरपाल ने बताया कि किसानों ने सरकार से स्वामीनाथन रिपोर्ट की मांग की थी, लेकिन सरकार ने तो इन कानूनों के साथ उनको अडानी-असंबानी की रिपोर्ट थमा दी।
सरकार की नीतियों के कारण देश अब दोबारा उपनिवेश बनने की ओर अग्रसर है। आंदोलन को बदनाम करने के लिए सरकार आरोप लगाती है कि टुकड़े-टुकड़े गैंग आंदोलन से जुड़ा है। किसान सरकार से कहना चाहता है कि यहां कोई टुकड़े-टुकड़े गैंग नहीं है। किसान जब तक वापस नहीं जाएगा तब तक सरकार अपना किसान विरोधी कानूनों को वापस नहीं ले लेती है।
महापंचायत में मुस्लिम खाप-मूलाजाट खाप के चौधरी अब्बास, गठवाला खाप के रमेश मलिक, बत्तिसां खाप के कंवरपाल, पंवार खाप के देवी सिंह पंवार, लाठियान खाप के चौधरी देवेंद्र सिंह मास्टर जी व अन्य लोग मौजूद थे। ज्यादातर खाप के चौधरियों ने जल्द ही मसले को हल निकालने पर सहमति जताई।