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Delhi NCR News: भक्तों से मिलने मंदिर के बाहर रथ पर सवार होकर आए महाप्रभु जगन्नाथ
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पुरी की परंपरा के अनुरूप तीन अलग-अलग रथों का पहली बार राजधानी में हुआ संचालन
भगवान जगन्नाथ की रथ यात्राओं में उमड़ा आस्था का सैलाब
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। ओडीशा के पुरी में निकलने वाली पारंपरिक रथ यात्रा के अनुरूप राष्ट्रीय राजधानी में भी बृहस्पतिवार को त्यागराज नगर, हौज खास, वसंत कुंज, रोहिणी और पूर्वी दिल्ली के झिलमिल स्थित श्री जगन्नाथ मंदिरों से निकली रथ यात्राओं में हजारों श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। यात्रा मार्ग पर इस दौरान भजन-कीर्तन, पुष्पवर्षा हुई। साथ ही सेवा शिविर भी लगाए गए।
त्यागराज नगर स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर में आयोजित 59वीं रथ यात्रा में केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि भगवान जगन्नाथ की परंपरा मानवता, सामाजिक समरसता और विश्व बंधुत्व का संदेश देती है। वहीं, इस रथ यात्रा में दक्षिण दिल्ली की सांसद बांसुरी स्वराज और विधायक नीरज बसोया भी मौजूद रहे। उन्होंने श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं दीं।
देवी सुभद्रा के रथ को केवल महिला श्रद्धालुओं ने खींचा
इस साल की रथयात्रा का सबसे बड़ा आकर्षण भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा के लिए पुरी की परंपरा के अनुरूप नंदीघोष, तलध्वज और देवदलन नाम के तीन अलग-अलग रथों का पहली बार दिल्ली-एनसीआर में संचालन रहा। महिला सशक्तिकरण का संदेश देते हुए देवी सुभद्रा के देवदलन रथ को केवल महिला श्रद्धालुओं ने खींचा।
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50 हजार श्रद्धालुओं के लिए महाप्रसाद की व्यवस्था
पारंपरिक पाहंडी बीजे और छेरा पहंरा अनुष्ठान के बाद रथ यात्रा त्यागराज स्टेडियम से शुरू होकर निर्धारित मार्गों से गुजरते हुए गुंडिचा मंदिर पहुंची, जहां भगवान नौ दिनों तक विराजमान रहेंगे। 50 हजार श्रद्धालुओं के लिए महाप्रसाद की व्यवस्था की गई। इसके अलवा मंदिर के सेवादारों ने बताया कि ठाकुर जी को भोग लगाने के लिए कोलकाता से माटी के बर्तन मंगाए गए हैं। यात्रा मार्ग पर सुरक्षा, चिकित्सा, पेयजल, जल छिड़काव और निःशुल्क अन्न प्रसाद की व्यापक व्यवस्था की गई थी। ओडिशा के सांस्कृतिक दलों ने घोड़ा नाच, बाघ नाच और पाइका युद्ध नृत्य की प्रस्तुति देकर श्रद्धालुओं का उत्साह बढ़ाया।
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सेवा, विनम्रता और समानता का प्रतीक है रथयात्रा : उपराज्यपाल
वहीं, हौज खास स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर में आयोजित 48वीं वार्षिक रथ यात्रा का भी शुभारंभ दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने किया। उन्होंने कहा कि रथ यात्रा केवल धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि सेवा, विनम्रता और समानता जैसे भारतीय जीवन मूल्यों का जीवंत प्रतीक है। मंदिर प्रबंधन के अनुसार 27 जुलाई तक 11 दिवसीय रथ यात्रा महोत्सव आयोजित होगा। 20 जुलाई को हेरा पंचमी, 24 जुलाई को बहुदा यात्रा, 25 जुलाई को सुना बेशा, 26 जुलाई को अधरा पाना और 27 जुलाई को नीलाद्री बीजे जैसे प्रमुख धार्मिक आयोजन होंगे। हौज खास और त्यागराज नगर के मंदिरों में प्रतिदिन शाम भजन-कीर्तन, ओडिशी नृत्य और सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे।
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11 हजार किलो आम का प्रसाद वितरित किया
नई दिल्ली। इस्कॉन द्वारका द्वारा आयोजित रथ यात्रा में भगवान को 108 प्रकार के आम से सजाकर 11,000 किलो आम का भोग अर्पित किया गया, जिसे बाद में प्रसाद के रूप में श्रद्धालुओं में वितरित किया गया। रथ यात्रा द्वारका के विभिन्न सेक्टरों और प्रमुख मार्गों से होकर निकली, जहां बड़ी संख्या में लोगों ने भगवान के दर्शन किए। यात्रा का सीधा प्रसारण इस्कॉन द्वारका के यूट्यूब चैनल पर भी किया गया, जिससे दूर-दराज के श्रद्धालु भी इस आयोजन से जुड़ सके।
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भगवान जगन्नाथ की रथ यात्राओं में उमड़ा आस्था का सैलाब
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। ओडीशा के पुरी में निकलने वाली पारंपरिक रथ यात्रा के अनुरूप राष्ट्रीय राजधानी में भी बृहस्पतिवार को त्यागराज नगर, हौज खास, वसंत कुंज, रोहिणी और पूर्वी दिल्ली के झिलमिल स्थित श्री जगन्नाथ मंदिरों से निकली रथ यात्राओं में हजारों श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। यात्रा मार्ग पर इस दौरान भजन-कीर्तन, पुष्पवर्षा हुई। साथ ही सेवा शिविर भी लगाए गए।
त्यागराज नगर स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर में आयोजित 59वीं रथ यात्रा में केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि भगवान जगन्नाथ की परंपरा मानवता, सामाजिक समरसता और विश्व बंधुत्व का संदेश देती है। वहीं, इस रथ यात्रा में दक्षिण दिल्ली की सांसद बांसुरी स्वराज और विधायक नीरज बसोया भी मौजूद रहे। उन्होंने श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं दीं।
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देवी सुभद्रा के रथ को केवल महिला श्रद्धालुओं ने खींचा
इस साल की रथयात्रा का सबसे बड़ा आकर्षण भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा के लिए पुरी की परंपरा के अनुरूप नंदीघोष, तलध्वज और देवदलन नाम के तीन अलग-अलग रथों का पहली बार दिल्ली-एनसीआर में संचालन रहा। महिला सशक्तिकरण का संदेश देते हुए देवी सुभद्रा के देवदलन रथ को केवल महिला श्रद्धालुओं ने खींचा।
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50 हजार श्रद्धालुओं के लिए महाप्रसाद की व्यवस्था
पारंपरिक पाहंडी बीजे और छेरा पहंरा अनुष्ठान के बाद रथ यात्रा त्यागराज स्टेडियम से शुरू होकर निर्धारित मार्गों से गुजरते हुए गुंडिचा मंदिर पहुंची, जहां भगवान नौ दिनों तक विराजमान रहेंगे। 50 हजार श्रद्धालुओं के लिए महाप्रसाद की व्यवस्था की गई। इसके अलवा मंदिर के सेवादारों ने बताया कि ठाकुर जी को भोग लगाने के लिए कोलकाता से माटी के बर्तन मंगाए गए हैं। यात्रा मार्ग पर सुरक्षा, चिकित्सा, पेयजल, जल छिड़काव और निःशुल्क अन्न प्रसाद की व्यापक व्यवस्था की गई थी। ओडिशा के सांस्कृतिक दलों ने घोड़ा नाच, बाघ नाच और पाइका युद्ध नृत्य की प्रस्तुति देकर श्रद्धालुओं का उत्साह बढ़ाया।
सेवा, विनम्रता और समानता का प्रतीक है रथयात्रा : उपराज्यपाल
वहीं, हौज खास स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर में आयोजित 48वीं वार्षिक रथ यात्रा का भी शुभारंभ दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने किया। उन्होंने कहा कि रथ यात्रा केवल धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि सेवा, विनम्रता और समानता जैसे भारतीय जीवन मूल्यों का जीवंत प्रतीक है। मंदिर प्रबंधन के अनुसार 27 जुलाई तक 11 दिवसीय रथ यात्रा महोत्सव आयोजित होगा। 20 जुलाई को हेरा पंचमी, 24 जुलाई को बहुदा यात्रा, 25 जुलाई को सुना बेशा, 26 जुलाई को अधरा पाना और 27 जुलाई को नीलाद्री बीजे जैसे प्रमुख धार्मिक आयोजन होंगे। हौज खास और त्यागराज नगर के मंदिरों में प्रतिदिन शाम भजन-कीर्तन, ओडिशी नृत्य और सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे।
11 हजार किलो आम का प्रसाद वितरित किया
नई दिल्ली। इस्कॉन द्वारका द्वारा आयोजित रथ यात्रा में भगवान को 108 प्रकार के आम से सजाकर 11,000 किलो आम का भोग अर्पित किया गया, जिसे बाद में प्रसाद के रूप में श्रद्धालुओं में वितरित किया गया। रथ यात्रा द्वारका के विभिन्न सेक्टरों और प्रमुख मार्गों से होकर निकली, जहां बड़ी संख्या में लोगों ने भगवान के दर्शन किए। यात्रा का सीधा प्रसारण इस्कॉन द्वारका के यूट्यूब चैनल पर भी किया गया, जिससे दूर-दराज के श्रद्धालु भी इस आयोजन से जुड़ सके।