103 मिनट का होगा सदी का सबसे लंबा चंद्रग्रहण, इससे पहले 2011 हुआ था ऐसा
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पंडित ओमकार नाथ मिश्र के अनुसार, संवत 2075 आषाढ़ सुदी, पूर्णिमा, शुक्रवार को यह चंद्रग्रहण उत्तरा आषाढ़, श्रवण नक्षत्र एवं मकर राशि मंडल पर मान्य है। हिंदू धर्म के मतानुसार चंद्रग्रहण का प्रभाव शुभ नहीं माना जाता। जिन नक्षत्र और राशि वाले जातकों के लिए ग्रहण दर्शन वर्जित है। इस दिन इष्ट देव की आराधना, गुरु मंत्र जप एवं धार्मिक ग्रंथ का पठन और मनन करना चाहिए।
2011 में लगा था पहला चंद्र ग्रहण
27 जुलाई को आषाढ़ मास की पूर्णिमा की रात है। इसी दिन खग्रास चंद्रग्रहण होगा। इस चंद्रग्रहण का यम नियम सूतक लगभग 103 मिनट तक होगा। चंद्रग्रहण का सूतक दिन में 2:55 बजे से होगा। ग्रहण का स्पर्श रात में 11:55 बजे और शुद्धि काल रात 3:41 बजे होगा। इसे भारत के भू-भाग सहित दक्षिण अमेरिका, अफ्रीका, पश्चिम एशिया, आस्ट्रेलिया और यूरोप में देखा जा सकेगा।
पंडित ओमकार ने बताया कि गोचर में मकर राशि के केतु और चंद्रमा की प्रधानता रहेगी। राहु से समसप्तक दृष्टि संबंध रहेगा। जो अशुभता का प्रतीक माना जाता है। इसी कारण बहुत सारी प्राकृतिक आपदाओं से सामना करना पड़ सकता है। पृथ्वी की परछाई के बीच से होते हुए चंद्रमा के सीधे गुजरने से यह इतना लंबा वक्त लेगा। इस कालावधि तक सूर्य से उच्चतम दूरी होने के कारण धरती की परछाई का विस्तार बड़ा हो जाएगा। 15 जून 2011 के बाद यह पहला केंद्रीय चंद्रग्रहण होगा। इस साल का पहला चंद्रग्रहण जनवरी में आया था। अब यह दूसरा पूर्ण चंद्रग्रहण होगा।