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'आप' को राहत: सत्येंद्र जैन को कोर्ट से मिली जमानत, दिल्ली जल बोर्ड घोटाले में एसीबी ने किया था गिरफ्तार

Thu, 03 Sep 2026 02:34 PM IST
अनुज कुमार अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: अनुज कुमार Updated Thu, 03 Sep 2026 02:34 PM IST
सार

दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट से पूर्व दिल्ली मंत्री सत्येंद्र जैन को बड़ी राहत मिली है। डीजेबी एसटीपी टेंडर घोटाला मामले में जमानत मिल गई है।

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AAP leader Satyendar Jain granted bail in DJB STP tender scam case
सत्येंद्र जैन - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राउज एवेन्यू कोर्ट ने पूर्व दिल्ली मंत्री सत्येंद्र जैन को डीजेबी एसटीपी टेंडर घोटाला मामले में जमानत दे दी है। उन्हें भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) ने इसी मामले में गिरफ्तार किए था। सत्येंद्र जैन को दो लाख रुपये के जमानत बॉन्ड और इतनी ही राशि के दो मुचलके पर जमानत मिली है।
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जैन को एसीबी की टीम ने किया था गिरफ्तार
दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के टेंडर में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के मामले में एंटी करप्शन ब्रांच (एसीबी) ने बीती 18 अगस्त को पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन समेत छह आरोपियों को गिरफ्तार किया था। इनमें तत्कालीन डीजेबी सीईओ और आईएएस अधिकारी उदित प्रकाश राय, बोर्ड के पूर्व संविदा सलाहकार अंकित श्रीवास्तव, एएन एंटरप्राइजेज के प्रोपराइटर नागेंद्र यादव, यूरोटेक एनवायरमेंट प्राइवेट लिमिटेड के मालिक राजा कुमार कुर्रा और सृजनहार के प्रोपराइटर पंकज वर्मा शामिल थे।

 

एसीबी प्रमुख ने बताई थी कैसे हुई थी हेराफेरी
एसीबी के प्रमुख सयुंक्त पुलिस आयुक्त विक्रमजीत सिंह ने बताया था कि मामला एसटीपी के उन्नयन और क्षमता बढ़ाने के लिए जारी टेंडरों में बड़े पैमाने पर अनियमितता, टेंडर शर्तों में हेरफेर और आपराधिक साजिश से जुड़ा था। जांच में सामने आया था कि टेंडर में ऐसी तकनीकी शर्तें शामिल की गईं, जिनसे एक खास तकनीक और उसके प्रदाता यूरोटेक को तौर पर फायदा हुआ। इससे प्रतिस्पर्धा सीमित हुई और सरकारी खजाने पर वित्तीय बोझ पड़ा। एसीबी ने इस मामले में 11 मई 2024 को एफआईआर दर्ज की थी। इसमें भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के साथ धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और आपराधिक साजिश की धाराएं लगाई गई हैं। एजेंसी का दावा है कि मामले में पैसों के पूरे लेन-देन और अपराध से अर्जित रकम की जांच जारी है।

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ई-मेल और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों से खुला खेल
जांच एजेंसी का दावा था कि निजी पक्षों और सरकारी अधिकारियों के बीच लगातार संपर्क था। इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के विश्लेषण में प्रतिबंधात्मक टेंडर शर्तों, कॉरिजेंडम और अन्य दस्तावेजों के आदान-प्रदान की बात सामने आई थी। एसीबी के अनुसार, बाद में इन्हीं में से कुछ शर्तों को डीजेबी के एसटीपी टेंडर में शामिल किया गया।
 

तत्कालीन सीईओ के खातें में पहुंचाई गई रिश्वत की रकम
एसीबी ने दावा किया कि तत्कालीन डीजेबी सीईओ उदित प्रकाश राय और उनके रिश्तेदारों के बैंक खातों में एएन एंटरप्राइजेज के जरिये करीब 1.52 करोड़ रुपये पहुंचे। जांच में इस रकम को रिश्वत बताया गया है। एजेंसी के मुताबिक, इस रकम का इस्तेमाल अचल संपत्ति खरीदने में किया गया। एएन एंटरप्राइजेज के खाते में यह रकम यूरोटेक से जुड़ी संस्थाओं के जरिये पहुंचने की बात भी जांच में सामने आई है।

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