फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   lok sabha elctions 2019 Kejriwal strategy behind not get Congress-AAP alliance in delhi

केजरीवाल की यह रणनीति दिल्ली में नहीं होने दे रही 'कांग्रेस-आप' का गठबंधन

Fri, 12 Apr 2019 07:18 PM IST
Vikas Kumar अमर उजाला, डिजिटल ब्यूरो
अमर उजाला, डिजिटल ब्यूरो Published by: Vikas Kumar Updated Fri, 12 Apr 2019 07:18 PM IST
विज्ञापन
lok sabha elctions 2019 Kejriwal strategy behind not get Congress-AAP alliance in delhi
sheila dixit- arvind kejriwal - फोटो : social media

दिल्ली में गठबंधन के लिए कांग्रेस राजी है तो आम आदमी पार्टी को भी कोई ऐतराज नहीं है। दोनों पार्टियां इससे वाकिफ हैं कि वे दिल्ली में अकेले अपने दम पर भाजपा को पराजित नहीं कर सकती। भाजपा को हराने के लिए दोनों को मिलना होगा। इसके बावजूद गठबंधन नहीं हो पा रहा। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह है अरविंद केजरीवाल की एक खास रणनीति है। केजरीवाल चाहते हैं कि इस साल हरियाणा में होने वाले विधानसभा चुनाव में वे अपनी बड़ी उपस्थिति दर्ज कराएं। चूंकि कांग्रेस पार्टी का कॉडर वहां पर मजबूत स्थिति में है, इसलिए आप की मंशा है कि लोकसभा में कांग्रेस के साथ गठबंधन हो। इसमें आप का दोहरा फायदा है, अगर लोकसभा में गठबंधन को कामयाबी मिली तो आप विस चुनाव भी साथ मिलकर लड़ने का दबाव बनाएगी। हार मिलती है तो भी उससे आप को फायदा होगा। 

विज्ञापन


बता दें कि आम आदमी पार्टी ने 2014 के लोकसभा चुनाव में चार सौ से ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ा था। नतीजा, आप को पंजाब में चार सीटें मिल गई। उस समय भी केजरीवाल की मंशा थी कि ज्यादा सीटें भले ही न आएं, लेकिन राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा मिलने के लिए जितने वोट जरुरी हैं, उतने ही मिल जाएं। इस बार भी केजरीवाल कुछ वैसा ही चाहते हैं। हालांकि हरियाणा को लेकर उनकी मुख्य रणनीति विधानसभा चुनाव है। हरियाणा में चार-पांच माह बाद विधानसभा चुनाव होने हैं। केजरीवाल चाहते हैं कि वहां पर भी उन्हें दिल्ली की तर्ज पर सफलता मिल जाए। अगर कांग्रेस पार्टी हरियाणा में आप के साथ मिलकर चुनाव लड़ती है तो उसका फायदा आप को होना तय है। वजह, प्रदेश में अभी आम आदमी पार्टी अपना जनाधार तलाश रही है, जबकि कांग्रेस के पास वहां एक मजबूत जमीन है। 
विज्ञापन


कांग्रेस पार्टी के नेता मानते हैं कि लोकसभा चुनाव में (गठबंधन होने की स्थिति में) यदि आप को कोई सीट नहीं मिलती है तो भी उसे एक राजनीतिक जमीन मिल ही जाएगी। प्रदेश में 90 विस सीट हैं, जबकि लोकसभा की दस सीटें हैं। आप यदि वहां तीन सीटों पर चुनाव लड़े तो वह कम से कम 30 से ज्यादा विधानसभा सीटों पर खुद को खड़ा कर लेगी। आप की यह रणनीति विस चुनाव में उसे फायदा पहुंचाएगी। दूसरा, लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के साथ उसे सफलता मिल गई तो वह विस चुनाव के लिए कांग्रेस पर दबाव डालेगी। कांग्रेस पार्टी को यह बात समझ आ गई है, इसलिए उसने दिल्ली से बाहर आप के साथ गठबंधन नहीं किया। कुछ ऐसा ही पंजाब में है। वहां तो कैप्टन अमरेंद्र सिंह ने साफतौर पर कह दिया था कि आप के साथ कोई गठबंधन नहीं होगा। वे जानते हैं कि हरियाणा-पंजाब में आप के साथ गठबंधन का मतलब विस चुनाव में एक और राजनीतिक प्रतिद्वंदी तैयार करना है।
विज्ञापन
विज्ञापन


दिल्ली में तो आज भी तैयार हैं कांग्रेस, मगर हरियाणा-पंजाब से तौबा
कांग्रेस के दिल्ली मामलों के पार्टी प्रभारी पीसी चाको बड़े ही साफ शब्दों में कहते हैं कि दिल्ली तक तो गठबंधन चलेगा, मगर इससे बाहर नहीं। हरियाणा या पंजाब में तो बिल्कुल नहीं। केजरीवाल जिद कर रहे हैं कि हरियाणा में भी गठबंधन करो। दिल्ली में कांग्रेस पार्टी आज भी गठबंधन के लिए तैयार है। पिछले एमसीडी चुनाव में आप को 26 फीसदी वोट मिले थे, इसलिए वे चार लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़े। कांग्रेस का वोट शेयर 21 प्रतिशत था तो उस वजह से तीन लोकसभा सीटों पर हमारा हक बनता है। पीसी चाको कहते हैं कि पार्टी एक-दो दिन में दिल्ली की सभी लोकसभा सीटों पर अपने उम्मीदवारों का ऐलान कर देगी।आप को अगर दिल्ली में गठबंधन करना है तो कांग्रेस पार्टी आज भी तैयार है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed