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सत्ता संग्राम: साफ छवि वाले हों उम्मीदवार, अमर उजाला से खास बातचीत में बोलीं कामकाजी युवतियां
Thu, 25 Apr 2019 03:29 PM IST
Trainee Trainee
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फरीदाबाद
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Published by: Trainee Trainee
Updated Thu, 25 Apr 2019 03:29 PM IST
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कामकाजी महिलाओं के साथ अमर उजाला की खास बातचीत
- फोटो : अमर उजाला
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चुनाव में शामिल होने वाले नेता साफ छवि के हों, तभी जनता का विश्वास हासिल कर सकेंगे। महिलाएं-बूढ़े बच्चे सभी खराब छवि के व्यक्ति से बचना चाह रहे हैं। ऐसे लोग जो सही-गलत के आरोप में घिरे रहें, वह देश का छवि निर्माण नहीं कर सकेंगे।
पुरुष प्रधान रिवायतों से ऊपर उठकर अपनी पहचान बना चुकी यह महिलाएं चुनाव को कुछ इन्हीं नजरों से देख रही हैं। नेताओं की घोषणाओं में तर्क ढूंढते हुए कहती हैं कि वादे नहीं, योजनाएं पेश कर चुनाव में आधार बनाया जा सकता है। ताकि प्रत्याशी खुद को बेहतर, समझदार और अपडेट साबित कर सके।
वादों और घोषणाओँ के दौर से परे यह तर्क देने का दौर है। इसी आधार पर प्रत्याशी वोट बैंक हासिल कर सकेगा। चुनावी चर्चा में शामिल यह महिलाएं शिक्षण संस्थान, जन संचार और सामाजिक क्षेत्रों से जुड़ी हुई हैं। कहती हैं कि नवयुवतियों को वह जिम्मेदारी उठानी होगी जो उनकी मां-दादी व अन्य पूर्वजों ने उठाई है। इसमें देश को जोड़ने, परिवार और युवाओं को सकारात्मक दिशा की ओर प्रेरित करना शामिल है।
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बोलीं युवतियां
देश में चुनाव कुछ मापदंडों के मुताबिक होते हैं, लेकिन फिर भी आपराधिक, भ्रष्ट, निजी हित को बढ़ावा देने वाले व्यक्ति भी आसानी से
संसद बन जाते हैं। कुछ मानदंड निर्धारित कर चुनावी प्रक्रिया को लोक हित के मापदंडों पर खरा होना चाहिए। ताकि प्रत्याशी और चुना हुआ नेता दोनों ही साफ छवि वाले हों। एक ऐसी ही प्रत्याशी मेरा संसदीय उम्मीदवार होगा। - हर्षिता मेहंदीरत्ता
चुनाव को कुछ युवा गंभीरता से नहीं ले रहे हैं या यूं कहें कि उसका महत्व ही नहीं जानते। सोशल मीडिया के इस दौर ने युवाओं को उनके वास्तविक मुद्दों से भटका दिया है। यही कारण है कि हम सौ फीसदी मतदान की उम्मीदों को पूरा नहीं कर पा रहे हैं। वोट डालना हमारा संवैधानिक कर्तव्य है। लोकतंत्र का यही आधार हर पांच साल में हमें एक नए बदलाव और बेहतर विकल्प के लिए प्रेरित करता है। मुझे मतदाताओं से उम्मीद है। अच्छी-बुरी सरकार का आधार हमारा विवेक है। - रक्षिता साहिर
चुनाव लोकतंत्र की ताकत का प्रदर्शन है। मैं यह नहीं सोचती कि मतदान से हालात में बदलाव नहीं होगा। मेरा मानना है कि पार्टी के संप्रदाय के बजाय कार्य के आधार पर वोट दें। नेताओं को विकास, सुविधा मुद्दे मतदान के आधार लगने चाहिए। हमारे पास विकल्प है कि मतदान के वक्त यह ध्यान रखें कि मतदान क्यों कर रहे हैं, इससे क्या बदलाव, क्या लक्ष्य हम हासिल कर सकते हैं। इसी आधार पर पार्टी या नेता का चुनाव करूंगी। - शिवानी वैद
मेरे लिए चुनाव में विकास सबसे बड़ा मुद्दा है। यह विकास सिर्फ मेरा या मेरे इलाके का नहीं बल्कि देश का होना चाहिए। मध्यम वर्गीय परिवारों को सभी जरूरी जन सुविधाएं मिलनी चाहिएं। चुनाव बदलाव लाता है. चाहूंगी कि इस बार का चुनाव ऐसा ही हो जो मध्यमवर्गीय परिवार के लिए जादू की छड़ी हो जाए। - याशिका हसीजा
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पुरुष प्रधान रिवायतों से ऊपर उठकर अपनी पहचान बना चुकी यह महिलाएं चुनाव को कुछ इन्हीं नजरों से देख रही हैं। नेताओं की घोषणाओं में तर्क ढूंढते हुए कहती हैं कि वादे नहीं, योजनाएं पेश कर चुनाव में आधार बनाया जा सकता है। ताकि प्रत्याशी खुद को बेहतर, समझदार और अपडेट साबित कर सके।
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वादों और घोषणाओँ के दौर से परे यह तर्क देने का दौर है। इसी आधार पर प्रत्याशी वोट बैंक हासिल कर सकेगा। चुनावी चर्चा में शामिल यह महिलाएं शिक्षण संस्थान, जन संचार और सामाजिक क्षेत्रों से जुड़ी हुई हैं। कहती हैं कि नवयुवतियों को वह जिम्मेदारी उठानी होगी जो उनकी मां-दादी व अन्य पूर्वजों ने उठाई है। इसमें देश को जोड़ने, परिवार और युवाओं को सकारात्मक दिशा की ओर प्रेरित करना शामिल है।
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बोलीं युवतियां
देश में चुनाव कुछ मापदंडों के मुताबिक होते हैं, लेकिन फिर भी आपराधिक, भ्रष्ट, निजी हित को बढ़ावा देने वाले व्यक्ति भी आसानी से
संसद बन जाते हैं। कुछ मानदंड निर्धारित कर चुनावी प्रक्रिया को लोक हित के मापदंडों पर खरा होना चाहिए। ताकि प्रत्याशी और चुना हुआ नेता दोनों ही साफ छवि वाले हों। एक ऐसी ही प्रत्याशी मेरा संसदीय उम्मीदवार होगा। - हर्षिता मेहंदीरत्ता
चुनाव को कुछ युवा गंभीरता से नहीं ले रहे हैं या यूं कहें कि उसका महत्व ही नहीं जानते। सोशल मीडिया के इस दौर ने युवाओं को उनके वास्तविक मुद्दों से भटका दिया है। यही कारण है कि हम सौ फीसदी मतदान की उम्मीदों को पूरा नहीं कर पा रहे हैं। वोट डालना हमारा संवैधानिक कर्तव्य है। लोकतंत्र का यही आधार हर पांच साल में हमें एक नए बदलाव और बेहतर विकल्प के लिए प्रेरित करता है। मुझे मतदाताओं से उम्मीद है। अच्छी-बुरी सरकार का आधार हमारा विवेक है। - रक्षिता साहिर
चुनाव लोकतंत्र की ताकत का प्रदर्शन है। मैं यह नहीं सोचती कि मतदान से हालात में बदलाव नहीं होगा। मेरा मानना है कि पार्टी के संप्रदाय के बजाय कार्य के आधार पर वोट दें। नेताओं को विकास, सुविधा मुद्दे मतदान के आधार लगने चाहिए। हमारे पास विकल्प है कि मतदान के वक्त यह ध्यान रखें कि मतदान क्यों कर रहे हैं, इससे क्या बदलाव, क्या लक्ष्य हम हासिल कर सकते हैं। इसी आधार पर पार्टी या नेता का चुनाव करूंगी। - शिवानी वैद
मेरे लिए चुनाव में विकास सबसे बड़ा मुद्दा है। यह विकास सिर्फ मेरा या मेरे इलाके का नहीं बल्कि देश का होना चाहिए। मध्यम वर्गीय परिवारों को सभी जरूरी जन सुविधाएं मिलनी चाहिएं। चुनाव बदलाव लाता है. चाहूंगी कि इस बार का चुनाव ऐसा ही हो जो मध्यमवर्गीय परिवार के लिए जादू की छड़ी हो जाए। - याशिका हसीजा