नितीश कटारा केस में 3 दोषियों को उम्रकैद
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नितीश कटारा हत्याकांड में आजीवन कारावास की सजा काट रहे विकास यादव, विशाल यादव व सुखदेव पहलवान की अपील पर हाईकोर्ट ने फैसला सुना दिया है।
हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए तीनों दोषियों को उम्रकैद की सजा दी है। इन तीनों ने निचली अदालत द्वारा दी गई आजीवन कारावास की सजा को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
मृतक नितीश कटारा की मां ने भी हाईकोर्ट में उनकी सजा फांसी में तब्दील करने की याचिका दायर की थी।
कई बार टल चुका था फैसला
न्यायमूर्ति गीता मित्तल व न्यायमूर्ति जेआर मिढ्ढा की खंडपीठ ने बचाव पक्ष व अभियोजन पक्ष के तर्क सुनने के बाद 16 अप्रैल 2013 को फैसला सुरक्षित रख लिया था। इसके बाद कई अन्य आवेदन दायर होने के कारण फैसला टलता रहा।
दोषी विशाल के अधिवक्ता राम जेठमलानी ने कहा था कि पुलिस ने उनके मुवक्किल को फर्जी मामले में फंसाया है। उन्होंने बताया कि पुलिस ने पहले आरोपपत्र में एक शख्स को गवाह बनाया था, लेकिन ट्रायल के दौरान उसको पेश नहीं किया गया।
विकास ने भी खुद को फर्जी मामले में फंसाने का आरोप लगाते हुए पुलिस की ओर से पेश बतौर गवाह अजय कटारा की विश्वसनीयता पर सवाल उठाया था।
नितीश की मां ने की थी फांसी देने की अपील
मृतक की मां नीलम कटारा ने भी अपराधियों की सजा बढ़ाए जाने के लिए याचिका दायर की थी। वह अपराधियों को मौत की सजा दिए जाने की मांग कर रही हैं। गवाहों व साक्ष्यों के बयानों से स्पष्ट है कि नितीश को अंतिम बार अभियुक्तों के साथ देखा गया था।
अभियुक्त की बहन ने ही रात को सूचना दी थी कि नितीश की जान को खतरा है। उन्होंने कहा कि इस आधार पर आरोपी मृत्युदंड की सजा का हकदार है।
निचली अदालत ने इस मामले में विकास व विशाल को 30 मई 2008 को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। जबकि पहलवान को निचली अदालत ने 12 जुलाई 2011 को सजा सुनाई।
फरवरी 2002 में हुई थी हत्या
16 फरवरी 2002 को हुए इस हत्याकांड के बाद पुलिस ने विकास व विशाल को गिरफ्तार कर लिया था जबकि सुखदेव पहलवान फरार हो गया था। अदालत ने उसे भगोड़ा घोषित कर दिया था।
अक्तूबर 2005 में पहलवान को भारत-नेपाल सीमा के गांव से गिरफ्तार कर लिया गया था। जनवरी 2006 में उसके खिलाफ अलग से आरोपपत्र दायर किया गया।
विकास और विशाल ने गाजियाबाद में एक शादी समारोह से नितीश को अगवा कर 17 फरवरी, 2002 की रात उसकी हत्या कर दी थी।