उम्रकैद की सजा काट रहे कैदी की मौत, पोस्टमार्टम के दौरान पेट में जो मिला उसे देख हैरान रह गए डॉक्टर
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लूट के दौरान हत्या करने के मामले में उम्रकैद काट रहे कैदी अखिलेश उर्फ मिथुन की मंगलवार देर शाम भोंडसी जेल में मौत हो गई। तबीयत खराब होने पर जेल प्रशासन उसे लेकर नागरिक अस्पताल पहुंचा था, जहां जांच के बाद चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। बुधवार को ड्यूटी मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में मेडिकल बोर्ड से उसका पोस्टमार्टम हुआ।
पोस्टमार्टम के दौरान अखिलेश के पेट से नशीले पदार्थ के 18 कैप्सूल बरामद हुए है। जिसमें कुछ फटे हुए हैं। शव का बिसरा लेकर जांच के लिए लैब भेज दिया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने पर ही मौत के असली कारणों का खुलासा होगा। फिलहाल मौत के कारणों को नशे की ओवरडोज माना जा रहा है। कैदी की हुई मौत से जेल प्रशासन एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गया है। मामले में फिलहाल 176 सीआरपीसी की कार्रवाई की गई है।
पुलिस के अनुसार मूल रूप से दरबारीपुर निवासी अखिलेश उर्फ मिथुन ने खेड़कीदौला थाना क्षेत्र में 28 जुलाई 2012 को अपने साथियों संग लूट की वारदात को अंजाम देते हुए एक व्यक्ति की हत्या कर दी थी। इस मामले में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश शेखर धवन की अदालत ने 3 सितंबर 2013 को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। जेल में रहते हुए उसका अस्थमा का इलाज चल रहा था। मंगलवार दोपहर को उसकी तबीयत बेहद खराब हो गई।
पेट में मिला नशीला पदार्थ
जेल चिकित्सकों ने उसकी हालत को देखते हुए उसे आपातकालीन गारद के साथ सिविल लाइन स्थित नागरिक अस्पताल भेज दिया था। जहां चिकित्सकों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। शाम करीब 5 बजे इसकी सूचना नागरिक अस्पताल से जेल प्रशासन को दी गई। जेल प्रशासन ने इसकी सूचना रात करीब 8 बजे परिजनों को दी। पुलिस ने शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
बुधवार को ड्यूटी मजिस्ट्रेट जेएमआईसी मनीष कुमार की मौजूदगी में मेडिकल बोर्ड ने अखिलेश के शव का पोस्टमार्टम किया। फॉरेंसिक एक्सपर्ट डॉ. दीपक माथुर ने बताया कि शव का बिसरा जांच के लिए भेज दिया है। मृतक के पेट से पॉलिथीन के बने कैप्सूल बरामद हुए हैं, जिसमें भूरे रंग का पदार्थ है। जो देखने में नशीला पदार्थ लग रहा है। लैब से जांच रिपोर्ट आने के बाद ही इसका खुलासा हो सकेगा।
तीन घंटे बाद दी जानकारी
मृतक अखिलेश के परिजनों ने बताया कि चिकित्सकों ने उसे शाम 5 बजे मृत घोषित कर दिया था। ऐसे में तुरंत ही जेल प्रशासन को इसकी जानकारी मिल गई थी। पुलिस ने परिजनों को जानकारी पहुंचाने में 3 घंटे का समय लगाया है। ऐसे में उन्हें पुलिस की कार्यशैली पर शक हो रहा है। मृतक की दो दिन पहले ही अपने परिजनों से बात हुई। ऐसे में वह देखने से भी बीमार नहीं लग रहा था जबकि पुलिस ने उसे अस्थमा की दिक्कत होने की बात कहकर अस्पताल भेजा था।
जेल में कैदी की मौत होने की सूचना मिली थी। शव का पोस्टमार्टम करवाकर परिजनों को सौंप दिया है। इस मामले में परिजनों ने कोई शिकायत नहीं दी है। चूंकि अखिलेश की कस्टडी में मौत हुई है इसलिए सीआरपीसी 176 की कार्रवाई की जा रही है। - उमेश, थाना प्रभारी, भोंडसी