एलजी-केजरी फिर आमने-सामने, 2000 के जुर्माने पर विवाद
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दिल्ली सरकार और राजनिवास फिर आमने-सामने हो गए हैं। अबकी बार मामला समर्पित बस लेन बनाए जाने और उसमें बाधा उत्पन्न करने वाले पर 2000 रुपये का जुर्माना लगाए जाने के प्रस्ताव का है। इस मामले में दिल्ली सरकार और राजनिवास ने अपनी-अपनी स्थिति स्पष्ट की है।
दिल्ली सरकार ने बयान जारी कर कहा कि जनता को खेद के साथ सूचित कर रहे हैं कि उपराज्यपाल ने समर्पित बस लेन और उसमें अवरोध पर दो हजार रुपये जुर्माने के प्रस्ताव को गिरा दिया है।
वहीं राजनिवास ने स्पष्टीकरण जारी करके कहा कि उपराज्यपाल ने प्रस्ताव न तो गिराया है और न ही अस्वीकार किया है। दिल्ली सरकार ने जारी बयान में कहा गया है कि ट्रैफिक पुलिस की मांग और उच्चतम न्यायालय के आदेशों के आधार पर यह प्रस्ताव उपराज्यपाल को भेजा गया था।
उपराज्यपाल ने न तो प्रस्ताव गिराया है और न ही मना किया है
प्रस्ताव में कहा गया था कि समर्पित बस लेन बनाई जाएगी जिसमें बस का चलना अनिवार्य होगा और उसमें अवरोध पैदा करने वाले पर दो हजार रुपये का जुर्माना किया जाएगा।
सरकार ने जारी बयान में लिखा है, दुर्भाग्य की बात है कि प्रस्ताव को उपराज्यपाल ने यह कहकर गिरा दिया कि यह अस्पष्ट है। उधर, राजनिवास से जारी बयान में कहा गया है कि उपराज्यपाल ने न तो प्रस्ताव गिराया है और न ही मना किया है।
बल्कि सरकार से यह स्पष्टीकरण मांगा है कि परिवहन आयुक्त की तरफ से सुझाए जाने पर भी पीडब्ल्यूडी से सलाह क्यों नहीं ली गई। सलाह लेकर जितनी जल्दी हो सके फिर से प्रस्ताव जमा कराएं ताकि उच्चतम न्यायालय के आदेश का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित हो सके।