पानी की तलाश में अाबादी की ओर अा रहे तेंदुए, दहशत में लोग
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अरावली के जंगलों में पानी का माकूल बंदोबस्त नहीं है। गर्मी के साथ ही तेंदुए समेत अन्य जंगली जानवरों को प्यास सताने लगी है। पानी की तलाश में वे आबादी के बीच आ रहे हैं।
पिछले दिनों मांगर में दिखे तेंदुए और उसके पद चिह्न के बाद वन विभाग की रिपोर्ट में भी तेंदुए के आने की वजह पानी की तलाश बताई गई है। सैकड़ों एकड़ जमीन में फैले अरावली मेें पानी मुहैया कराना वन विभाग के लिए एक चुनौती है।
दरअसल, अरावली में गिरते जल स्तर के कारण अब जानवरों के लिए पीने के पानी का इंतजाम नहीं है। गर्मी के दिनों में पानी नहीं मिलने की वजह से जानवरों को दिक्कत होने लगी है।
कम बारिश बन रही मुसीबत
राजस्थान और दिल्ली के वन्य जीव आरक्षित क्षेत्र से पानी की तलाश में अरावली के दूसरी छोर पर आबादी के बीच पहुंचने लगे हैं। जिसके कारण लोगों में दहशत है। पर्यावरणविद् के मुताबिक, अरावली के एक हिस्से में बाघों के लिए आरक्षित सरिस्का (राजस्थान) का क्षेत्र लगता है। खाना और पानी के तलाश में अरावली की वादियों में पहुंच जाते हैं।
128 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय करते हुए तेंदुए और अन्य जंगली जानवर अरावली की सबसे घने जंगल पार करने से भी गुरेज नहीं करते।वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, अरावली क्षेत्र में कम बारिश हो रही है। जिसकी वजह से सर्दी और फिर गर्मी में इस क्षेत्र में पानी की कमी होती जा रही है।
रेतीली मिट्टी होने की वजह से यह पानी जल्दी सोख लेती है। मांगर-बनी से आगे खनन की वजह से बड़े-बड़े गड्ढे हैं, जो अब झील के रूप में तब्दील हो चुकी है। यह अब पानी के स्रोत बन गए हैं। इस वजह से जंगली जानवर यहां पहुंच रहे हैं।