दिल्ली सरकार पर नियुक्तियों में साढ़े 10 करोड़ के घोटाले का आरोप
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इस घोटाले में दिल्ली सरकार के शीर्ष स्तर पर बैठे पदाधिकारी शामिल हैं। उन्होंने इस घोटाले की स्वतंत्र जांच एजेंसी से जांच कराने की मांग की। विजेंद्र गुप्ता ने बुधवार को जारी बयान में कहा कि दिल्ली सरकार के उच्च पदाधिकारियों ने तीन चहेती सुरक्षा एजेंसियों को सुरक्षा का काम भारत सरकार के वित्तीय नियमों को ताक पर रखते हुए सौंपा है।
इतना ही नहीं, यह काम सौंपने में केंद्रीय सतर्कता आयोग के दिशा-निर्देशों, निर्धारित टेंडर प्रक्रिया आदि जैसे मूलभूत वित्त औपचारिकताओं का भी उल्लंघन हुआ है। संबंधित विभाग की मेन पावर की आवश्यकता का भी अध्ययन नहीं किया गया और सारे काम में होने वाले खर्च का अनुमान भी नहीं लगाया गया।
'यह निर्धारित प्रक्रियाओं का घोर उल्लंघन है'
उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग ने मेन पावर की आवश्यकता और खर्चे के अनुमान लगाने का काम स्वयं न करके संबंधित सुरक्षा एजेंसियों को सौंप दिया। उन्होंने जो भी अनुमान दिए, वे विभाग ने आंख मूंदकर स्वीकार कर लिए हैं। यह निर्धारित प्रक्रियाओं का घोर उल्लंघन है।
दिल्ली सरकार ने सुरक्षा एजेंसियों को नियुक्त करने के लिए एक मॉडल टेंडर की प्रक्रिया स्वीकृत कर रखी है। अभी तक इसे स्टैंडर्ड मॉडल मानकर काम किया जाता रहा था, परंतु मामले में ऐसा नहीं किया गया। इसमें ऐसे पद सृजित कर दिए गए हैं, जो इसमें स्वीकृत नहीं थे।