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विधि आयोग के सुझावों के खिलाफ देश भर के वकील 31 मार्च को करेंगे हड़ताल
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Tue, 28 Mar 2017 09:36 AM IST
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बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) अधिवक्ता अधिनियम में संशोधन के लिये विधि आयोग की सिफारिशों के विरोध में खड़ी हो गई है। आयोग ने वकीलों पर अंकुश लगाने के लिये अधिनियम में संशोधन के लिये सिफारिशें भेजी हैं। आयोग की इन सिफारिशों का विरोध बीसीआई कर रही है।
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बीसीआई का कहना है कि इन संशोधनों को अगर कानून में शामिल किया गया तो इससे काउंसिल की स्वायत्ता समाप्त हो जायेगी। इन संशोधनों का वकीलों के पेशे पर बेहद बुरा प्रभाव पड़ेगा। हालांकि बीसीआई ऐसी सिफारिशें करने के लिये 23 मार्च को दिल्ली एनसीआर के वकीलों का विरोध झेल चुकी है।
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बीसीआई ने इसे काला कानून बताते हुये 31 मार्च को देश व्यापी हड़ताल का आह्वान किया है। इससे पहले कानून व वित्त मंत्री से काउंलिस अधिकारी मुलाकात कर सकते हैं। आगे की रणनीति तय करने के लिये देश भर के बार काउंसिल पदाधिकारियों की आठ अप्रैल को दिल्ली में बैठक होगी। इसके बाद प्रधानमंत्री से मिल कर अपनी बात रखी जायेगी।
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सुप्रीम कोर्ट ने अधिवक्ता महीपाल सिंह राणा के अदालती अवमानना के मामले की सुनवाई करते हुये अधिवक्ता अधिनियम में संशोधन करने के लिये कहा था। इसके बाद विधि आयोग ने बीसीआई से सुझाव मांगे थे और उसने सुझाव दिये थे। अब आयोग ने सुझावों का मसौदा कानून मंत्रालय को भेजा है।
विधि आयोग की सिफारिशों के विरोध में बीसीआई ने प्रेस वार्ता आयोजित कर अपने मत से अवगत करवाया। बीसीआई की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक कानून मंत्रालय को भेजे संशोधनों में अदालती अवमानना पर लाइसेंस रद करना, वकीलों की हड़ताल या सुनवाई पर पेश न होने पर मुव्वकिल के नुकसान की भरपाई करना, राज्य बार काउंसिल में दूसरे क्षेत्रों जैसे मेडिकल, सीए, इंजीनियरिंग, समाज सेवा के लोगों को शामिल करना, बीसीआई के चुनाव के बजाय सुप्रीम कोर्ट के जज, मुख्य सतर्कता आयुक्त, चार्टर्ड एकाउंटेंट ऑफ इंडिया के अपीलीय अधिकारी द्वारा इसके सदस्य मनोनीत किये जायेंगे।
बीसीआई के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा ने कहा कि काउंसिल किसी भी तरह से बाहरी लोगों का इस पेशे में दखल सहन नहीं करेगा। वकीलों पर के खिलाफ शिकायतों की सुनवाई बाहरी लोगों से करवाये जाने के पक्ष में काउंसिल नहीं है। हम खुद वकीलों पर कार्रवाई करते हैं। इस साल 55 वकीलों पर कार्रवाई हो चुकी है। तमिल नाडु में हड़ताल के मामले में 200 वकीलों पर कार्रवाई कर लाइसेंस रद किया गया था।
बीसीआई पदाधिकारियों ने इस मौके पर न्याय पालिका में फैले भ्रष्टïाचार का मुद्द भी उठाया। उन्होंने कहा जज खुद मानते हैं कि देश के 20 फीसदी जज भ्रष्टï हैं। इसके बाद भी सरकार वकीलों की आवाज दबाने की कोशिश कर रही है।