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फर्जी इनवाइस का कारोबार जोरों पर, जानें कैसा होता हैं करोड़ों का खेल
रानू पाठक, अमर उजाला, गाजियाबाद
Updated Tue, 25 Sep 2018 05:18 PM IST
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जीएसटी के बाद लोहा फर्में बड़े स्तर पर फर्जी इनवाइस का खेल कर रही हैं। जमीनी स्तर पर कारोबार नहीं होता, सिर्फ कागजों पर ही करोड़ों रुपये की सेल-परचेज दिखाकर वाणिज्य कर विभाग से आईटीसी क्लेम कर लिया जाता है। यह गोरखधंधा न केवल गाजियाबाद, बल्कि एनसीआर समेत पश्चिमी यूपी के विभिन्न जनपद, आगरा, कानपुर तक फैला हुआ है।
शासन के निर्देश पर विभाग की एसआईबी यूनिट सक्रिय हो गई है। जगह-जगह जांच करके फर्जी फर्मों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा रही है। फर्जी फर्मों ने नए तरीके से टैक्स चोरी करने के रास्ते निकाल लिए हैं। पूरे देश में एक समान कर प्रणाली जीएसटी लागू होने के बाद ऐसी धोखाधड़ी बढ़ गई है। जीएसटी में फर्में ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराती हैं।
रजिस्ट्रेशन कराते वक्त फर्में जो भी एड्रेस प्रूफ देती हैं, वाणिज्य कर विभाग को उससे मानना पड़ता है। विभागीय अधिकारी फर्म का भौतिक सत्यापन नहीं कर सकते हैं। इसी वजह से माफिया बड़ी आसानी से टैक्स चोरी करके विभाग को करोड़ों रुपये की चपत लगाते हैं। विभाग ने अभी तक आठ फर्में पकड़ी हैं, जो फर्जी इनवाइस पर कारोबार करके करोड़ों रुपये कमा रही थीं।
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शासन के निर्देश पर विभाग की एसआईबी यूनिट सक्रिय हो गई है। जगह-जगह जांच करके फर्जी फर्मों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा रही है। फर्जी फर्मों ने नए तरीके से टैक्स चोरी करने के रास्ते निकाल लिए हैं। पूरे देश में एक समान कर प्रणाली जीएसटी लागू होने के बाद ऐसी धोखाधड़ी बढ़ गई है। जीएसटी में फर्में ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराती हैं।
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रजिस्ट्रेशन कराते वक्त फर्में जो भी एड्रेस प्रूफ देती हैं, वाणिज्य कर विभाग को उससे मानना पड़ता है। विभागीय अधिकारी फर्म का भौतिक सत्यापन नहीं कर सकते हैं। इसी वजह से माफिया बड़ी आसानी से टैक्स चोरी करके विभाग को करोड़ों रुपये की चपत लगाते हैं। विभाग ने अभी तक आठ फर्में पकड़ी हैं, जो फर्जी इनवाइस पर कारोबार करके करोड़ों रुपये कमा रही थीं।
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कैसा करते हैं खेल
फर्जीवाड़ा करने वाला पहले जीएसटी के पोर्टल पर फर्जी तरीके से एक फर्म रजिस्टर्ड करता है। उसके बाद वह जो भी डॉक्यूमेंट देता है, उसमें अधिकतर फेक ही होते हैं। रजिस्ट्रेशन के बाद फर्म के नाम पर इनवाइस बिल पर खरीद-फरोख्त की जाती है। जिन व्यापारियों को इन फर्जी इनवाइस की जरूरत पड़ती है, वह दो से चार प्रतिशत की दर देकर टैक्स बचा लेते हैं।
बाद में इन्हीं फर्जी इनवाइस को आधार बनाते हुए विभाग से आईटीसी क्लेम कर लिया जाता है। व्यापारी कागजों में कारोबार करता है। जबकि वास्तविक स्थिति में न तो फर्म होती है और न ही कोई गोदाम।
पकड़ी गईं दो फर्में
वाणिज्य कर विभाग ने फर्जी इनवाइस बिलों पर कारोबार करने वाली दो और फर्में पकड़ी हैं। विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक जीएसटी पोर्टल पर 228 लोहा मंडी के पते पर नारायण ट्रेडिंग कंपनी रजिस्टर्ड है। सूचना के आधार पर जब यहां छापा मारा गया तो मौके पर ऐसी कोई फर्म नहीं थी। फर्म ने कागजों पर ही अप्रैल से अब तक 2.61 करोड़ रुपये लोहे की खरीद-फरोख्त दिखा दी।
संबंधित फर्म ने जो पता दिया था, वहां पर कुछ दुकानें बनी हुई मिलीं। इसी प्रकार इंदिरापुरम स्थित 478 प्रहलाद गढ़ी के एड्रेस पर मन्नत फर्म रजिस्टर्ड है। मौके पर जांच करने पर पता चला कि यहां तीन दुकानें हैं, जिसमें एक ब्यूटी पार्लर, दूसरी मटन चिकन शॉप और तीसरी मुस्ताक कबाड़ी की दुकान हैं। इस फर्म ने 2.37 करोड़ रुपये का कारोबार किया और बाद में आईटीसी क्लेम कर लिया।
बाद में इन्हीं फर्जी इनवाइस को आधार बनाते हुए विभाग से आईटीसी क्लेम कर लिया जाता है। व्यापारी कागजों में कारोबार करता है। जबकि वास्तविक स्थिति में न तो फर्म होती है और न ही कोई गोदाम।
पकड़ी गईं दो फर्में
वाणिज्य कर विभाग ने फर्जी इनवाइस बिलों पर कारोबार करने वाली दो और फर्में पकड़ी हैं। विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक जीएसटी पोर्टल पर 228 लोहा मंडी के पते पर नारायण ट्रेडिंग कंपनी रजिस्टर्ड है। सूचना के आधार पर जब यहां छापा मारा गया तो मौके पर ऐसी कोई फर्म नहीं थी। फर्म ने कागजों पर ही अप्रैल से अब तक 2.61 करोड़ रुपये लोहे की खरीद-फरोख्त दिखा दी।
संबंधित फर्म ने जो पता दिया था, वहां पर कुछ दुकानें बनी हुई मिलीं। इसी प्रकार इंदिरापुरम स्थित 478 प्रहलाद गढ़ी के एड्रेस पर मन्नत फर्म रजिस्टर्ड है। मौके पर जांच करने पर पता चला कि यहां तीन दुकानें हैं, जिसमें एक ब्यूटी पार्लर, दूसरी मटन चिकन शॉप और तीसरी मुस्ताक कबाड़ी की दुकान हैं। इस फर्म ने 2.37 करोड़ रुपये का कारोबार किया और बाद में आईटीसी क्लेम कर लिया।
क्या कहते हैं अधिकारी
फर्जी इनवाइस पर कारोबार धड़ल्ले से हो रहा है। एक रैकेट है, जो पूरे यूपी में फैला है। विभिन्न जनपदों में जांच की जा रही है। गाजियाबाद में लोहे का कारोबार सबसे ज्यादा है। इसलिए यहां गड़बड़ी का अंदेशा भी ज्यादा रहता है। हर खंड के अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वह अपना खुफिया तंत्र विकसित कर ऐसी फर्मों को चिह्नित करें और ठोस कार्रवाई करें।
- यूएस दुबे, एडिशनल कमिश्नर (एसआईबी)
- यूएस दुबे, एडिशनल कमिश्नर (एसआईबी)