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केजरीवाल के खिलाफ हुए कुमार विश्वास के सुर

Sat, 13 Feb 2016 11:11 PM IST
Updated Sat, 13 Feb 2016 11:11 PM IST
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kumar vishwas is indifferent with kejriwal on jnu matter

जेएनयू में देशद्रोह विवाद को लेकर भले ही दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने तल्ख तेवर अपनाते हुए जेएनयू के छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार की गिरफ्तारी पर केंद्र सरकार को चेताया है, लेकिन कुमार विश्वास इसे लेकर काफी मुखर हैं।

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कुमार विश्वास ने इस मामले में कड़े कदम उठाने की मांग की है। विश्वास ने दिल्ली पुलिस को आड़े हाथों लेते हुए ऐसे राष्ट्रविरोधी छात्रों को सलाखों के पीछे करने की मांग की है। इसे लेकर कुमार विश्वास ने फेसबुक पर कठोर बयान वाला पोस्ट किया है।
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बता दें कि केजरीवाल ने जेएनयू के छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया की गिरफ्तारी के बाद ट्विटर पर लिखा कि, 'देश विरोधी ताकतों को कोई समर्थन नहीं देता। लेकिन बेकसूर छात्रों को निशाना बना और उन्हें एक बहाने के तौर पर इस्तेमाल करना मोदी सरकार को महंगा पड़ेगा।'
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पढ़ें क्या लिखा विश्वास ने

kumar vishwas is indifferent with kejriwal on jnu matter

वहीं कुमार विश्वास ने जो पोस्ट किया था वो कुछ ऐसा हैः
'तक्षशिला, जो दुनिया का सबसे बड़ा शैक्षणिक तीर्थ था, वहाँ के स्नातक और आचार्य चाणक्य ने जब देश पर संकट देखा, तो नौकरी छोड़ कर आक्रांता सिकंदर के खिलाफ पूरे देश का जनमानस तैयार करने निकल पड़े थे।'

'और आज की स्थिति यह है कि ज्ञान का पीठ कहे जाने वाले विश्वविद्यालय में कुछ लोग खुलेआम राष्ट्र-विरोधी नारे लगा दें, या हमारे देश में आतंक फैलाने वाले पडोसी देश के समर्थन में नारे लगाएं, और भारत की न्यायिक व्यवस्था, प्रशासन व्यवस्था और बुद्धिजीवी वर्ग शांत रह जाए, ये दुःख और आश्चर्य की बात है।'

'देश की सरकार से और निरंतर झूठे मुकदमों में हम आम लोगों को परेशान करने वाले, शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे बच्चों पर लाठियाँ बरसाने वाले दिल्ली पुलिस से निवेदन है कि इस मामले में भी कानून-सम्मत निश्चित धाराओं के अंतर्गत कार्रवाई करें और ऐसे हर तथाकथित विद्यार्थी को उठा कर सलाखों के पीछे डालें।'

'इसके साथ ही परिसर के सम्बंधित अधिकारियों को भी सवालों के दायरे में लें, कि उनके रहते उनके परिसर में राष्ट्र-विरोधी नारे कैसे लग गए। इस मौके पर एक उदाहरण स्थापित करना आवश्यक है ताकि भविष्य में यह दुहराया न जाए।'

"तोड़ दो हाथ अगर हाथ उठने लगे
छूने पाए ना सीता का दामन कोई" (-कैफ़ी)

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