कृष्णानंद राय हत्याकांडः कैसे बरी हुए डॉन मुख्तार अंसारी व अन्य, फैसला सुनाते वक्त जज ने बताई वजह
दिल्ली की अदालत ने भाजपा के तत्कालीन विधायक कृष्णानंद राय हत्याकांड मामले में उत्तर प्रदेश के बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी सहित सात आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। फैसला सुनाते हुए विशेष जज ने कहा कि यदि अभियोजन पक्ष के गवाह नहीं मुकरते तो मामले का परिणाम अलग ही होता।
यूपी के गाजीपुर में 29 नवंबर, 2005 को मोहम्मदाबाद विधानसभा क्षेत्र के तत्कालीन विधायक कृष्णानंद राय समेत सात लोगों की हत्या कर दी गई थी। कृष्णानंद की पत्नी अलका राय की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केस को 2013 में दिल्ली स्थानांतरित कर दिया था।
राउज एवेन्यू कोर्ट के विशेष जज अरुण भारद्वाज ने साक्ष्यों के अभाव में मुख्तार अंसारी, अफजाल अंसारी, मंसूर अंसारी, एजाज उल हक, राकेश पांडे, रामू मल्लाह, संजीव माहेश्वरी उर्फ जीवा को हत्या व अन्य आरोपों से बरी कर दिया।
कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपियों का गुनाह साबित नहीं कर पाया। ऐसे में सभी आरोपी संदेह का लाभ पाने के हकदार हैं। कोर्ट ने इससे पहले चुन्नू पहलवान व अफरोज चंदा को आरोप मुक्त कर दिया था।
मामले में अन्य आरोपी मुन्ना बजरंगी की जुलाई 2018 में बागपत जेल में हत्या हो गई थी। इसके अलावा एक अन्य आरोपी विश्वास नेपाली को कोर्ट ने भगोड़ा घोषित कर दिया था।
गवाहों को सुरक्षा देने व साक्ष्य जुटाने में नाकाम रहा अभियोजन पक्ष
विशेष जज अरुण भारद्वाज ने आरोपियों को बरी करते हुए कहा कि यह एक भयानक मामला था, जिसमें सात लोगों के मौत के घाट उतार दिए गए थे। मामले की जांच यूपी पुलिस से सीबीआई को सौंपी गई। इतना ही नहीं सुनवाई को यूपी से दिल्ली स्थानांतरित करना पड़ा। बदकिस्मती से अभियोजन पक्ष के सभी गवाह मुकर गए। सुनवाई के दौरान यदि गवाहों को सुरक्षा दिया गया होता और ठोस सुबूत जुटाये जाते, तो केस का परिणाम कुछ और ही होता।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सीबीआई को सौंपी थी जांच
मृतक के परिजनों की याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने केस की जांच सीबीआई को सौंपी थी। सीबीआई ने लंबी जांच के बाद यूपी की विशेष अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया था। मामला दिल्ली ट्रांसफर होने के बाद पहले इसकी सुनवाई तीस हजारी कोर्ट, पटियाला हाउस कोर्ट और फिर सांसदों विधायकों के लिए बनी विशेष अदालत में हुई।
विधायक कृष्णानंद राय हत्याकांड घटनाक्रम
- 29 नवंबर 2005- भाजपा के तत्कालीन विधायक कृष्णानंद राय और छह अन्य की हत्या ।
- 21 फरवरी 2006- उत्तर प्रदेश पुलिस ने अदालत में पहला आरोपपत्र दायर किया। इसमें अफजल हक, अफजल अंसारी, प्रेम प्रकाश सिंह उर्फ मुन्ना बजरंगी, अताउर्र रहमान और फिरदोस को नामजद किया गया था।
- 15 मार्च 2006- उत्तर प्रदेश ने दूसरा आरोपपत्र मुख्तार अंसारी के खिलाफ दायर किया।
- मई 2006- कृष्णानंद राय की पत्नी अल्का राय की मांग पर इलाहाबाद हाई कोर्ट का सीबीआई जांच का आदेश
- 30 अगस्त 2006- मामले में तीसरा आरोपपत्र सीबीआइ ने दायर किया, जिसमें संजीव माहेश्वरी को भी आरोपित किया गया।
- दिसंबर 2006- सीबीआइ ने चौथा आरोपपत्र दायर कर राकेश पांडे और रामू मल्लाह को नामजद किया।
- 20 मार्च 2007- पांचवां आरोपपत्र मंसूर अंसारी के खिलाफ दायर किया गया।
- 22 अप्रैल 2013- सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई उत्तर प्रदेश के गाजीपुर से दिल्ली की अदालत में ट्रांसफर की।
- 15 मार्च 2014- छठा आरोपपत्र मुन्ना बजरंगी के खिलाफ दायर किया गया।
- 3 जुलाई 2019- अदालत ने आरोपितों को बरी करते हुए अपना फैसला सुनाया।