फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   krishi bhawan kadimi mosque removal centre delhi high court

दिल्ली: '100 साल पुरानी मस्जिद को हटाना होगा', केंद्र की दलील; सरकारी संपत्ति का धर्मनिरपेक्ष स्वरूप जरूरी

Tue, 03 Nov 2026 07:12 PM IST
विकास कुमार पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: विकास कुमार Updated Tue, 03 Nov 2026 07:12 PM IST
सार

सरकार ने बताया कि कृषि भवन और सेंट्रल सेक्रेटेरिएट परिसर धर्मनिरपेक्ष सार्वजनिक परिसर हैं। ये विशेष रूप से सरकारी, प्रशासनिक और सार्वजनिक सेवा कार्यों के लिए समर्पित हैं। केंद्र ने यह भी कहा कि डॉ. राजेंद्र प्रसाद रोड पर स्थित यह मस्जिद सरकारी भूमि पर है। नवंबर 1940 में हुए एक समझौते के तहत केवल मस्जिद के रूप में उपयोग के लिए अनुमति दी गई थी।

विज्ञापन
krishi bhawan kadimi mosque removal centre delhi high court
कृषि भवन में मौजूद कदीमी मस्जिद - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

केंद्र सरकार ने दिल्ली उच्च न्यायालय को बताया है कि कृषि भवन परिसर में स्थित 100 साल पुरानी मस्जिद को हटाना होगा। सरकार के अनुसार, किसी सरकारी कार्यालय परिसर में स्थायी धार्मिक ढांचा स्थापित करना या बनाए रखना अस्वीकार्य है। यह सरकारी संपत्ति के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप के साथ असंगत है।

विज्ञापन

 

Trending Videos

क्यों हटाना जरूरी है?
सरकार ने कहा कि सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास मास्टर प्लान में कॉमन सेंट्रल सेक्रेटेरिएट (सीसीएस) बिल्डिंग 4 और 5 का पुनर्विकास शामिल है। यह परियोजना राष्ट्र के शासन के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाने के लिए महत्वपूर्ण है। कदीमी मस्जिद परियोजना स्थल पर स्थित है और परियोजना के निष्पादन के लिए इसे हटाना आवश्यक है।

विज्ञापन
विज्ञापन

सरकार का तर्क और कानूनी आधार
आवास और शहरी कार्य मंत्रालय के तहत आने वाले भूमि और विकास कार्यालय (एलएंडडीओ) ने एक हलफनामे में यह बात कही। हलफनामा मस्जिद के संरक्षकों की याचिका के जवाब में दायर किया गया था, जिसमें विध्वंस रोकने की मांग की गई थी। सरकार ने बताया कि कृषि भवन और सेंट्रल सेक्रेटेरिएट परिसर धर्मनिरपेक्ष सार्वजनिक परिसर हैं। ये विशेष रूप से सरकारी, प्रशासनिक और सार्वजनिक सेवा कार्यों के लिए समर्पित हैं। केंद्र ने यह भी कहा कि डॉ. राजेंद्र प्रसाद रोड पर स्थित यह मस्जिद सरकारी भूमि पर है। नवंबर 1940 में हुए एक समझौते के तहत केवल मस्जिद के रूप में उपयोग के लिए अनुमति दी गई थी, जिससे भूमि पर कोई अधिकार या हित प्राप्त नहीं हुआ।

विज्ञापन

याचिकाकर्ताओं की मांग और सुनवाई
केंद्र ने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत किसी मौलिक अधिकार का उल्लंघन नहीं होता है। सरकार ने बताया कि कृषि भवन से दो किलोमीटर के दायरे में 'शाही मस्जिद ज़ब्ता गंज' पूरी तरह कार्यात्मक है। कदीमी मस्जिद 100 साल से अधिक पुरानी है और सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना के तहत इसे ध्वस्त किया जाना है। याचिकाकर्ताओं के वकील ने पहले कहा था कि वे पुनर्विकास परियोजना को रोकना नहीं चाहते हैं। वे केवल नए ढांचे में एक प्रार्थना सुविधा की मांग कर रहे हैं, क्योंकि कदीमी मस्जिद दशकों से सरकारी कर्मचारियों के लिए प्रार्थना स्थल रही है। न्यायमूर्ति अनीश दयाल के आदेश के बाद दायर इस हलफनामे पर अब 23 नवंबर को सुनवाई होगी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed