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केंद्र सरकार ने दी मरीजों को बड़ी राहत, नहीं बढ़ेंगे घुटना इम्प्लांट के दाम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली
Updated Sun, 12 Aug 2018 09:39 PM IST
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फाइल फोटो
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घुटना इम्प्लांट को लेकर देश के करोड़ों मरीजों के लिए राहत की खबर है। केंद्र सरकार ने इन इम्प्लांट की कीमतों को नहीं बढ़ाने का फैसला लिया है।
राष्ट्रीय मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) की बैठक में इस प्रस्ताव को तैयार कर अंतिम मंजूरी के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को भेज दिया गया है।
इसके तहत वर्ष 2017 में घुटना इम्प्लांट की कीमतों पर लगे नियंत्रण को बरकरार रखने और कीमतें पहले जैसी ही रखने की सलाह दी गई है। यानि इस वर्ष घुटने के इंप्लांट की कीमतें नहीं बढ़ेंगी। अभी तक एक घुटने के इंप्लांट के लिए 54,720 रुपए खर्च करने पड़ते हैं।
बताया जा रहा है कि कुछ समय से इम्प्लांट निर्माता कंपनियों का सरकार पर दबाव बढ़ता जा रहा था। मूल्य नियंत्रण के बाद इनकी कीमतों में काफी कमी देखने को मिली है।
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राष्ट्रीय मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) की बैठक में इस प्रस्ताव को तैयार कर अंतिम मंजूरी के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को भेज दिया गया है।
इसके तहत वर्ष 2017 में घुटना इम्प्लांट की कीमतों पर लगे नियंत्रण को बरकरार रखने और कीमतें पहले जैसी ही रखने की सलाह दी गई है। यानि इस वर्ष घुटने के इंप्लांट की कीमतें नहीं बढ़ेंगी। अभी तक एक घुटने के इंप्लांट के लिए 54,720 रुपए खर्च करने पड़ते हैं।
बताया जा रहा है कि कुछ समय से इम्प्लांट निर्माता कंपनियों का सरकार पर दबाव बढ़ता जा रहा था। मूल्य नियंत्रण के बाद इनकी कीमतों में काफी कमी देखने को मिली है।
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2017 से पहले देश में एक घुटना प्रत्यारोपण में मरीज को करीब सवा लाख रुपये का खर्च आता था, लेकिन अभी दिल्ली के डॉ. राम मनोहर लोहिया जैसे अस्पताल में यह कीमत करीब 60 हजार तक पहुंच चुकी है।
इसमें इम्प्लांट के अलावा अन्य सर्जरी सामान की कीमतें शामिल हैं। वहीं जो इम्प्लांट देश में भी बनते हैं, उनका मेटेरियल भी विदेशों से ही आता है।
जब कीमतें तय की गईं थीं, तब और अब के डॉलर की कीमतों में फर्क आ चुका है। इसलिए भी इम्प्लांट की कीमतें बढ़नी चाहिए। हालांकि इन तर्कों पर विचार करने के बाद एनपीपीए ने कीमतों को नहीं बढ़ाने का फैसला लिया।
इसमें इम्प्लांट के अलावा अन्य सर्जरी सामान की कीमतें शामिल हैं। वहीं जो इम्प्लांट देश में भी बनते हैं, उनका मेटेरियल भी विदेशों से ही आता है।
जब कीमतें तय की गईं थीं, तब और अब के डॉलर की कीमतों में फर्क आ चुका है। इसलिए भी इम्प्लांट की कीमतें बढ़नी चाहिए। हालांकि इन तर्कों पर विचार करने के बाद एनपीपीए ने कीमतों को नहीं बढ़ाने का फैसला लिया।