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केजरीवाल ने कहा, दिल्ली ने दिया पराली का आसान समाधान
Thu, 05 Nov 2020 06:11 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Thu, 05 Nov 2020 06:11 AM IST
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हिरनकी गांव में केजरीवाल...
- फोटो : amar ujala
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मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का मानना है कि दिल्ली ने पराली का बहुत ही सस्ता और आसान समाधान दे दिया है। पड़ोसी राज्यों की ओर से कोई कदम नहीं उठाए जाने से किसान मजबूर होकर पराली जला रहे हैं। केजरीवाल बुधवार को पर्यावरण मंत्री गोपाल राय के साथ हिरनकी गांव पहुंचे। वहां उन्होंने भारतीय कृषि अनुसंधान की तरफ से तैयार बॉयो डीकंपोजर केमिकल के छिड़काव का पराली पर पड़ने वाले प्रभावों का जायजा लिया। घोल के असर से वह संतुष्ट भी दिखे।
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केजरीवाल ने कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट को भी बताएंगे कि पराली के समाधान के लिए बॉयो डीकंपोजर केमिकल का छिड़काव बहुत ही प्रभावशाली है। इसके सहारे दूसरे राज्यों की सरकारें पराली का बेहतर तरीके से निपटान कर सकती हैं। प्रदूषण का माकूल समाधान देने के साथ यह खेतों की उर्वरता के लिए फायदेमंद भी होगा।
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केजरीवाल ने कहा कि हर साल पराली जलने की वजह से जो धुआं उठता है, उससे प्रदूषण बढ़ता है। इससे किसान दुखी हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार ने पूसा इंस्टीट्यूट के साथ मिल कर इस बार एक अहम कदम उठाया है। हम लोगों ने किसानों के खेतों में केमिकल का छिड़काव बीते 13 अक्टूबर को किया था। 4 नवंबर को हम देख रहे हैं कि खेत में पराली गलकर खाद बन चुकी है।
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अब किसान अपने खेत में बुवाई का काम कर सकते हैं। केजरीवाल ने उम्मीद जताई कि यह आखिरी साल होगा, जब हम पराली की वजह से प्रदूषण बर्दाश्त कर रहे हैं। अब किसानों को परेशान करने का किसी सरकार के पास कोई बहाना नहीं है।
पड़ोसी राज्यों की वजह से दिल्ली के लोग परेशान
पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने बताया पराली गलकर खाद बन गई है। अगर केंद्र ौर हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश की सरकारों ने समय पर दिल्ली सरकार की तरह पराली से निपटने को लेकर कदम उठाया होता और लापरवाही नहीं बरती होतीं तो दिल्ली के लोगों को इस करोना काल में पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण का जहर नहीं पीना पड़ता। गोपाल राय के मुताबिक, दिल्ली के प्रदूषण में लगभग 40 प्रतिशत योगदान पंजाब, हरियाणा और उतर प्रदेश में जलाई जाने वाली पराली का ही है।