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JNU: यौन शोषण मामले में आरोपी प्रोफेसर जौहरी के कैंपस में प्रवेश के खिलाफ याचिका पर HC ने भेजा नोटिस

Thu, 26 Apr 2018 09:45 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 26 Apr 2018 09:45 AM IST
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jnu: highcourt sent notice to professor atul johari on the plea for stopping to enter in the campus
प्रोफेसर जौहरी

हाईकोर्ट ने जेएनयू के प्रोफेसर अतुल जौहरी के निलंबन और कैंपस में प्रवेश पर रोक की मांग करने वाली याचिका पर जेएनयू, जौहरी व दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

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याचिका में कहा गया कि जौहरी के खिलाफ छात्राओं से छेड़छाड़ की आठ एफआईआर दर्ज हैं। इसके बाद भी वह काम पर हैं और कैंपस में ही रहते हैं। इससे छात्राओं में डर का माहौल है।
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जस्टिस राजीव शकधर ने जेएनयू की छात्राओं की याचिका पर सुनवाई करते हुए जेएनयू के तीन वरिष्ठ अधिकारियों, अतुल जौहरी, पुलिस की जांच अधिकारी व एसएचओ वसंत विहार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिका पर अगली सुनवाई के लिए दो मई की तारीख तय की है।

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याचिकाकर्ता छात्रा का कहना है..

jnu: highcourt sent notice to professor atul johari on the plea for stopping to enter in the campus
jnu

याचिकाकर्ता छात्राओं की ओर से अधिवक्ता वृंदा ग्रोवर ने कहा यह बेहद गंभीर मामला है। जेएनयू वीसी को अतुल जौहरी को मामले की जांच पूरी होने तक निलंबित कर देना चाहिए था। जेएनयू में 1999 से विशाखा गाइडलाइन लागू है। इसके मुताबिक कार्य स्थल पर सुरक्षित माहौल देना संबंधित संस्थान की कानूनी जिम्मेदारी है। इसके मद्दनेजर वीसी को जौहरी पर कार्रवाई करनी चाहिए थी। छात्राओं की ओर से इस बाबत जेएनयू प्रशासन को लिखा भी जा चुका है।

कोर्ट ने पूछा कि क्या इस तरह के मामलों में वीसी को कार्रवाई करने का अधिकार है। इस मामले में कुछ सुधार की कार्रवाई की जानी चाहिए। कोर्ट प्रोफेसर पर बेहद कड़ी कार्रवाई करने के लिए नहीं कह रही है।

दूसरी ओर जेएनयू की ओर से जिरह करते हुए अधिवक्ता गिन्नी रौट्रे ने कहा उनके मुवक्किल पर केवल मुकदमे दर्ज हैं और कोर्ट ने उन्हें अभी तक दोषी करार नहीं दिया।

क्या था मामला

छात्राओं ने यौन शोषण कमेटी को अभी तक शिकायत नहीं दी है। केवल जेएनयू प्रशासन को पत्राचार के आधार पर किसी प्रोफेसर को निलंबित व कैंपस से निष्कासित नहीं किया जा सकता।

दिल्ली पुलिस की ओर से स्थायी अधिवक्ता सत्यकाम ने कोर्ट को बताया कि प्रोफेसर पर 16 व 19 मार्च को आठ छात्राओं ने एफआईआर दर्ज करवाई थीं। इन छात्राओं ने मजिस्ट्रेट के समक्ष बयान दर्ज करवाकर छेड़छाड़ का आरोप लगाया है।

निचली अदालत ने इन सभी मामलों में एक साथ 21 मार्च को जौहरी को जमानत प्रदान कर दी थी। कोर्ट ने इन बयानों की कॉपी वीसी को भेजने का निर्देश दिया है ताकि वह इस मामले में कार्रवाई पर विचार कर सकें। 

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