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Delhi NCR News: आंदोलन के बाद शांत हुआ जंतर-मंतर, अब सेल्फी पॉइंट बना धरना स्थल
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36 दिन के छात्र आंदोलन के खत्म होने के बाद गतिविधियां हुईं सामान्य
नितिन राजपूत
नई दिल्ली। छात्र आंदोलन के समाप्त होने के बाद जंतर-मंतर का माहौल धीरे-धीरे सामान्य होता नजर आ रहा है। हालांकि, आंदोलन खत्म होने के बावजूद यहां आने वालों की संख्या कम नहीं हुई है। सोमवार को दिल्ली और आसपास के राज्यों से बड़ी संख्या में छात्र और युवा जंतर-मंतर सिर्फ यह देखने पहुंचे कि जिस स्थान की तस्वीरें और वीडियो उन्होंने पिछले एक महीने से अधिक समय तक सोशल मीडिया पर देखी थीं, वह अब कैसा दिखता है। कई युवाओं ने बैरिकेड्स के बाहर खड़े होकर सेल्फी ली और आंदोलन स्थल को अपने मोबाइल कैमरों में कैद किया।
जयपुर, लखनऊ, हरियाणा और उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों से आए छात्रों का कहना था कि उन्होंने आंदोलन को केवल मोबाइल स्क्रीन पर देखा था। सोशल मीडिया पर लगातार वायरल हो रही तस्वीरों और वीडियो ने उनके मन में इस जगह को करीब से देखने की उत्सुकता पैदा कर दी थी। उनका कहना था कि कुछ दिन पहले तक जहां हजारों छात्रों की भीड़, नारेबाजी और पुलिस की मौजूदगी दिखाई देती थी, वहीं अब उसी सड़क पर सन्नाटा और सामान्य गतिविधियां देखने को मिल रही हैं। उनके अनुसार, यह बदलाव अपने आप में एक अलग अनुभव है।
धरना स्थल से प्रदर्शनकारी भले ही लौट गए हों, लेकिन आंदोलन के निशान अभी भी पूरी तरह मिटे नहीं हैं। सड़क किनारे कई स्थानों पर पुराने पोस्टर, प्लास्टिक की कुर्सियां, बर्तन और अन्य सामान अब भी पड़े दिखाई दिए। दिल्ली पुलिस की ओर से बैरिकेड्स की मरम्मत और रंगाई का काम जारी है, जबकि डिवाइडरों को भी दोबारा व्यवस्थित किया जा रहा है। पूरे इलाके में सामान्य स्थिति बहाल करने की प्रक्रिया जारी है।
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सुरक्षा व्यवस्था भी पूरी तरह नहीं हटाई गई है। रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) के जवान अब भी इलाके में तैनात हैं और कई स्थानों पर बैरिकेड्स लगे हुए हैं। पुलिस की निगरानी पहले की तुलना में कम जरूर हुई है, लेकिन सुरक्षा को लेकर सतर्कता बरकरार है।
इसी बीच, जंतर-मंतर पर एक आंदोलन समाप्त हुआ तो दूसरे प्रदर्शनों ने उसकी जगह ले ली। गोरखालैंड राज्य की मांग को लेकर प्रदर्शनकारी धरने पर बैठे नजर आए। वहीं, महिलाओं के लिए संसद और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने की मांग को लेकर भी एक संगठन प्रदर्शन करता दिखा।
सोशल मीडिया से प्रेरित होकर पहुंचे जंतर-मंतर
हरियाणा से आईं आंदोलन समर्थक प्रीति लांबा ने कहा कि उन्होंने छात्रों का समर्थन इसलिए किया क्योंकि यह युवाओं के भविष्य से जुड़ा मुद्दा था। वहीं, जयपुर के छात्र विशाल ने बताया कि सोशल मीडिया पर आंदोलन की लगातार तस्वीरें देखने के बाद उन्होंने यहां आने का फैसला किया। जयपुर के विशाल, लखनऊ के मनोज कुमार समेत कई छात्रों ने बताया कि उन्होंने आंदोलन केवल सोशल मीडिया पर देखा था। इसलिए वे उस स्थान को अपनी आंखों से देखने और वहां का बदला हुआ माहौल महसूस करने पहुंचे। लखनऊ से आए मनोज कुमार ने कहा कि आंदोलन समाप्त होने के बावजूद वह इस जगह का बदला हुआ माहौल अपनी आंखों से देखना चाहते थे। सोनीपत से पहुंचे एक छात्र का कहना था कि मोबाइल पर वीडियो देखकर किसी आंदोलन का वास्तविक माहौल समझ में नहीं आता। इसलिए वह खुद यहां आकर उस स्थान को महसूस करना चाहते थे।
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नितिन राजपूत
नई दिल्ली। छात्र आंदोलन के समाप्त होने के बाद जंतर-मंतर का माहौल धीरे-धीरे सामान्य होता नजर आ रहा है। हालांकि, आंदोलन खत्म होने के बावजूद यहां आने वालों की संख्या कम नहीं हुई है। सोमवार को दिल्ली और आसपास के राज्यों से बड़ी संख्या में छात्र और युवा जंतर-मंतर सिर्फ यह देखने पहुंचे कि जिस स्थान की तस्वीरें और वीडियो उन्होंने पिछले एक महीने से अधिक समय तक सोशल मीडिया पर देखी थीं, वह अब कैसा दिखता है। कई युवाओं ने बैरिकेड्स के बाहर खड़े होकर सेल्फी ली और आंदोलन स्थल को अपने मोबाइल कैमरों में कैद किया।
जयपुर, लखनऊ, हरियाणा और उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों से आए छात्रों का कहना था कि उन्होंने आंदोलन को केवल मोबाइल स्क्रीन पर देखा था। सोशल मीडिया पर लगातार वायरल हो रही तस्वीरों और वीडियो ने उनके मन में इस जगह को करीब से देखने की उत्सुकता पैदा कर दी थी। उनका कहना था कि कुछ दिन पहले तक जहां हजारों छात्रों की भीड़, नारेबाजी और पुलिस की मौजूदगी दिखाई देती थी, वहीं अब उसी सड़क पर सन्नाटा और सामान्य गतिविधियां देखने को मिल रही हैं। उनके अनुसार, यह बदलाव अपने आप में एक अलग अनुभव है।
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धरना स्थल से प्रदर्शनकारी भले ही लौट गए हों, लेकिन आंदोलन के निशान अभी भी पूरी तरह मिटे नहीं हैं। सड़क किनारे कई स्थानों पर पुराने पोस्टर, प्लास्टिक की कुर्सियां, बर्तन और अन्य सामान अब भी पड़े दिखाई दिए। दिल्ली पुलिस की ओर से बैरिकेड्स की मरम्मत और रंगाई का काम जारी है, जबकि डिवाइडरों को भी दोबारा व्यवस्थित किया जा रहा है। पूरे इलाके में सामान्य स्थिति बहाल करने की प्रक्रिया जारी है।
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सुरक्षा व्यवस्था भी पूरी तरह नहीं हटाई गई है। रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) के जवान अब भी इलाके में तैनात हैं और कई स्थानों पर बैरिकेड्स लगे हुए हैं। पुलिस की निगरानी पहले की तुलना में कम जरूर हुई है, लेकिन सुरक्षा को लेकर सतर्कता बरकरार है।
इसी बीच, जंतर-मंतर पर एक आंदोलन समाप्त हुआ तो दूसरे प्रदर्शनों ने उसकी जगह ले ली। गोरखालैंड राज्य की मांग को लेकर प्रदर्शनकारी धरने पर बैठे नजर आए। वहीं, महिलाओं के लिए संसद और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने की मांग को लेकर भी एक संगठन प्रदर्शन करता दिखा।
सोशल मीडिया से प्रेरित होकर पहुंचे जंतर-मंतर
हरियाणा से आईं आंदोलन समर्थक प्रीति लांबा ने कहा कि उन्होंने छात्रों का समर्थन इसलिए किया क्योंकि यह युवाओं के भविष्य से जुड़ा मुद्दा था। वहीं, जयपुर के छात्र विशाल ने बताया कि सोशल मीडिया पर आंदोलन की लगातार तस्वीरें देखने के बाद उन्होंने यहां आने का फैसला किया। जयपुर के विशाल, लखनऊ के मनोज कुमार समेत कई छात्रों ने बताया कि उन्होंने आंदोलन केवल सोशल मीडिया पर देखा था। इसलिए वे उस स्थान को अपनी आंखों से देखने और वहां का बदला हुआ माहौल महसूस करने पहुंचे। लखनऊ से आए मनोज कुमार ने कहा कि आंदोलन समाप्त होने के बावजूद वह इस जगह का बदला हुआ माहौल अपनी आंखों से देखना चाहते थे। सोनीपत से पहुंचे एक छात्र का कहना था कि मोबाइल पर वीडियो देखकर किसी आंदोलन का वास्तविक माहौल समझ में नहीं आता। इसलिए वह खुद यहां आकर उस स्थान को महसूस करना चाहते थे।