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दिल्ली दंगा मामलाः आरोपी की पहचान के लिए तकनीक का प्रयोग कर सकती है जांच एजेंसी

Fri, 02 Oct 2020 06:59 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Fri, 02 Oct 2020 06:59 AM IST
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Investigation agency can use technology to identify accused
प्रतीकात्मक तस्वीर

किसी मामले में आरोपी की पहचान के लिए जांच में तकनीक का प्रयोग करने पर किसी तरह की रोक नहीं है। जांच एजेंसी शिनाख्त परेड के बजाय आरोपी की तकनीकी रूप से भी पहचान कर सकती है। अदालत ने यह बात दंगा मामले में एक आरोपी की जमानत याचिका खारिज करते हुए कही। 

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कड़कड़डूमा जिला अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विनोद यादव ने गंभीर आरोप तथा केस के तथ्यों के मद्देनजर आरोपी मो. आरिफ की जमानत याचिका बृहस्पतिवार को खारिज कर दी। आरोपी पर दयालपुर इलाके में दंगों में हत्या की कोशिश तथा अन्य धाराओं में आरोप हैं। इस मामले की जांच दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा कर रही है। 
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दिल्ली पुलिस की ओर से जमानत याचिका का विरोध करते हुए विशेष अधिवक्ता अमित प्रसाद ने कहा कि एक गवाह के वीडियो जरिये तकनीकी रूप से आरोपी की मौके पर मौजूदगी की पुष्टि हुई है। हालांकि बचाव पक्ष के अधिवक्ता मेहमूद प्राचा ने आपत्ति करते हुए कहा कि आरोप पत्र दाखिल होने के बाद ऐसा करने की कानून अनुमति नहीं देता। इस पर अमित प्रसाद ने कहा कि केस में कोई नई सामग्री नहीं जोड़ी गई है, केवल आरोपी के पहचान की प्रक्रिया में परिवर्तन किया गया है। 
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अदालत ने अपने फैसले में कहा कि आगे जांच के लिए आरोपी की पहचान के लिए तकनीक का प्रयोग करने के लिए जांच एजेंसी पर रोक नहीं है। बचाव पक्ष का तर्क था कि आरोपी आरिफ की कभी शिनाख्त परेड नहीं हुई और न किसी गवाह और न पुलिस के सिपाही ने उसे पहचाना। 


अदालत ने कहा कि सीसीटीवी फुटेज में आरोपी हाथ में डंडा लिए और सीसीटीवी कैमरा तोड़ते हुए साफ दिख रहा है। इस फुटेज से उसकी तस्वीरें भी ली गई हैं। उसकी पहचान सिपाही ने की थी और घटना वाले दिन आरोपी के मोबाइल की लोकेशन भी घटनास्थल पर थी और वह अन्य आरोपियों के संपर्क में था। इसके अलावा इसमें आम गवाह आरोपी के इलाके के निवासी हैं और आरोपी को जमानत मिलने पर वह उन्हें धमका सकता है।

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